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Bareilly News: पोलियो से राहत, पर नहीं थम रहे पक्षाघात के मामले
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बरेली। नियमित टीकाकरण की वजह से बीते कई वर्षों से जिले में पोलियो के मरीज नहीं मिले हैं, लेकिन इस साल जनवरी से सितंबर तक 156 बच्चों में एक्यूट फ्लैसिड पैरालिसिस (एएफपी) के मामले सामने आए हैं। इन मामलों की निगरानी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की टीम भी करती है।
सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह के मुताबिक, एएफपी के दर्ज हुए मामले पोलियो की निगरानी व्यवस्था का हिस्सा हैं। वर्ष 2022 में 181, 2023 में 206, 2024 में 198, 2025 में 184 एएफपी के मामले सामने आए। वर्ष 2026 में सितंबर तक 156 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। ब्लॉकवार आंकड़ों के अनुसार, शहरी क्षेत्र में 32, बिथरी में 16, कुआंडांडा, बहेड़ी, मझगवां में क्रमशः 13, 10, 10, भमोरा, दलेलनगर में नौ-नौ केस मिले हैं।
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप गुप्ता के मुताबिक, एएफपी बच्चों में अचानक होने वाली मांसपेशियों की कमजोरी या शिथिल पक्षाघात की स्थिति है। यह पोलियो संक्रमण नहीं है। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. प्रशांत रंजन के मुताबिक, पोलियो का कोई इलाज नहीं है, सिर्फ टीकाकरण ही बचाव का तरीका है। ब्यूरो
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सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह के मुताबिक, एएफपी के दर्ज हुए मामले पोलियो की निगरानी व्यवस्था का हिस्सा हैं। वर्ष 2022 में 181, 2023 में 206, 2024 में 198, 2025 में 184 एएफपी के मामले सामने आए। वर्ष 2026 में सितंबर तक 156 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। ब्लॉकवार आंकड़ों के अनुसार, शहरी क्षेत्र में 32, बिथरी में 16, कुआंडांडा, बहेड़ी, मझगवां में क्रमशः 13, 10, 10, भमोरा, दलेलनगर में नौ-नौ केस मिले हैं।
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वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप गुप्ता के मुताबिक, एएफपी बच्चों में अचानक होने वाली मांसपेशियों की कमजोरी या शिथिल पक्षाघात की स्थिति है। यह पोलियो संक्रमण नहीं है। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. प्रशांत रंजन के मुताबिक, पोलियो का कोई इलाज नहीं है, सिर्फ टीकाकरण ही बचाव का तरीका है। ब्यूरो
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