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Bareilly News: समय से इलाज न मिले तो जानलेवा हो सकती है दुर्लभ बीमारी
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बरेली। जिले में भी अब दुर्लभ श्रेणी में दर्ज बीमारियाें की दस्तक होने लगी है। इस वर्ष पहली बार लैप्टो स्पायरोसिस और स्क्रब टाइफस के मरीज मिले। हालांकि, समय से इलाज शुरू होने की वजह से उनकी जान बची। विशेषज्ञ के मुताबिक समय पर इलाज न होता तो जान का जोखिम था।
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. सुदीप सरन के मुताबिक, दुर्लभ रोग दिवस मनाने की वजह है कि चिकित्सक ऐसी बीमारियों को भी प्रैक्टिस के दौरान ध्यान दें जो कभी-कभार उभर रहीं हैं। उनपर अंकुश लगाने पर मंथन करें और लोगों को भी बचाव के प्रति जागरूक करें।
बताया कि दुर्लभ रोग की श्रेणी में वे बीमारियां दर्ज होती हैं, जो अक्सर नहीं होती। होती भी हैं तो उनकी संक्रामकता बेहद कम होती है। रिकेटसिया, लैप्टो स्पायरोसिस, स्क्रब टाइफस, स्वाइन फ्लू, सारकोडोसिस, टाइफस फीवर, स्क्रैप फीवर समेत अन्य कई बीमारियां हैं, जिन्हें चिकित्सक दुर्लभ मानते हैं।
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इसका आकलन ऐसे भी किया जाता है कि जब रोग के इलाज में दवा कारगर न हो। जांच रिपोर्ट में बीमारी की कोई ठोस वजह निकल न सके तब उच्च तकनीकी के जरिए जांच कराई जाती है। सामान्यत: इनकी जांच और इलाज भी सीमित होता है। इसलिए इनका पता जल्द नहीं चलता।
लेप्टो की चपेट में मिले तीन मरीज, स्क्रब का एक
स्वास्थ्य विभाग की आईडीएसपी सेल की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार जिले में पहली बार शेरगढ़ निवासी महिला, सुभाषनगर का एक व्यक्ति और भोजीपुरा का एक युवक लैप्टोस्पायरोसिस की चपेट में मिले। वहीं, पीलीभीत बाइपास निवासी एक युवक स्क्रब टाइफस की चपेट में मिला था। जांच में रोग की पुष्टि हुई थी। समय से बीमारी की जानकारी मिलने की वजह से इलाज शुरू हुआ और किसी की मौत नहीं हुई। अमर उजाला ब्यूरो
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वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. सुदीप सरन के मुताबिक, दुर्लभ रोग दिवस मनाने की वजह है कि चिकित्सक ऐसी बीमारियों को भी प्रैक्टिस के दौरान ध्यान दें जो कभी-कभार उभर रहीं हैं। उनपर अंकुश लगाने पर मंथन करें और लोगों को भी बचाव के प्रति जागरूक करें।
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बताया कि दुर्लभ रोग की श्रेणी में वे बीमारियां दर्ज होती हैं, जो अक्सर नहीं होती। होती भी हैं तो उनकी संक्रामकता बेहद कम होती है। रिकेटसिया, लैप्टो स्पायरोसिस, स्क्रब टाइफस, स्वाइन फ्लू, सारकोडोसिस, टाइफस फीवर, स्क्रैप फीवर समेत अन्य कई बीमारियां हैं, जिन्हें चिकित्सक दुर्लभ मानते हैं।
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इसका आकलन ऐसे भी किया जाता है कि जब रोग के इलाज में दवा कारगर न हो। जांच रिपोर्ट में बीमारी की कोई ठोस वजह निकल न सके तब उच्च तकनीकी के जरिए जांच कराई जाती है। सामान्यत: इनकी जांच और इलाज भी सीमित होता है। इसलिए इनका पता जल्द नहीं चलता।
लेप्टो की चपेट में मिले तीन मरीज, स्क्रब का एक
स्वास्थ्य विभाग की आईडीएसपी सेल की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार जिले में पहली बार शेरगढ़ निवासी महिला, सुभाषनगर का एक व्यक्ति और भोजीपुरा का एक युवक लैप्टोस्पायरोसिस की चपेट में मिले। वहीं, पीलीभीत बाइपास निवासी एक युवक स्क्रब टाइफस की चपेट में मिला था। जांच में रोग की पुष्टि हुई थी। समय से बीमारी की जानकारी मिलने की वजह से इलाज शुरू हुआ और किसी की मौत नहीं हुई। अमर उजाला ब्यूरो