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उफ ये बिजली की अघोषित कटौती ! करवटें बदलते रहे सारी रात..
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पीलीभीत। शासन स्तर से बिजली सप्लाई में सुधार को लेकर भले ही तमाम दावे किए जा रहे हों, लेकिन जर्जर संसाधन और अधिकारियों की लापरवाही के चलते जिले में हालात में कोई बदलाव नहीं हो सका है। दिन भर की ट्रिपिंग के बाद रात को गुल हो रही बिजली से शहरवासियों की नींद भी पूरी नहीं हो पा रही है। इसकी वजह से तमाम तरह की दिक्कत लोगों को झेलनी पड़ रहीं हैं। खासकर बच्चे इससे ज्यादा परेशान हैं। विभागीय अधिकारी सुधार की बड़ी-बड़ी बातें करने के बाद धरातल पर तस्वीर बदलने में कामयाब नहीं हो सके हैं। अघोषित कटौती की मार बरकरार है।
प्रदेश की सत्ता संभालने के बाद सबसे पहले योगी सरकार ने बिजली को लेकर आदेश जारी किए थे। इसमें जिला मुख्यालय को 24 घंटे बिजली सप्लाई देने को कहा गया। इसको पूरा करने का अधिकारी दावा भी करते हैं, लेकिन यह सब सिर्फ कागजों तक सीमित है। शहर का एक बड़ा इलाका बिजली की अघोषित कटौती की मार झेल रहा है। टाउन वन और टू फीडर से जुड़े इलाकों में तो लंबे समय से हालात बदतर बने हुए हैं। दिन भर ट्रिपिंग और लो-वोल्टेज की दिक्कत रहती है। फाल्ट के नाम पर घंटों बिजली काट दी जाती है। दिन भर की कटौती के बाद अब कुछ दिनों से रात के समय भी बिजली नहीं मिल पा रही है। मोहल्ला आसफजान, साहूकारा, डोरीलाल, लाल रोड, मोहतसिम खां, खैरुल्लाशाह समेत कई इलाकों में रात को अघोषित कटौती जारी है। रोज की तरह मंगलवार रात को भी करीब 12 बजे बिजली चली गई। करीब डेढ़ घंटे बाद सप्लाई दी गई। इसके बाद भी बिजली की आंख-मिचौली जारी रही। ये सिलसिला कई दिनों से चल रहा है। शहरवासी गर्मी और मच्छरों के बीच बिजली की कटौती से करवटें बदल-बदल कर रात गुजारने को मजबूर हैं।
नींद पूरी न होने पर ये हो रहीं दिक्कत
बिजली की रात में हो रही कटौती से नींद पूरी नहीं हो पा रही। ऐसे में यह बीमार करने का भी कारण बन रही है। शहर के वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक डॉ.आरबी यादव ने बताया कि नींद पूरी न होने से चिड़चिड़ापन, हार्टअटैक, स्ट्रोक, हाई ब्लड प्रेशर, आंखों और त्वचा के लिए दिक्कत आती है।
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जर्जर संसाधन हैं कटौती की अहम वजह
विभागीय अधिकारी भले ही कुछ कहते रहे लेकिन सच ये है कि जर्जर संसाधनों की वजह से बिजली की अघोषित कटौती जारी है। शहर में लंबे समय से जर्जर तारों को बदलने की प्रक्रिया कागजों में चल रही है। अफसर प्रस्ताव पास होने के इंतजार में हैं, तो जनप्रतिनिधि खुद को संजीदा साबित करने के लिए शासन स्तर तक पैरवी करने का दावा करते हैं। बावजूद इसके कोई सुधार नहीं है। आए दिन मामूली लोड बढ़ते ही जगह-जगह तार टूट जाते हैं।
- 90 लाख यूनिट हर माह शहर में बिजली की खपत
- 21 प्रतिशत लाइन लॉस शहर में
- 6 करोड़ रुपये के बनते हैं बिजली के बिल
- 5.25 करोड़ की विभाग कर पाता है वसूली
- 20 किलोमीटर के बदले जाने हैं तार
