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पटेल के बाद आंबेडकर भी भाजपा के देश भर में छह महीने चलेंगे कार्यक्रम
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बरेली। संविधान निर्माता डॉ. बीआर आंबेडकर के नाम पर राजनीति करने वाली बसपा पर भाजपा की सरकार एक और वार करने की तैयारी कर रही है। इस बार देश भर में 70वां संविधान दिवस मनाया जाएगा जिसकी रूपरेखा तैयार कर सरकार ने 26 नवंबर से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने के दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए हैं। जन आंदोलन की तरह ये कार्यक्रम 14 अप्रैल तक पूरे छह महीने चलेंगे।
बसपा शुरू से डॉ. बीआर आंबेडकर के नाम पर राजनीति करती रही है लेकिन केंद्र की सत्ता संभालने के बाद भाजपा आंबेडकर पर उसके एकाधिकार को लगातार चुनौती देती आ रही है। दलितों के मसीहा कहे जाने वाले बाबा साहेब को भाजपा सरकार ने सीमित दायरे से बाहर निकालने की रणनीति बनाई है ताकि उन्हें सर्वसमाज और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ा जा सके। इसके तहत अब 70वां संविधान दिवस मनाने की रूपरेखा बनी है। इसकी शुरूआत देश भर में 26 नवंबर से होगी। हालांकि बसपा भी छह दिसंबर को बाबा साहब का परिनिर्माण दिवस मनाने की तैयारी कर रही है।
सरकार ने आंबेडकर जयंती का नाम भी ‘समरसता दिवस’ दिया है। इसकी जिम्मेदारी भी सरकारी विभाग, सामाजिक, शैक्षिक संगठन, महिला व बाल विकास विभाग आदि को दी गई है। विभिन्न कार्यक्रमों में सामाजिक समरसता, महिला उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, नारी सशक्तिकरण, उज्जवला आदि योजनाओं से संबधित चर्चाएं होंगी। खेलकूद कार्यक्रमों से भी स्कूली बच्चाें और स्टाफ को जागरूक किया जाना है। माना जा रहा है कि इन कार्यक्रमों से सीधे तौर पर बसपा ही प्रभावित होगी।
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बसपा शुरू से डॉ. बीआर आंबेडकर के नाम पर राजनीति करती रही है लेकिन केंद्र की सत्ता संभालने के बाद भाजपा आंबेडकर पर उसके एकाधिकार को लगातार चुनौती देती आ रही है। दलितों के मसीहा कहे जाने वाले बाबा साहेब को भाजपा सरकार ने सीमित दायरे से बाहर निकालने की रणनीति बनाई है ताकि उन्हें सर्वसमाज और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ा जा सके। इसके तहत अब 70वां संविधान दिवस मनाने की रूपरेखा बनी है। इसकी शुरूआत देश भर में 26 नवंबर से होगी। हालांकि बसपा भी छह दिसंबर को बाबा साहब का परिनिर्माण दिवस मनाने की तैयारी कर रही है।
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सरकार ने आंबेडकर जयंती का नाम भी ‘समरसता दिवस’ दिया है। इसकी जिम्मेदारी भी सरकारी विभाग, सामाजिक, शैक्षिक संगठन, महिला व बाल विकास विभाग आदि को दी गई है। विभिन्न कार्यक्रमों में सामाजिक समरसता, महिला उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, नारी सशक्तिकरण, उज्जवला आदि योजनाओं से संबधित चर्चाएं होंगी। खेलकूद कार्यक्रमों से भी स्कूली बच्चाें और स्टाफ को जागरूक किया जाना है। माना जा रहा है कि इन कार्यक्रमों से सीधे तौर पर बसपा ही प्रभावित होगी।
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