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Bareilly News: अपंजीकृत अस्पतालों में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए भटक रहे परिजन
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बरेली। सीआरएस (सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम) पोर्टल पर कई निजी अस्पतालों का पंजीकरण नही है। यहां किसी बच्चे का जन्म या मरीज की मृत्यु होने पर प्रमाणपत्र के लिए परिजनों को स्वास्थ्य विभाग, नगर निकाय, पंचायतों का चक्कर काटना पड़ रहा है। अफसर अपंजीकृत अस्पतालों को नोटिस जारी करने का दावा कर रहे हैं, लेकिन जनता को भागदौड़ से निजात नहीं मिल पा रही है।
स्वास्थ्य विभाग में जिले के पांच सौ से ज्यादा निजी अस्पताल पंजीकृत हैं, पर सीआरएस पोर्टल पर यह आंकड़ा महज 355 है। यानी कि करीब डेढ़ सौ निजी अस्पताल अभी पोर्टल पर अपंजीकृत हैं। वहीं, कई ऐसे अस्पताल भी संचालित हैं, जिनका न तो स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण है, न ही सीआरएस पोर्टल पर। ऐसे अस्पतालों में बच्चे का जन्म या इलाज के दौरान किसी की मृत्यु होने पर उसका प्रमाणपत्र नहीं मिल पा रहा। आए दिन ऐसे मामले नगर निकाय और स्वास्थ्य महकमे तक पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक अवैध चल रहे अस्पतालों में कितने प्रसव हुए, कितने मरीजों की मौत हुई, इसका आंकलन नहीं हो पाता है।
दावा : पंजीकरण के लिए अस्पतालों को दे रहे नोटिस
नियमानुसार ऑनलाइन ही जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र अस्पताल की ओर से दिया जाता है। अस्पताल सीआरएस पोर्टल पर पंजीकृत नहीं होने पर परिजन विभाग पहुंचकर प्रमाणपत्र मांग रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि प्राप्त प्रार्थनापत्र के अनुसार संबंधित अस्पतालों को नोटिस देकर पंजीकरण कराने समेत अवैध अस्पतालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
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सामान्य प्रसव दिखाकर फर्जीवाड़े की भी आशंका
बताया जाता है कि शहर समेत देहात क्षेत्र के कई अवैध अस्पतालों में प्रसव के बाद ऑनलाइन प्रमाणपत्र जारी नहीं होते। ऐसे में अस्पताल स्थानीय ग्राम पंचायत या नगर निकाय के जरिये घर पर सामान्य प्रसव दिखाकर प्रमाणपत्र बनवा रहे हैं। मृत्यु की दशा में भी घर पर मौत होने की जानकारी देते हुए संबंधित श्मशान भूमि, कब्रिस्तान से प्राप्त रसीद को आधार बनाकर प्रमाणपत्र जारी करवा रहे हैं।
केस-1
बहेड़ी के मनोरमा हॉस्पिटल में बीते दिनों गर्भवती का प्रसव हुआ। नवजात के जन्म प्रमाणपत्र के लिए अभिभावक पहुंचे तो उन्हें स्वास्थ्य विभाग भेज दिया गया। प्राप्त प्रार्थनापत्र में अस्पताल का नाम होने पर उनसे संपर्क किया गया। अस्पताल का विभागीय पंजीकरण था, पर पोर्टल पर अपंजीकृत मिलने पर नोटिस जारी की गई। तब अस्पताल संचालक ने पंजीकरण कराया।
केस-2
जंक्शन रोड स्थित प्रेम कुमार हॉस्पिटल में कुछ दिन पूर्व एक नवजात की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। परिजनों ने मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए स्वास्थ्य विभाग में प्रार्थनापत्र दिया। सीआरएस पोर्टल पर अपंजीकृत मिलने पर अस्पताल संचालक को पंजीकरण के लिए निर्देशित किया गया। अस्पताल संचालक ने सभी प्रक्रिया पूरी कर पंजीकरण कराने पर सहमति जताई है।
