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मर चुके लोग भी ले रहे कोटे का राशन
बरेली
Updated Tue, 16 Dec 2014 09:17 PM IST
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ग्राम उनासी में अंत्योदय कार्ड धारक (नंबर 99400) मोती राम और बीपीएल कार्ड धारक (नंबर 68233) लीलाधर की मौत हो चुकी है लेकिन कोटेदार के यहां वे नियमित अपने कार्ड का राशन और मिट्टी का तेल ले रहे हैं। गांव में दिवंगत 19 अन्य ऐसे ही राशन का़र्ड धारक भी यही काम रहे हैं। यह गांव मीरगंज तहसील का है। बसपा नेता और मीरगंज विधायक सुल्तान बेग ने यह प्रकरण प्रमाणों के साथ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सौंपा। सीएम के निर्देश पर उनके सचिव आमोद कुमार ने उस शिकायती पत्र को बरेली के डीएम को संदर्भित करते हुए शीघ्र जांच कर निष्पक्ष कार्रवाई की अपेक्षा की है।
बसपा विधायक ने 26 नवंबर को लखनऊ में मुख्यमंत्री को यह शिकायती पत्र सौंपा था। उन्होंने लिखा है कि ग्राम उनासी में 21 राशन कार्ड फर्जी हैं, 15 राशन कार्ड डबल बने हुए हैं और 43 राशन कार्ड अकेले मृतकों के हैं। इन कार्डों से बीते काफी समय से नियमित गल्ला और मिट्टी का तेल उठाया जा रहा है। विधायक ने लिखा है कि अकेले कोटेदार की गलती नहीं है बल्कि सभी संबंधित विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से यह खेल हो रहा है। इस बारे में पूछने पर विधायक सुल्तान बेग ने मंगलवार को बताया कि इसी गांव में 110 अंत्योदय कार्ड धारकों में से 50 ऐसे हैं जो इस गांव में रहते ही नहीं। अतीत में इस संबंध में दर्ज शिकायत पर जांच तो हुई लेकिन मामले के सही आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनके अनुसार, सूबे के मुखिया से सिर्फ यही अर्ज किया था कि ऐसे फर्जीवाड़े में उन गरीबों का हक न मारा जाए तो जो कि सरकारी योजना के पात्र हैं।
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बसपा विधायक ने 26 नवंबर को लखनऊ में मुख्यमंत्री को यह शिकायती पत्र सौंपा था। उन्होंने लिखा है कि ग्राम उनासी में 21 राशन कार्ड फर्जी हैं, 15 राशन कार्ड डबल बने हुए हैं और 43 राशन कार्ड अकेले मृतकों के हैं। इन कार्डों से बीते काफी समय से नियमित गल्ला और मिट्टी का तेल उठाया जा रहा है। विधायक ने लिखा है कि अकेले कोटेदार की गलती नहीं है बल्कि सभी संबंधित विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से यह खेल हो रहा है। इस बारे में पूछने पर विधायक सुल्तान बेग ने मंगलवार को बताया कि इसी गांव में 110 अंत्योदय कार्ड धारकों में से 50 ऐसे हैं जो इस गांव में रहते ही नहीं। अतीत में इस संबंध में दर्ज शिकायत पर जांच तो हुई लेकिन मामले के सही आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनके अनुसार, सूबे के मुखिया से सिर्फ यही अर्ज किया था कि ऐसे फर्जीवाड़े में उन गरीबों का हक न मारा जाए तो जो कि सरकारी योजना के पात्र हैं।
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