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Mission Admission: बरेली के निजी स्कूलों ने बढ़ा दी फीस, पंजीकरण फॉर्म के नाम पर अभिभावकों से वसूली

Sat, 04 Apr 2026 11:18 AM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: Mukesh Kumar Updated Sat, 04 Apr 2026 11:18 AM IST
सार

बरेली के निजी स्कूलों ने मनमाने ढंग से फीस बढ़ा दी है, जिससे अभिभावकों की जेब पर बोझ बढ़ गया है। एडमिशन फीस के नाम पर 25 हजार से 90 हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं। 

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Private Schools Hike Fees in Bareilly
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

विस्तार

बरेली जिले के प्रमुख निजी स्कूलों ने अपनी फीस बढ़ा दी है। विकास शुल्क, प्रॉस्पेक्टस और पंजीकरण फॉर्म के नाम पर भी हजारों रुपये की वसूली की जा रही है। नियमानुसार, कोई भी स्कूल सालभर में 10 फीसदी से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकता, लेकिन खुलेआम इसकी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इससे मध्यमवर्गीय परिवार परेशान हैं।

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निजी स्कूल की दहलीज पर कदम रखते ही अभिभावकों से वसूली का दौर शुरू हो जाता है। प्रॉस्पेक्टस और रजिस्ट्रेशन फॉर्म के नाम पर 2,500 से 4,000 रुपये लिए जा रहे हैं। इसके बावजूद प्रवेश को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है।प्रवेश मिल गया तो एडमिशन फीस के नाम पर 25 हजार से 90 हजार रुपये तक देने पड़ रहे हैं। परसाखेड़ा निवासी शुभम निजी कंपनी में सुपरवाइजर हैं। उन्होंने बताया कि वह सीबीगंज इलाके के एक स्कूल में अपने बेटे का एनसी कक्षा में एडमिशन कराने  गए थे। वहां उन्हें प्रवेश फार्म के लिए एक हजार रुपये देने पड़े। इसके बाद परीक्षा कराई गई। उसमें पास होने पर एडमिशन के लिए 20 हजार रुपये जमा कराए गए। स्कूल वालों ने दो सप्ताह में स्कूल फीस जमा करने के लिए कहा है।
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मासिक शुल्क में 11, प्रवेश शुल्क में 16 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि
पीलीभीत रोड निवासी दिवाकर ने बताया कि उन्होंने पिछले साल अपने बेटे का एडमिशन महानगर कॉलोनी स्थित एक स्कूल में कक्षा एक में कराया था। उस समय तीन माह की फीस 19,500 रुपये थी। वहीं इस साल जब अपनी बेटी का एडमिशन उसी स्कूल में उसी कक्षा में कराया तो 21,650 रुपये फीस देनी पड़ी। पिछले साल एडमिशन फीस 30 हजार रुपये थी, जिसे अब बढ़ाकर 35 हजार रुपये कर दिया गया है। यानी मासिक शुल्क में 11 तो एडमिशन शुल्क में 16 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि की गई है।

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विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे निजी स्कूल 
फीस का यह बोझ केवल आर्थिक नहीं, बल्कि मानसिक भी है। समय पर फीस जमा न होने पर बच्चों को प्रताड़ित करना अब आम बात हो गई है। इससे बच्चों के मन में अपने ही अभिभावकों के प्रति हीन भावना पैदा होने लगती है। सबसे खौफनाक पहलू तो यह है कि स्कूल अब बच्चों के दस्तावेज और बोर्ड परीक्षा के एडमिट कार्ड तक रोकने लगे हैं। हाल ही में शहर के एक स्कूल ने 12वीं के तीन छात्रों का भविष्य सिर्फ इसलिए दांव पर लगा दिया, क्योंकि उनकी फीस बकाया थी। शिक्षा विभाग कार्रवाई का दावा तो करता है, लेकिन रसूखदार स्कूल संचालकों पर इसका कोई असर नहीं दिखता।

हर साल फीस बढ़ाना अनिवार्य नहीं
अभिभावक संघ के अध्यक्ष अंकुर किशोर सक्सेना ने बताया कि स्कूलों की फीस हर वर्ष बढ़ाना कोई अनिवार्य नियम नहीं है। फीस वृद्धि से पहले यह जांच होना आवश्यक है कि वास्तव में बढ़ोतरी की जरूरत है या नहीं। इसी उद्देश्य से जिला शुल्क समिति का गठन किया गया है, लेकिन दुर्भाग्यवश उसके सचिव (डीआईओएस) की ओर से नियमित बैठकें नहीं बुलाई जातीं। इस विषय पर जिलाधिकारी का भी अपेक्षित ध्यान अभी तक नहीं गया है। यदि फीस बढ़ाना आवश्यक नहीं है तो स्कूलों को अनावश्यक रूप से इसकी अनुमति नहीं देनी चाहिए। 

जेडी राकेश कुमार ने बताया कि ऐसे मामलों के लिए जिलाधिकारी की ओर से समिति बनाई गई है। आने वाली शिकायतों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। अब तक हमारे पास किसी अभिभावक की शिकायत नहीं आई है।

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