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परेशानी : निगेटिव ग्रुप का खून चाहिए तो रक्तदाता साथ लाइए
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बरेली। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में ए, ओ, एबी निगेटिव ग्रुप का खून उपलब्ध नहीं। निगेटिव में सिर्फ बी ग्रुप की चार यूनिट शेष हैं। किसी मरीज को निगेटिव ग्रुप की जरूरत है तो परिजनों को संबंधित ग्रुप का रक्तदाता साथ लेकर जाना होगा। अन्यथा रक्त की कमी जान पर भारी पड़ सकती है।
जिला अस्पताल ब्लड बैंक की रिपोर्ट पर गौर करें तो चार माह में 239 यूनिट रक्त गंभीर मरीजों और घायलाें को चढ़ाया गया। इनके परिजन किन्हीं वजहों से रक्तदान नहीं कर सके या परिजन से संपर्क नहीं हो सका। इन्हीं चार माह में महज 56 लोग स्वैच्छिक रक्तदान के लिए अस्पताल पहुंचे। अब सर्दी का मौसम शुरू होने से दिसंबर में अब तक एक भी रक्तदाता ब्लड बैंक नहीं पहुंचा। इस वजह से ब्लड बैंक में रक्त की कमी हो गई है। निगेटिव ग्रुप का खून खत्म हो चुका है, और पॉजिटिव ग्रुप का 95 यूनिट खून ब्लड बैंक में उपलब्ध है।
स्वयंसेवी संस्थाओं, स्वैच्छिक रक्तदाता से कर रहे संपर्क
निगेटिव ब्लड ग्रुप का खून खत्म होने पर अब मरीजों और घायलों की जान बचाने के लिए ब्लड बैंक के जनसंपर्क अधिकारी ने 50 महादानियों की सूची तैयार की है। जरूरत पर उन्हें कॉल कर स्वैच्छिक रक्तदान का अनुरोध किया जा रहा है। रक्तदाता को रक्तदान किए तीन से चार माह बीत गए हैं तो वे रक्तदान के लिए पहुंच रहे हैं। दिसंबर में चार रक्तदाताओं ने दूसरों की जान बचाई है।
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रक्तदान से सुधरती है सेहत, होती है निशुल्क जांचें
जनसंपर्क अधिकारी मनोज के मुताबिक एक यूनिट रक्तदान से तीन लोगों की जान बचती है। साथ ही, रक्तदाता को भी कई लाभ होते हैं। कोई भी स्वस्थ व्यक्ति प्रत्येक तीन माह बाद रक्तदान कर सकता है। रक्तदान से पूर्व व्यक्ति की सेहत संबंधी और रक्तदान के बाद रक्त संक्रमण संबंधी कई निशुल्क जांचें होती हैं। समय से बीमारियों का पता चलने पर उनका इलाज करा सकते हैं।
किस ग्रुप के कितने यूनिट उपलब्ध
ब्लड ग्रुप उपलब्धता
ए निगेटिव 04
बी निगेटिव 00
ओ निगेटिव 00
एबी निगेटिव 00
ए पॉजिटिव 11
बी पॉजिटिव 24
ओ पॉजिटिव 37
एबी पॉजिटिव 23
नोट : आंकड़े जिला अस्पताल ब्लड बैंक से प्राप्त।
अमर उजाला ब्यूरो
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जिला अस्पताल ब्लड बैंक की रिपोर्ट पर गौर करें तो चार माह में 239 यूनिट रक्त गंभीर मरीजों और घायलाें को चढ़ाया गया। इनके परिजन किन्हीं वजहों से रक्तदान नहीं कर सके या परिजन से संपर्क नहीं हो सका। इन्हीं चार माह में महज 56 लोग स्वैच्छिक रक्तदान के लिए अस्पताल पहुंचे। अब सर्दी का मौसम शुरू होने से दिसंबर में अब तक एक भी रक्तदाता ब्लड बैंक नहीं पहुंचा। इस वजह से ब्लड बैंक में रक्त की कमी हो गई है। निगेटिव ग्रुप का खून खत्म हो चुका है, और पॉजिटिव ग्रुप का 95 यूनिट खून ब्लड बैंक में उपलब्ध है।
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स्वयंसेवी संस्थाओं, स्वैच्छिक रक्तदाता से कर रहे संपर्क
निगेटिव ब्लड ग्रुप का खून खत्म होने पर अब मरीजों और घायलों की जान बचाने के लिए ब्लड बैंक के जनसंपर्क अधिकारी ने 50 महादानियों की सूची तैयार की है। जरूरत पर उन्हें कॉल कर स्वैच्छिक रक्तदान का अनुरोध किया जा रहा है। रक्तदाता को रक्तदान किए तीन से चार माह बीत गए हैं तो वे रक्तदान के लिए पहुंच रहे हैं। दिसंबर में चार रक्तदाताओं ने दूसरों की जान बचाई है।
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रक्तदान से सुधरती है सेहत, होती है निशुल्क जांचें
जनसंपर्क अधिकारी मनोज के मुताबिक एक यूनिट रक्तदान से तीन लोगों की जान बचती है। साथ ही, रक्तदाता को भी कई लाभ होते हैं। कोई भी स्वस्थ व्यक्ति प्रत्येक तीन माह बाद रक्तदान कर सकता है। रक्तदान से पूर्व व्यक्ति की सेहत संबंधी और रक्तदान के बाद रक्त संक्रमण संबंधी कई निशुल्क जांचें होती हैं। समय से बीमारियों का पता चलने पर उनका इलाज करा सकते हैं।
किस ग्रुप के कितने यूनिट उपलब्ध
ब्लड ग्रुप उपलब्धता
ए निगेटिव 04
बी निगेटिव 00
ओ निगेटिव 00
एबी निगेटिव 00
ए पॉजिटिव 11
बी पॉजिटिव 24
ओ पॉजिटिव 37
एबी पॉजिटिव 23
नोट : आंकड़े जिला अस्पताल ब्लड बैंक से प्राप्त।
अमर उजाला ब्यूरो