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पहले साबित करो.. हमने थप्पड़ मारा या हम पर हुई ज्यादती
बरेली।
Updated Sun, 03 Dec 2017 01:53 AM IST
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भाजपा जिलाध्यक्ष रवींद्र सिंह राठौर ने कहा है कि एसडीएम नवाबगंज राजेश कुमार का उन पर थप्पड़ मारने का आरोप सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है ताकि वह मतगणना में कराई गई धांधली पर कार्रवाई से बच जाएं। राठौर ने एसडीएम को चुनौती दी कि वह साबित करें कि उन्होंने उन्हें थप्पड़ मारा या एसडीएम ने उन पर ज्यादती की। भाजपा जिलाध्यक्ष का कहना है कि वह फोर्स से अनुमति लेकर एसडीएम से कक्ष में बात करने गए थे, लेकिन एसडीएम उन्हें देखकर भागने लगे। उन्होंने उन्हें पकड़कर रोकने की कोशिश की, लेकिन वह फोर्स की आड़ लेकर पिछले गेट से भाग गए। अब अपने बचाव में उन पर थप्पड़ मारने का आरोप लगा रहे हैं। जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि एसडीएम और सीओ ने अच्छी-खासी कीमत लेकर बसपा प्रत्याशी शहला ताहिर को चुनाव जिताया है। वह इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्रनाथ पांडेय, प्रदेश संगठन मंत्री सुनील बंसल से भी मिलेंगे।
राठौर का कहना है कि नवाबगंज में अतिसंवेदनशील मतदान केंद्रों पर तैनाती के लिए जो फोर्स भेजी गई थी, उसे एसडीएम ने वहां लगाया, जहां भाजपा समर्थक वोट थे। इन केंद्रों पर कभी झगड़ा नहीं हुआ। सीओ गिरीश कुमार ने वार्ड नंबर एक में मतदान के दिन शहला को फायदा पहुंचाने के लिए भाजपा समर्थकों पर लाठीचार्ज कराया। इससे उनके वोटर भाग गए और एक घंटे मतदान रुका रहा, जिसका फायदा शहला को मिला। यही नहीं सीओ ने उन्हें समर्थन देने वाले निर्दलीय प्रत्याशी तुलाराम को बेवजह थप्पड़ मारा। राठौर ने कहा कि इन्हीं एसडीएम और सीओ को मीरगंज से वहां के विधायक ने इस वजह से हटवाया था कि क्योंकि वे सपा के समय से बरेली में हैं और भाजपा शासन में भी सपा-बसपा के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने निकाय चुनाव से पहले ही डीएम को लिखकर दिया था कि दोनों को हटाया जाए लेकिन डीएम ने उनकी नहीं सुनी। आखिरकार दोनों ने बेईमानी से उनके भाई की पत्नी को चुनाव हरवा दिया। भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने दोनों अफसरों की चुनाव आयोग में शिकायत की है। अगले हफ्ते वह सीएम, डिप्टी सीएम, प्रदेश संगठन मंत्री सुनील बंसल के सामने भी अपनी बात रखेंगे। भाजपा सरकार में सपा-बसपा माइंडेड अफसरों को नहीं रहने देंगे।
डीएम-एसएसपी ने मेरा फोन नहीं उठाया, न मंत्रियों की सुनी
भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि मतदान के दिन एसडीएम और सीओ जिस तरह भाजपा को हरवाने में जुटे थे, उसे बताने के लिए वह डीएम-एसएसपी को बार-बार फोन करते रहे लेकिन दोनों ने ही उनका फोन नहीं उठाया। एसडीएम ने मतदान के दिन जो नुकसान किया, इसकी जानकारी उन्होंने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, प्रभारी मंत्री बृजेश पाठक, सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह को दी है। पार्टी के मंत्रियों ने पहले ही कहा था कि चुनाव निष्पक्ष कराए जाएं लेकिन प्रशासन ने उनकी भी नहीं सुनी। सांसद धर्मेंद्र कश्यप, विधायक बहोरनलाल मौर्य, डीसी वर्मा और छत्रपाल सिंह रिकाउंटिंग के लिए चुनाव प्रेेक्षक से मिले तो एसडीएम ने रिकाउंटिंग में सिर्फ 60 वोट निरस्त किए जबकि तीन सौ वोट निरस्त होने चाहिए थे। भाजपा जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि एसडीएम ने शहला के लिए एक-एक वोट की लड़ाई लड़ी। उन्होंने कहा कि डीएम आर विक्रम सिंह को जवाब देना चाहिए कि बार-बार फोन करने के बावजूद उनकी बात क्यों नहीं सुनी गई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि बहेड़ी, फरीदपुर, आंवला में 60 फीसदी भी मतदान बमुश्किल से हो पाया लेकिन नवाबगंज में 71 प्रतिशत पोलिंग कैसे हो गई।
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सपा शासन की भी याद दिलाई