- 17 फीडरों से संचालित हो रही शहर की सप्लाई
ट्रिपिंग की दिक्कत टाउन वन और टू इलाके में रहती है। इसका सुधार भी कराया जा रहा है। दरअसल, इस क्षेत्र में लाइन लॉस की वजह से रोस्टरिंग हो रही है। बाकी एकता नगर में तार टूटने की शिकायत अक्सर रहती थी, उस पर काम कराया जा रहा है।
- असीम कुमार, अधिशासी अभियंता
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प्रदेश की सत्ता संभालने के बाद सबसे पहले योगी सरकार ने बिजली को लेकर आदेश जारी किए थे। इसमें जिला मुख्यालय को 24 घंटे बिजली सप्लाई देने को कहा गया। इसको पूरा करने का अधिकारी दावा भी करते हैं, लेकिन यह सब सिर्फ कागजों तक सीमित है। शहर का एक बड़ा इलाका बिजली की अघोषित कटौती की मार झेल रहा है। टाउन वन और टू फीडर से जुड़े इलाकों में तो लंबे समय से हालात बदतर बने हुए हैं। दिन भर ट्रिपिंग और लो-वोल्टेज की दिक्कत रहती है। फाल्ट के नाम पर घंटों बिजली काट दी जाती है। दिन भर की कटौती के बाद अब कुछ दिनों से रात के समय भी बिजली नहीं मिल पा रही है। मोहल्ला आसफजान, साहूकारा, डोरीलाल, लाल रोड, मोहतसिम खां, खैरुल्लाशाह समेत कई इलाकों में रात को अघोषित कटौती जारी है। रोज की तरह मंगलवार रात को भी करीब 12 बजे बिजली चली गई। करीब डेढ़ घंटे बाद सप्लाई दी गई। इसके बाद भी बिजली की आंख-मिचौली जारी रही। ये सिलसिला कई दिनों से चल रहा है। शहरवासी गर्मी और मच्छरों के बीच बिजली की कटौती से करवटें बदल-बदल कर रात गुजारने को मजबूर हैं।
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नींद पूरी न होने पर ये हो रहीं दिक्कत
बिजली की रात में हो रही कटौती से नींद पूरी नहीं हो पा रही। ऐसे में यह बीमार करने का भी कारण बन रही है। शहर के वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक डॉ.आरबी यादव ने बताया कि नींद पूरी न होने से चिड़चिड़ापन, हार्टअटैक, स्ट्रोक, हाई ब्लड प्रेशर, आंखों और त्वचा के लिए दिक्कत आती है।
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जर्जर संसाधन हैं कटौती की अहम वजह
विभागीय अधिकारी भले ही कुछ कहते रहे लेकिन सच ये है कि जर्जर संसाधनों की वजह से बिजली की अघोषित कटौती जारी है। शहर में लंबे समय से जर्जर तारों को बदलने की प्रक्रिया कागजों में चल रही है। अफसर प्रस्ताव पास होने के इंतजार में हैं, तो जनप्रतिनिधि खुद को संजीदा साबित करने के लिए शासन स्तर तक पैरवी करने का दावा करते हैं। बावजूद इसके कोई सुधार नहीं है। आए दिन मामूली लोड बढ़ते ही जगह-जगह तार टूट जाते हैं।
- 90 लाख यूनिट हर माह शहर में बिजली की खपत
- 21 प्रतिशत लाइन लॉस शहर में
- 6 करोड़ रुपये के बनते हैं बिजली के बिल
- 5.25 करोड़ की विभाग कर पाता है वसूली
- 20 किलोमीटर के बदले जाने हैं तार
- 17 फीडरों से संचालित हो रही शहर की सप्लाई
ट्रिपिंग की दिक्कत टाउन वन और टू इलाके में रहती है। इसका सुधार भी कराया जा रहा है। दरअसल, इस क्षेत्र में लाइन लॉस की वजह से रोस्टरिंग हो रही है। बाकी एकता नगर में तार टूटने की शिकायत अक्सर रहती थी, उस पर काम कराया जा रहा है।
- असीम कुमार, अधिशासी अभियंता