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Bareilly News: आश्रय स्थल बने तभी कुत्तों से मिलेगी निजात

Tue, 25 Aug 2026 01:31 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Tue, 25 Aug 2026 01:31 AM IST
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Relief from the dog menace will be possible only when shelters are established.
बरेली। शहर के लोग कुत्तों व बंदरों के आतंक से परेशान हैं। नगर निगम कुत्तों को पकड़वाता है, लेकिन बधियाकरण के बाद उनको दोबारा उसी स्थान पर छोड़ दिया जाता है। अमर उजाला ने अपने समाचारीय अभियान के जरिये मुद्दे को प्रमुखता से उठाया और समाधान भी सुझाए। कार्यालय परिसर में सोमवार को आयोजित संवाद में पार्षदों ने एक स्वर से आश्रय स्थल बनवाने की मांग उठाई।
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पूर्व पार्षद अतुल कपूर ने कहा कि हर वार्ड में कुत्तों का आतंक है, लेकिन निगम के पास संसाधनों का अभाव है। चारों जोन में एक-एक हजार कुत्तों की क्षमता वाले आश्रय स्थल बना दिए जाएं तो सड़कों पर घूम रहे कुत्तों को पकड़कर उसमें रखा जा सकता है। यहां उनका बधियाकरण व टीकाकरण भी आसानी से किया जा सकेगा। अगर हर वार्ड व्यवस्था हो तो कुत्तों को पकड़ने के बाद उन्हें आश्रय स्थल तक पहुंचाना आसान होगा।
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वार्ड 52 के पार्षद शमीम अहमद ने बताया कि कुत्तों को पकड़ने के बाद उनका टीकाकरण नहीं हो पा रहा है। निगम की टीम सिर्फ खानापूर्ति करके चली जाती है। पार्षद शशि सक्सेना ने बताया कि आवास विकास कॉलोनी, राजेंद्रनगर, डीडीपुरम जैसे पॉश इलाकों में भी कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई इंतजाम नहीं हैं। आए दिन कुत्ते लोगों पर हमला करते है, लेकिन इन्हें देखने वाला कोई नहीं है।
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पार्षद सुधा सक्सेना ने बताया कि कुछ दिन पहले रेलवे कॉलोनी में एक कुत्ते ने नौ लोगों को शिकार बनाया। जहां खाने-पीने के लिए मिलता है, कुत्तों का झुंड वहीं डटा रहता है। डीडीपुरम व राजेंद्रनगर में सर्वाधिक फूड स्टाल लगते हैं। इस वजह से वहां कुत्तों की संख्या ज्यादा है।
पार्षद राजेश अग्रवाल ने कहा कि कुत्तों के नाम पर निगम में भ्रष्टाचार हो रहा है। कुत्तों को पकड़ने व बधियाकरण के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जा रहे है। वित्त वर्ष 2024-25 में सोसाइटी फॉर ह्यूमन एंड एनिमल वेलफेयर को अलग-अलग माह में 27.53 लाख का भुगतान किया गया। इसके बावजूद स्थिति नहीं सुधरी।
पार्षद गौरव सक्सेना ने बताया कि निगम की बैठकों में कुत्तों व बंदरों का मुद्दा उठाया जाता है, इसके बावजूद अब तक एजेंसी का चयन नहीं हो पाया है। निगम एजेंसी का चयन कर एक सितंबर से कुत्तों को पकड़वाने का दावा कर रहा है, लेकिन इसमें भी संशय है। डाॅग व एनिमल लवर घरों के बाहर खाना डाल देते हैं। कुत्तों का झुंड वहां पहुंच जाता है। सीबीगंज के कुत्तों के काटने से चार बच्चों की मौत भी हो चुकी है।

नगर निगम की उपसभापति पूनम राठौर ने कहा कि कुत्तों व बंदरों को पकड़ने के लिए एक सितंबर से अभियान चलाया जाएगा। तब तक एजेंसी का चयन भी हो जाएगा। इससे लोगों को राहत मिलेगी। संवाद के दौरान चंद्रपाल राठौर, राजकुमारी, मो. गुलबशर आदि मौजूद रहे।
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