राठौर ने कहा कि 2012 के नगरपालिका चुनाव में वह पौने तीन सौ वोटों से चुनाव जीत रहे थे लेकिन सपा शासन का फायदा उठाकर शहला ने काउंटिंग रुकवा दी थी। 24 घंटे बाद दोबारा काउंटिंग शुरू हुई तो अफसरों ने शहला को चुनाव जितवा दिया था। अब हाल यह है कि उनकी अपनी सरकार में उनकी नहीं सुनी जा रही। सबके सामने अन्याय हो रहा है। वह सही बात कहते हैं, इसकी जो भी सजा मिलेगी, वह उन्हें मंजूर है। जिन्होंने उनके साथ अन्याय किया है, सरकार भले ही उनको दंड दे या ना दे लेकिन ईश्वर उनको दंड जरूर देगा।
राठौर का कहना है कि नवाबगंज में अतिसंवेदनशील मतदान केंद्रों पर तैनाती के लिए जो फोर्स भेजी गई थी, उसे एसडीएम ने वहां लगाया, जहां भाजपा समर्थक वोट थे। इन केंद्रों पर कभी झगड़ा नहीं हुआ। सीओ गिरीश कुमार ने वार्ड नंबर एक में मतदान के दिन शहला को फायदा पहुंचाने के लिए भाजपा समर्थकों पर लाठीचार्ज कराया। इससे उनके वोटर भाग गए और एक घंटे मतदान रुका रहा, जिसका फायदा शहला को मिला। यही नहीं सीओ ने उन्हें समर्थन देने वाले निर्दलीय प्रत्याशी तुलाराम को बेवजह थप्पड़ मारा। राठौर ने कहा कि इन्हीं एसडीएम और सीओ को मीरगंज से वहां के विधायक ने इस वजह से हटवाया था कि क्योंकि वे सपा के समय से बरेली में हैं और भाजपा शासन में भी सपा-बसपा के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने निकाय चुनाव से पहले ही डीएम को लिखकर दिया था कि दोनों को हटाया जाए लेकिन डीएम ने उनकी नहीं सुनी। आखिरकार दोनों ने बेईमानी से उनके भाई की पत्नी को चुनाव हरवा दिया। भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने दोनों अफसरों की चुनाव आयोग में शिकायत की है। अगले हफ्ते वह सीएम, डिप्टी सीएम, प्रदेश संगठन मंत्री सुनील बंसल के सामने भी अपनी बात रखेंगे। भाजपा सरकार में सपा-बसपा माइंडेड अफसरों को नहीं रहने देंगे।
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डीएम-एसएसपी ने मेरा फोन नहीं उठाया, न मंत्रियों की सुनी
भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि मतदान के दिन एसडीएम और सीओ जिस तरह भाजपा को हरवाने में जुटे थे, उसे बताने के लिए वह डीएम-एसएसपी को बार-बार फोन करते रहे लेकिन दोनों ने ही उनका फोन नहीं उठाया। एसडीएम ने मतदान के दिन जो नुकसान किया, इसकी जानकारी उन्होंने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, प्रभारी मंत्री बृजेश पाठक, सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह को दी है। पार्टी के मंत्रियों ने पहले ही कहा था कि चुनाव निष्पक्ष कराए जाएं लेकिन प्रशासन ने उनकी भी नहीं सुनी। सांसद धर्मेंद्र कश्यप, विधायक बहोरनलाल मौर्य, डीसी वर्मा और छत्रपाल सिंह रिकाउंटिंग के लिए चुनाव प्रेेक्षक से मिले तो एसडीएम ने रिकाउंटिंग में सिर्फ 60 वोट निरस्त किए जबकि तीन सौ वोट निरस्त होने चाहिए थे। भाजपा जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि एसडीएम ने शहला के लिए एक-एक वोट की लड़ाई लड़ी। उन्होंने कहा कि डीएम आर विक्रम सिंह को जवाब देना चाहिए कि बार-बार फोन करने के बावजूद उनकी बात क्यों नहीं सुनी गई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि बहेड़ी, फरीदपुर, आंवला में 60 फीसदी भी मतदान बमुश्किल से हो पाया लेकिन नवाबगंज में 71 प्रतिशत पोलिंग कैसे हो गई।
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सपा शासन की भी याद दिलाई
राठौर ने कहा कि 2012 के नगरपालिका चुनाव में वह पौने तीन सौ वोटों से चुनाव जीत रहे थे लेकिन सपा शासन का फायदा उठाकर शहला ने काउंटिंग रुकवा दी थी। 24 घंटे बाद दोबारा काउंटिंग शुरू हुई तो अफसरों ने शहला को चुनाव जितवा दिया था। अब हाल यह है कि उनकी अपनी सरकार में उनकी नहीं सुनी जा रही। सबके सामने अन्याय हो रहा है। वह सही बात कहते हैं, इसकी जो भी सजा मिलेगी, वह उन्हें मंजूर है। जिन्होंने उनके साथ अन्याय किया है, सरकार भले ही उनको दंड दे या ना दे लेकिन ईश्वर उनको दंड जरूर देगा।