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Bareilly News: ऐवान-ए-फरहत के लिए कंपाउंडिंग आवेदन दाखिल करने की तैयारी
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बरेली। इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद सूफी टोला स्थित ऐवान-ए-फरहत मैरिज हॉल के संचालक सपा नेता सरफराज वली खान अब बीडीए में कंपाउंडिंग आवेदन दाखिल करने की तैयारी में हैं। पिछले दिनों उनके हाॅल पर बीडीए ने बुलडोजर चलाया था, जिसका मलबा आज भी वहीं पड़ा है।
सरफराज वली खान पर नक्शा स्वीकृत कराए बिना आवासीय भवन के भूतल पर मैरिज हॉल संचालित करने के आरोप में बीडीए ने दो दिसंबर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू थी। उनके पड़ाेसी राशिद खां के भी बरातघर को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू की गई थी। तीसरे दिन की कार्रवाई शुरू होने से पहले ही सरफराज वली खान की पत्नी फरहत जहां की गुहार पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बीडीए के बुलडोजर लौट गए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने फरहत जहां को उच्च न्यायालय की संबंधित पीठ के समक्ष प्रकरण को रखने के लिए कहा। इसके बाद फरहत जहां ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। बृहस्पतिवार को उन्हें दो सप्ताह में बीडीए में कंपाउंडिंग आवेदन दाखिल करने का मौका मिला। फरहत जहां के बेटे सैफ वली खान ने बताया कि उनके जिस घर और बैंक्वेट हॉल को बीडीए ने ध्वस्त किया है, उसे उनके पिता सरफराज ने 1991 में खरीदा था। पहले यह भवन तिलक राज अरोड़ा का हुआ करता था। हाईकोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने के लिए आदेश दिया है, इसलिए मलबा भी नहीं हटवाया है। अब हम बीडीए में नए सिरे से कंपाउंडिंग आवेदन दाखिल करेंगे। पहले भी 2018 में कंपाउंडिंग आवेदन दाखिल किया था तो बीडीए ने दो लाख रुपये जमा कराए थे। उसकी रसीद भी उनके पास है। उसे बीडीए के अधिकारी स्वीकार भी कर रहे हैं। कागज एकत्र कर फाइल तैयार कर बीडीए में आवेदन किया जाएगा।
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12 दिन बाद शुक्रवार को घर लौटा परिवार
सैफ वली खान ने बताया कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू करने से पहले बीडीए ने इतना मौका नहीं दिया था कि वह अपने घर के सामान सुरक्षित कर लें। किसी तरह से परिवार को बाहर निकाला और बहेड़ी स्थित ससुराल भेज दिया था। छोटा भाई शोएब अपना परिवार लेकर अपनी ससुराल चला गया था। मां फरहत जहां पुराने शहर में स्थित मायके चली गई थीं। 12 दिन बाद परिवार को वापस घर लाएं हैं। बच्चों की परीक्षाएं छूट गई हैं।
वर्जन
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नियमानुसार ही शुरू की गई थी। चार फुट चौड़ी सड़क के किनारे मैरिज लॉन के संचालन की अनुमति नहीं दी जा सकती है। मैरिज लॉन संचालकों के आवेदन पत्र को देख कर प्राधिकरण के प्रावधानों के तहत ही अब आगे की कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. मनिकंडन ए., उपाध्यक्ष, बीडीए
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सरफराज वली खान पर नक्शा स्वीकृत कराए बिना आवासीय भवन के भूतल पर मैरिज हॉल संचालित करने के आरोप में बीडीए ने दो दिसंबर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू थी। उनके पड़ाेसी राशिद खां के भी बरातघर को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू की गई थी। तीसरे दिन की कार्रवाई शुरू होने से पहले ही सरफराज वली खान की पत्नी फरहत जहां की गुहार पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बीडीए के बुलडोजर लौट गए थे।
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सुप्रीम कोर्ट ने फरहत जहां को उच्च न्यायालय की संबंधित पीठ के समक्ष प्रकरण को रखने के लिए कहा। इसके बाद फरहत जहां ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। बृहस्पतिवार को उन्हें दो सप्ताह में बीडीए में कंपाउंडिंग आवेदन दाखिल करने का मौका मिला। फरहत जहां के बेटे सैफ वली खान ने बताया कि उनके जिस घर और बैंक्वेट हॉल को बीडीए ने ध्वस्त किया है, उसे उनके पिता सरफराज ने 1991 में खरीदा था। पहले यह भवन तिलक राज अरोड़ा का हुआ करता था। हाईकोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने के लिए आदेश दिया है, इसलिए मलबा भी नहीं हटवाया है। अब हम बीडीए में नए सिरे से कंपाउंडिंग आवेदन दाखिल करेंगे। पहले भी 2018 में कंपाउंडिंग आवेदन दाखिल किया था तो बीडीए ने दो लाख रुपये जमा कराए थे। उसकी रसीद भी उनके पास है। उसे बीडीए के अधिकारी स्वीकार भी कर रहे हैं। कागज एकत्र कर फाइल तैयार कर बीडीए में आवेदन किया जाएगा।
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12 दिन बाद शुक्रवार को घर लौटा परिवार
सैफ वली खान ने बताया कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू करने से पहले बीडीए ने इतना मौका नहीं दिया था कि वह अपने घर के सामान सुरक्षित कर लें। किसी तरह से परिवार को बाहर निकाला और बहेड़ी स्थित ससुराल भेज दिया था। छोटा भाई शोएब अपना परिवार लेकर अपनी ससुराल चला गया था। मां फरहत जहां पुराने शहर में स्थित मायके चली गई थीं। 12 दिन बाद परिवार को वापस घर लाएं हैं। बच्चों की परीक्षाएं छूट गई हैं।
वर्जन
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नियमानुसार ही शुरू की गई थी। चार फुट चौड़ी सड़क के किनारे मैरिज लॉन के संचालन की अनुमति नहीं दी जा सकती है। मैरिज लॉन संचालकों के आवेदन पत्र को देख कर प्राधिकरण के प्रावधानों के तहत ही अब आगे की कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. मनिकंडन ए., उपाध्यक्ष, बीडीए