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बदायूं रोड किनारे जला दी गईं पीपीई किट और मास्क
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पीपीई किट।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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शहर में पहले भी कई जगह फेंका जा चुका है मेडिकल कचरा
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बरेली। बड़ी संख्या में इस्तेमाल की गईं पीपीई किट, मास्क, ग्लब्स को बदायूं रोड किनारे इकट्ठा कर उनमें आग लगा दी गई। करीब एक घंटे से अधिक समय तक ढेर में आग लगी रही। शहर में पहले भी सड़क किनारे मेडिकल कचरा फेंकने और उसे जलाने के कई मामले सामने आ चुके हैं।
सड़कों पर फेंका जाने वाला बायो मेडिकल वेस्ट पर्यावरण के लिए तो गंभीर खतरा है ही, इससे लोगों में भी संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है। शहर में ऐसे कई इलाके हैं, जहां सड़कों पर बायो मेडिकल वेस्ट फेंका जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक यह गलत है और ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का नियम भी हैं। ऐसे कचरे को खुले में सड़क पर यूं ही नहीं फेंका जा सकता। भारत सरकार और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के अनुसार यह लोगों की मौत का सामान है। ऐसे कचरे से बीमारियां फैलने की आशंका बनी रहती है। साथ ही यह पर्यावरण के लिए भी बहुत बड़ा संकट है।
सड़कों पर फेंका जाने वाला बायो मेडिकल वेस्ट पर्यावरण के लिए तो गंभीर खतरा है ही, इससे लोगों में भी संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है। शहर में ऐसे कई इलाके हैं, जहां सड़कों पर बायो मेडिकल वेस्ट फेंका जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक यह गलत है और ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का नियम भी हैं। ऐसे कचरे को खुले में सड़क पर यूं ही नहीं फेंका जा सकता। भारत सरकार और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के अनुसार यह लोगों की मौत का सामान है। ऐसे कचरे से बीमारियां फैलने की आशंका बनी रहती है। साथ ही यह पर्यावरण के लिए भी बहुत बड़ा संकट है।
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‘बदायूं रोड पर काफी जगह में मेडिकल कचरा फेंका गया था। बाद में इसमें आग लगा दी गई। कचरा किसने फेंका इसकी तो जानकारी नहीं है लेकिन ऐसा आए दिन होता है। प्रशासन को इस पर सख्ती बरतनी चाहिए।’ - हरजीत सिंह, सुभाषनगर
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‘शहर में कई डलावघरों के बाहर भी मेडिकल कचरा फेंके जाने के मामले सामने आ चुके हैं। कोरोना काल में यह मामले और अधिक बढ़ गए हैं। सावधानी बरतने की आवश्यकता है। प्रशासन को ऐसे लोगों को चिह्नित कर कार्रवाई करनी चाहिए।’ - मुकेश अग्रवाल, राजेंद्रनगर।