विभाग में पंजीकृत और सीआरएस पोर्टल पर अपंजीकृत अस्पतालों को नोटिस देकर पंजीकरण के लिए निर्देशित किया जा रहा है। अवैध अस्पताल में प्रसव की सूचना पर नियमानुसार कार्रवाई हो रही है। निजी अस्पताल संचालकों से अपील है कि वे पोर्टल पर पंजीकरण कराएं। - डॉ. लईक अहमद अंसारी, नोडल अधिकारी
अमर उजाला ब्यूरो
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स्वास्थ्य विभाग में जिले के पांच सौ से ज्यादा निजी अस्पताल पंजीकृत हैं, पर सीआरएस पोर्टल पर यह आंकड़ा महज 355 है। यानी कि करीब डेढ़ सौ निजी अस्पताल अभी पोर्टल पर अपंजीकृत हैं। वहीं, कई ऐसे अस्पताल भी संचालित हैं, जिनका न तो स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण है, न ही सीआरएस पोर्टल पर। ऐसे अस्पतालों में बच्चे का जन्म या इलाज के दौरान किसी की मृत्यु होने पर उसका प्रमाणपत्र नहीं मिल पा रहा। आए दिन ऐसे मामले नगर निकाय और स्वास्थ्य महकमे तक पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक अवैध चल रहे अस्पतालों में कितने प्रसव हुए, कितने मरीजों की मौत हुई, इसका आंकलन नहीं हो पाता है।
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दावा : पंजीकरण के लिए अस्पतालों को दे रहे नोटिस
नियमानुसार ऑनलाइन ही जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र अस्पताल की ओर से दिया जाता है। अस्पताल सीआरएस पोर्टल पर पंजीकृत नहीं होने पर परिजन विभाग पहुंचकर प्रमाणपत्र मांग रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि प्राप्त प्रार्थनापत्र के अनुसार संबंधित अस्पतालों को नोटिस देकर पंजीकरण कराने समेत अवैध अस्पतालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
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सामान्य प्रसव दिखाकर फर्जीवाड़े की भी आशंका
बताया जाता है कि शहर समेत देहात क्षेत्र के कई अवैध अस्पतालों में प्रसव के बाद ऑनलाइन प्रमाणपत्र जारी नहीं होते। ऐसे में अस्पताल स्थानीय ग्राम पंचायत या नगर निकाय के जरिये घर पर सामान्य प्रसव दिखाकर प्रमाणपत्र बनवा रहे हैं। मृत्यु की दशा में भी घर पर मौत होने की जानकारी देते हुए संबंधित श्मशान भूमि, कब्रिस्तान से प्राप्त रसीद को आधार बनाकर प्रमाणपत्र जारी करवा रहे हैं।
केस-1
बहेड़ी के मनोरमा हॉस्पिटल में बीते दिनों गर्भवती का प्रसव हुआ। नवजात के जन्म प्रमाणपत्र के लिए अभिभावक पहुंचे तो उन्हें स्वास्थ्य विभाग भेज दिया गया। प्राप्त प्रार्थनापत्र में अस्पताल का नाम होने पर उनसे संपर्क किया गया। अस्पताल का विभागीय पंजीकरण था, पर पोर्टल पर अपंजीकृत मिलने पर नोटिस जारी की गई। तब अस्पताल संचालक ने पंजीकरण कराया।
केस-2
जंक्शन रोड स्थित प्रेम कुमार हॉस्पिटल में कुछ दिन पूर्व एक नवजात की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। परिजनों ने मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए स्वास्थ्य विभाग में प्रार्थनापत्र दिया। सीआरएस पोर्टल पर अपंजीकृत मिलने पर अस्पताल संचालक को पंजीकरण के लिए निर्देशित किया गया। अस्पताल संचालक ने सभी प्रक्रिया पूरी कर पंजीकरण कराने पर सहमति जताई है।
विभाग में पंजीकृत और सीआरएस पोर्टल पर अपंजीकृत अस्पतालों को नोटिस देकर पंजीकरण के लिए निर्देशित किया जा रहा है। अवैध अस्पताल में प्रसव की सूचना पर नियमानुसार कार्रवाई हो रही है। निजी अस्पताल संचालकों से अपील है कि वे पोर्टल पर पंजीकरण कराएं। - डॉ. लईक अहमद अंसारी, नोडल अधिकारी
अमर उजाला ब्यूरो