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जनसूचना अधिकारी तय समय में आरटीआई की सूचना दें
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Thu, 22 Dec 2016 01:59 AM IST
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Public Information Officer RTI acknowledge schedule
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश सूचना का अधिकार नियमावली 2005 के प्रशिक्षण में दूसरे दिन बदायूं के जनसूचना और अपीलीय अधिकारियों को आरटीआई का प्रशिक्षण दिया गया। राज्य सूचना आयुक्त विजय शंकर शर्मा ने विकास भवन सभागार में सूचना का अधिकार कानून की बारीकियां और लंबित मामलों को शीघ्र निपटाने के तरीके बताए।
विकास भवन सभागार में चल रहे प्रशिक्षण शिविर में बुधवार को राज्य सूचना आयुक्त विजय शंकर शर्मा ने कहा कि सूचना प्राप्त करना जनता का अधिकार है। जनसूचना अधिकारी समस्त देय सूचनाओं को तय समय सीमा में आवेदक को उपलब्ध करा दें। इससे कतराने की कोशिश न करें। अन्यथा उन पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि आरटीआई को लागू हुए 11 साल हो चुके हैं। 2015 में उत्तर प्रदेश सूचना नियमावली आने के बाद आरटीआई शिकायतों और अपीलों का बड़ी संख्या में निस्तारण हो रहा है। उन्होंने कहा कि आवेदक को सूचना देने का काम जन सूचना अधिकारी का है। इसलिए उनको सूचना नियमावली अपने पास रखना अनिवार्य है। सूचना नियमावली में सूचना कैसे देनी है। आवेदक से कैसे फीस वसूली जाएगी। कैसे रिकार्ड रखा जाएगा। कौन सी सूचना देय नहीं है। इस बारे में समय-समय पर जारी शासनादेश और सुप्रीम कोर्ट के नियमों की जानकारी भी दी गई है। जनसूचना अधिकारी के पास जब सूचना नियमावली होगी तो आरटीआई के अधिकांश आवेदनों का निस्तारण प्रथम अपीलीय अधिकारी स्तर से ही हो सकेगा। कमिश्नर प्रमांशु ने बदायूं के जनसूचना और प्रथम अपीलीय अधिकारियों को सूचना नियमावली वितरित की और कहा कि वह प्रशिक्षण में आरटीआई संबंधी नियमों को पूरी लगन से सीखें। स्टेट रिसोर्स पर्सन राजेश मेहतानी ने पावर प्ले और उदाहरण के माध्यम से सूचना का अधिकार नियमावली 2015 की बिंदुवार व्याख्या की।
आवेदन निस्तारण के टिप्स बताए
राजेश मेहतानी ने बताया कि सूचना का अधिकारी संविधान के मूल अधिकार में ही आता है। आरटीआई में देय शुल्क आनलाइन जमा किया जा सकता है। जनसूचना अधिकारी अपने दफ्तरों में आवेदन पत्र रजिस्टर प्रारूप-3 जरूर बनाएं। आयोग कभी भी इस रजिस्टर को मंगा सकता है। काल्पनिक प्रश्नों की सूचना देना आरटीआई में नहीं है। आवेदन में 500 से अधिक शब्द नहीं हों। सूचना नहीं देना आरटीआई अधिनियम आठ, नौ और 24 के अलावा नियमावली के भाग 4(2) में प्रावधान है। सूचना नहीं देने के कारणों का आवेदनों में स्पष्ट उल्लेख किया जाए। राजेश मेहतानी ने बताया कि आरटीआई में आवेदन किसी भी हाल में लंबित न रखे जाएं। कापी राइट यदि सरकार में निहित है तो सूचना देय है लेकिन कापी राइट प्राइवेट है तो सूचना देय नहीं है। डीएम बदायूं पवन कुमार ने आरटीआई प्रशिक्षण देने के लिए राज्य सूचना आयोग का आभार जताया।
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विकास भवन सभागार में चल रहे प्रशिक्षण शिविर में बुधवार को राज्य सूचना आयुक्त विजय शंकर शर्मा ने कहा कि सूचना प्राप्त करना जनता का अधिकार है। जनसूचना अधिकारी समस्त देय सूचनाओं को तय समय सीमा में आवेदक को उपलब्ध करा दें। इससे कतराने की कोशिश न करें। अन्यथा उन पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि आरटीआई को लागू हुए 11 साल हो चुके हैं। 2015 में उत्तर प्रदेश सूचना नियमावली आने के बाद आरटीआई शिकायतों और अपीलों का बड़ी संख्या में निस्तारण हो रहा है। उन्होंने कहा कि आवेदक को सूचना देने का काम जन सूचना अधिकारी का है। इसलिए उनको सूचना नियमावली अपने पास रखना अनिवार्य है। सूचना नियमावली में सूचना कैसे देनी है। आवेदक से कैसे फीस वसूली जाएगी। कैसे रिकार्ड रखा जाएगा। कौन सी सूचना देय नहीं है। इस बारे में समय-समय पर जारी शासनादेश और सुप्रीम कोर्ट के नियमों की जानकारी भी दी गई है। जनसूचना अधिकारी के पास जब सूचना नियमावली होगी तो आरटीआई के अधिकांश आवेदनों का निस्तारण प्रथम अपीलीय अधिकारी स्तर से ही हो सकेगा। कमिश्नर प्रमांशु ने बदायूं के जनसूचना और प्रथम अपीलीय अधिकारियों को सूचना नियमावली वितरित की और कहा कि वह प्रशिक्षण में आरटीआई संबंधी नियमों को पूरी लगन से सीखें। स्टेट रिसोर्स पर्सन राजेश मेहतानी ने पावर प्ले और उदाहरण के माध्यम से सूचना का अधिकार नियमावली 2015 की बिंदुवार व्याख्या की।
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आवेदन निस्तारण के टिप्स बताए
राजेश मेहतानी ने बताया कि सूचना का अधिकारी संविधान के मूल अधिकार में ही आता है। आरटीआई में देय शुल्क आनलाइन जमा किया जा सकता है। जनसूचना अधिकारी अपने दफ्तरों में आवेदन पत्र रजिस्टर प्रारूप-3 जरूर बनाएं। आयोग कभी भी इस रजिस्टर को मंगा सकता है। काल्पनिक प्रश्नों की सूचना देना आरटीआई में नहीं है। आवेदन में 500 से अधिक शब्द नहीं हों। सूचना नहीं देना आरटीआई अधिनियम आठ, नौ और 24 के अलावा नियमावली के भाग 4(2) में प्रावधान है। सूचना नहीं देने के कारणों का आवेदनों में स्पष्ट उल्लेख किया जाए। राजेश मेहतानी ने बताया कि आरटीआई में आवेदन किसी भी हाल में लंबित न रखे जाएं। कापी राइट यदि सरकार में निहित है तो सूचना देय है लेकिन कापी राइट प्राइवेट है तो सूचना देय नहीं है। डीएम बदायूं पवन कुमार ने आरटीआई प्रशिक्षण देने के लिए राज्य सूचना आयोग का आभार जताया।
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