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Bareilly News: केंद्रीय जल आयोग में अटका रामगंगा बैराज, अब कृषि सिंचाई योजना से उम्मीद

Wed, 29 Apr 2026 01:31 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 29 Apr 2026 01:31 AM IST
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Ramganga Barrage stuck in Central Water Commission, now hope from agricultural irrigation scheme
केंद्रीय जल आयोग में अटकी रामगंगा बैराज सिंचाई परियोजना को अब प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में शामिल कराने की तैयारी है। वर्ष 2011 में शुरू हुई इस परियोजना पर 332 करोड़ की जगह 630 करोड़ खर्च कर दिए गए, लेकिन काम अधूरे ही रह गए। 1,045 हेक्टेयर की जगह सिर्फ 312 हेक्टेयर जमीन ही खरीदी गई। नतीजा, मेन कैनाल और शाखाओं का काम भी पूरा नहीं कराया। प्रोजेक्ट की लागत अब बढ़कर 2,184 करोड़ रुपये पहुंच गई है। परियोजना परवान चढ़ती तो दो लाख किसानों को लाभ मिलता। फिलहाल, आठ साल से काम ठप है।
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बरेली और बदायूं के 343 गांवों की 37,453 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचित करने के लिए वर्ष 2008-09 में इस परियोजना पर काम शुरू हुआ था। केंद्रीय जल आयोग के अनुमोदन और जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद वर्ष 2011 में काम शुरू हुआ। तब इसकी लागत 332 करोड़ रुपये आंकी गई थी। इससे 1,045 हेक्टेयर जमीन की खरीद के साथ सदर तहसील के गांव चौबारी में रामगंगा नदी पर 617 मीटर लंबा बैराज, दोनों तरफ 13-13 किलोमीटर लंबे अलफक्स बंध, 11.80 किलोमीटर लंबी मेन कैनाल और 469.30 किलोमीटर लंबाई में शाखाओं का जाल बिछाया जाना था।
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तत्कालीन अधिकारियों ने भूमि की खरीद में लापरवाही बरती। इसी बीच जनवरी 2013 में भूमि अधिग्रहण एक्ट लागू हो गया। इसमें चार गुना मुआवजे का प्रावधान होने से मामला अटक गया। वर्ष 2013 में 630.04 करोड़ का रिवाइज एस्टीमेट शासन को भेजा गया। बजट स्वीकृत होने के बाद सिंचाई विभाग बाढ़ खंड की ओर से आधे-अधूरे काम कराकर परियोजना बीच में ही छोड़ दी गई।
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कराए गए आधे-अधूरे कामबैराज के दोनों तरफ प्रस्तावित बंधे का काम ही नहीं हुआ। 11.80 किमी लंबी मेन कैनाल की खोदाई होनी थी। इसमें 3.80 किमी कैनाल का काम अब भी शेष है। 469.30 किमी लंबी ब्रांच नहरों की जगह सिर्फ अब तक सिर्फ 55 किमी में ही काम हो पाया है। 13-13 किलोमीटर लंबाई में तैयार किए गए अलफक्स बांध भी बाढ़ की वजह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।

कोट
परियोजना के शुरुआती दौर में लापरवाही के कारण विलंब जरूर हुआ। केंद्रीय जल आयोग के पास रिवाइज एस्टीमेट के साथ प्रस्ताव भेजा गया है। अभी परीक्षण जारी है। वहां से सकारात्मक परिणाम नहीं मिले तो इसे प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में शामिल कराने की तैयारी है। - दिलीप चतुर्वेदी, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग बाढ़ खंड
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