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‘आत्मनिर्भर बनकर दूसरों का भी मार्ग प्रशस्त करें महिलाएं’
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कार्यशाला को संबोधित करते वक्ता।
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बैंबू लेडी ऑफ इंडिया नीरा सरमाह ने संवेदीकरण कार्यशाला में महिलाओं को किया प्रोत्साहित
बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) में सोमवार को ‘जेंडर एडवांसमेंट फॉर ट्रांसफार्मिंग इंस्टीट्यूशन (गति)’ विषय पर संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित हुई। इसमें बैंबू लेडी ऑफ इंडिया कही जाने वाली और वूमेन एक्सीलेंस सम्मान से नवाजी गईं असम की नीरा सरमाह ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनकर असहाय महिलाओं का मददगार बनने का सुझाव दिया।
नीरा ने बताया कि गति भारत सरकार के विज्ञान एवं तकनीकी विज्ञान विभाग की एक बेहद खास परियोजना है। बताया कि उन्होंने आसाम में लोगों को बैंबू व्यवसाय के बारे में प्रेरित कर आजीविका का साधन दिलाया। इसके अलावा गुजरात, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के जिलों और गांव में पहुंचकर पिछड़े, असहाय लोगों की मदद का प्रयास कर रही हैं। ग्रामीणों को कच्चे सामान को प्रयोग में लाने और उससे रोजगार सृजन करने की तरकीब बताई।
महिला सशक्तीक पर उन्होंने कहा कि लैंगिक समानता को समाज और शैक्षणिक संस्थाओं के लिए बेहद जरूरी है। कार्यक्रम अध्यक्ष और आईवीआरआई के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने बताया कि आईवीआरआई परिवार (क्षेत्रीय परिसरों को मिलाकर) में एक हजार से अधिक महिला सदस्य हैं। 23 महिला वैज्ञानिक, 17 प्रशासनिक महिला अधिकारी, 17 महिला तकनीकी अधिकारी और 35 कुशल सहायक कर्मचारी समेत 92 महिला कर्मी हैं। उन्होंने गति के कार्यक्रमों का प्रचार-प्रसार करने की जरूरत बताई।
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परियोजना संचालन में आईवीआरआई अव्वल
गति परियोजना के प्रधान अन्वेषक एवं प्रसार शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. महेश चन्द्र ने बताया कि लैंगिक असमानता दूर करने के लिए महिलाओं को पुरुषों के ही समान हर क्षेत्र में अवसर देना होगा। बताया कि गति परियोजना के लिए 190 आवेदन से आईवीआरआई समेत 30 संस्थानों को चुना गया था। आईवीआरआई ने सबसे पहले अपने पेपर जमा किए और पहली कार्यशाला भी आयोजित की है। कार्यक्रम में ऑफलाइन, ऑनलाइन करीब 250 शिक्षक, छात्र, कर्मचारी मौजूद रहे। केंद्रीय विद्यालय के 50 विद्यार्थी और शिक्षकों शामिल हुए।
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बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) में सोमवार को ‘जेंडर एडवांसमेंट फॉर ट्रांसफार्मिंग इंस्टीट्यूशन (गति)’ विषय पर संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित हुई। इसमें बैंबू लेडी ऑफ इंडिया कही जाने वाली और वूमेन एक्सीलेंस सम्मान से नवाजी गईं असम की नीरा सरमाह ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनकर असहाय महिलाओं का मददगार बनने का सुझाव दिया।
नीरा ने बताया कि गति भारत सरकार के विज्ञान एवं तकनीकी विज्ञान विभाग की एक बेहद खास परियोजना है। बताया कि उन्होंने आसाम में लोगों को बैंबू व्यवसाय के बारे में प्रेरित कर आजीविका का साधन दिलाया। इसके अलावा गुजरात, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के जिलों और गांव में पहुंचकर पिछड़े, असहाय लोगों की मदद का प्रयास कर रही हैं। ग्रामीणों को कच्चे सामान को प्रयोग में लाने और उससे रोजगार सृजन करने की तरकीब बताई।
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महिला सशक्तीक पर उन्होंने कहा कि लैंगिक समानता को समाज और शैक्षणिक संस्थाओं के लिए बेहद जरूरी है। कार्यक्रम अध्यक्ष और आईवीआरआई के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने बताया कि आईवीआरआई परिवार (क्षेत्रीय परिसरों को मिलाकर) में एक हजार से अधिक महिला सदस्य हैं। 23 महिला वैज्ञानिक, 17 प्रशासनिक महिला अधिकारी, 17 महिला तकनीकी अधिकारी और 35 कुशल सहायक कर्मचारी समेत 92 महिला कर्मी हैं। उन्होंने गति के कार्यक्रमों का प्रचार-प्रसार करने की जरूरत बताई।
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परियोजना संचालन में आईवीआरआई अव्वल
गति परियोजना के प्रधान अन्वेषक एवं प्रसार शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. महेश चन्द्र ने बताया कि लैंगिक असमानता दूर करने के लिए महिलाओं को पुरुषों के ही समान हर क्षेत्र में अवसर देना होगा। बताया कि गति परियोजना के लिए 190 आवेदन से आईवीआरआई समेत 30 संस्थानों को चुना गया था। आईवीआरआई ने सबसे पहले अपने पेपर जमा किए और पहली कार्यशाला भी आयोजित की है। कार्यक्रम में ऑफलाइन, ऑनलाइन करीब 250 शिक्षक, छात्र, कर्मचारी मौजूद रहे। केंद्रीय विद्यालय के 50 विद्यार्थी और शिक्षकों शामिल हुए।