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राशन माफिया के आगे सारा सिस्टम फेल
बरेली।
Updated Sun, 28 May 2017 01:43 AM IST
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Ration Mafia Fails All System Fails
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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राशन माफिया के आगे सारी व्यवस्था ध्वस्त है। न तो राशन कार्ड की नई व्यवस्था कोटे के राशन को बाजार में बेचने से रोक पा रही है और न ही अफसरों की मुस्तैदी। भुता में बड़ी मात्रा में सरकारी गल्ला पकड़े जाने के बाद यह साबित हो गया है कि सारी व्यवस्था राशन माफिया के आगे बौनी है।
अफसरों और राजनीतिक संरक्षण में चल रहा काला धंधा गरीबों पर भारी पड़ता जा रहा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत तीन रुपये किलो चावल और दो रुपये किलो गेहूं चयनित गरीब पात्रों हक अफसर, नेता और कोटेदारों का गठजोड़ मार लेता है। पिछले दिनों 26 मार्च को बिथरी ब्लाक स्थित उड़ला जागीर गोदाम से अनाज की ब्लैक पकड़ी थी, अब भुता का मामला सामने आया है। मार्च में तत्कालीन डीएम सुरेंद्र सिंह ने एसएफसी (राज्य खाद्य निगम) अफसरों पर कार्रवाई करने की संस्तुति की थी, इस बीच जब डीएम, कमिश्नर बदले तो मामला ही दब गया।
गरीबों का गेहूं क्रय केंद्रों पर
भुता स्थित एसएफसी गोदाम से करीब सात हजार क्विंटल गेहूं खुले बाजार और सरकारी क्रय केंद्रों पर बेचा गया है, लेकिन अफसरों ने रात में गोदाम स्टाक चेक नहीं किया। उधर, कालाबाजारी में पकड़े गए रामबाबू गुप्ता से बयान दिया है कि गेहूं प्रदीप गुप्ता से खरीदा गया है। जांच अफसरों ने प्रदीप से जानकारी नहीं ली कि सरकारी बारदाना में गेहूं उसने कहां से लिया। रामबाबू ने बयान दिया है कि वह सरकारी क्र्र्रय केंद्रों पर गेहूं बेचता था। इस क्षेत्र में एसएफसी, एफसीआई और पीसीएफ क्रय केंद्र संचालित हैं। यानी एसएफसी गोदाम से गेहूं उठकर सरकारी क्रय केंद्रों पर पहुंच रहा था। इस कालाबाजारी में इन धंधेबाजों को प्रति क्विंटल कम से कम से 14 सौ रुपये बच रहे हैं। इसका हिस्सा अफसरों तक पहुंचता है। जिले भर में एसएफसी गोदामों से हजारों क्विंटल चावल और गेहूं हर माह ब्लैक किया जा रहा है।
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त्रिस्तरीय चेकिंग कागजों पर
सार्वजनिक वितरण योजना पारदर्शी और सुरक्षित बनाए रखने के लिए त्रिस्तरीय सत्यापन व्यवस्था है। गोदाम पर खाद्यान्न पहुंचने का सत्यापन संबंधित एसडीएम और सहयोगी करेंगे। कोटेदारों को खाद्यान्न सौंपते समय संबंधित सप्लाई इंस्पेक्टर सत्यापन कर रजिस्टर पर हस्ताक्षर करेंगे, इसके साथ कोटेदार माल रिसीव करेगा। दुकान से वितरण व्यवस्था सत्यापन नामित पर्यवेक्षक आदि करेंगे। बताया जाता है कि एसडीएम शायद ही कभी अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं, यही स्थिति पूर्ति निरीक्षक की है। कागजी सत्यापन करने वालों को निर्धारित लिफाफा नियमित रूप से पहुंच जाता है।
डीएसओ वर्जन:
‘गरीबों के खाद्यान्न की कालाबाजारी और हेराफेरी करने के तीन आरोपियों पर मुकदमा दर्ज कराया गया है। राज्य खाद्य निगम गोदाम और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की अलग से जांच होगी।’
- सीमा त्रिपाठी, डीएसओ
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अफसरों और राजनीतिक संरक्षण में चल रहा काला धंधा गरीबों पर भारी पड़ता जा रहा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत तीन रुपये किलो चावल और दो रुपये किलो गेहूं चयनित गरीब पात्रों हक अफसर, नेता और कोटेदारों का गठजोड़ मार लेता है। पिछले दिनों 26 मार्च को बिथरी ब्लाक स्थित उड़ला जागीर गोदाम से अनाज की ब्लैक पकड़ी थी, अब भुता का मामला सामने आया है। मार्च में तत्कालीन डीएम सुरेंद्र सिंह ने एसएफसी (राज्य खाद्य निगम) अफसरों पर कार्रवाई करने की संस्तुति की थी, इस बीच जब डीएम, कमिश्नर बदले तो मामला ही दब गया।
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गरीबों का गेहूं क्रय केंद्रों पर
भुता स्थित एसएफसी गोदाम से करीब सात हजार क्विंटल गेहूं खुले बाजार और सरकारी क्रय केंद्रों पर बेचा गया है, लेकिन अफसरों ने रात में गोदाम स्टाक चेक नहीं किया। उधर, कालाबाजारी में पकड़े गए रामबाबू गुप्ता से बयान दिया है कि गेहूं प्रदीप गुप्ता से खरीदा गया है। जांच अफसरों ने प्रदीप से जानकारी नहीं ली कि सरकारी बारदाना में गेहूं उसने कहां से लिया। रामबाबू ने बयान दिया है कि वह सरकारी क्र्र्रय केंद्रों पर गेहूं बेचता था। इस क्षेत्र में एसएफसी, एफसीआई और पीसीएफ क्रय केंद्र संचालित हैं। यानी एसएफसी गोदाम से गेहूं उठकर सरकारी क्रय केंद्रों पर पहुंच रहा था। इस कालाबाजारी में इन धंधेबाजों को प्रति क्विंटल कम से कम से 14 सौ रुपये बच रहे हैं। इसका हिस्सा अफसरों तक पहुंचता है। जिले भर में एसएफसी गोदामों से हजारों क्विंटल चावल और गेहूं हर माह ब्लैक किया जा रहा है।
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त्रिस्तरीय चेकिंग कागजों पर
सार्वजनिक वितरण योजना पारदर्शी और सुरक्षित बनाए रखने के लिए त्रिस्तरीय सत्यापन व्यवस्था है। गोदाम पर खाद्यान्न पहुंचने का सत्यापन संबंधित एसडीएम और सहयोगी करेंगे। कोटेदारों को खाद्यान्न सौंपते समय संबंधित सप्लाई इंस्पेक्टर सत्यापन कर रजिस्टर पर हस्ताक्षर करेंगे, इसके साथ कोटेदार माल रिसीव करेगा। दुकान से वितरण व्यवस्था सत्यापन नामित पर्यवेक्षक आदि करेंगे। बताया जाता है कि एसडीएम शायद ही कभी अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं, यही स्थिति पूर्ति निरीक्षक की है। कागजी सत्यापन करने वालों को निर्धारित लिफाफा नियमित रूप से पहुंच जाता है।
डीएसओ वर्जन:
‘गरीबों के खाद्यान्न की कालाबाजारी और हेराफेरी करने के तीन आरोपियों पर मुकदमा दर्ज कराया गया है। राज्य खाद्य निगम गोदाम और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की अलग से जांच होगी।’
- सीमा त्रिपाठी, डीएसओ