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दफ्तर की गंदगी तो देख ली...पेंशनरों का दर्द भी जान लीजिए मंत्री जी
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बरेली। प्रदेश के वित्तमंत्री सुरेश खन्ना ने गुरुवार को ट्रेजरी दफ्तर में छापा मारकर गड़बड़ियां और दफ्तर में गंदगी तो देख ली थी। इस मामले में छह अधिकारी और कर्मचारियों पर कार्रवाई भी की, लेकिन दफ्तर में बाबुओं की कमी और लचर सिस्टम की वजह से हर दिन बुजुर्ग पेंशनर छोटे-मोटे कामों के लिए ट्रेजरी के चक्कर काटते रहते हैं। कर्मचारियों के न मिलने या फिर स्टाफ की कमी और काम में देरी से कांपते-हांफते रिटायर कर्मचारी कई-कई घंटे तक बैंच पर बैठे इंतजार करते रहे हैं, लेकिन उनके दर्द को न अफसर महसूस कर रहे हैं और न ही नेताओं को इसकी कोई फ्रिक है।
ट्रेजरी से करीब 22 हजार पेंशनर जुड़े हैं। इसके अलावा तमाम विभागों के कर्मचारियों का वेतन भी यहीं से जारी होता है, जबकि यहां 24 कर्मचारियों का ही स्टाफ हैं। इसमें भी चार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। कर्मचारी एक के बाद एक रिटायर होते रहे लेकिन बाबुओं की नई तैनाती नहीं हुई। ऐसे में ट्रेजरी में कर्मचारियों की तमाम टेबल खाली हैं। रूम नंबर-16 में बिल पास करने के लिए पांच काउंटर बने हैं लेकिन दो कर्मचारी ही हैं। यही हाल ट्रेजरी के दूसरे कक्षों का भी है। स्टाफ की कमी और काम में लेटलतीफी का खामियाजा आखिरकार वृद्ध पेंशनरों को ही भुगतना पड़ रहा है। रिटायर कर्मियों का कहना है कि गुरुवार को वित्तमंत्री सुरेश खन्ना ने ट्रेजरी में छापा मारा तो उन्हें सफाई में कमी और पेंशन रजिस्टरों में खामी तो दिखाई दी लेकिन कमजोर विभागीय सिस्टम से सालों से पेंशनर्स को जो दिक्कत झेलनी पड़ रही है, मंत्री जी ने उसे नजरअंदाज कर दिया।
लोगों से बातचीत :
तीन माह से इंतजार के बाद भी नहीं बनी पेंशन
आंवला तहसील में तैनात रहे लेखपाल पूरनलाल इसी साल 30 जुलाई को रिटायर हो गए थे, लेकिन उनकी पेंशन पत्रावली अब तक पूरी नहीं हुई है। उनका कहना है कई बार ट्रेजरी आ चुके हैं लेकिन औपचारिकताएं ही पूरी नहीं हो रहीं।
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पति के निधन के बाद पेंशन के लिए चक्कर काट रही वृद्धा
शीशगढ़ की रहने वाली बुजुर्ग सुनीता देवी करीब साढ़े तीन माह से पेंशन बनवाने के लिए ट्रेजरी के चक्कर काट रही हैं। उन्होंने बताया कि उनके पति मुकुट बिहारी लाल प्राइमरी स्कूल में तैनात थे। उनके निधन के बाद उन्हें पेंशन मिलनी है।
एरियर भुगतान के लिए मांग रहे जानकारी
नार्थ सिटी के रहने वाले डॉ. विजय की माताजी के एरियर का भुगतान होना है। उनका कहना है कि वह यहां इसी सिलसिले में आए थे। उनका कहना है कि ट्रेजरी की व्यवस्था और बेहतर होनी चाहिए।
चल-फिर पाने में अक्षम बुजुर्गों को वेरीफिकेशन का झेलना पड़ रहा दर्द
पेंशन पा रहे बेहद बुजुर्ग, जो चल फिर पाने में भी अक्षम हैं, उनको दूर-दराज से किसी तरह आकर ट्रेजरी में हर साल जीवित होने का सत्यापन कराना पड़ता है। कई बार बेहद बीमार बुजुर्गों को ट्रेजरी तक लाने में उनके परिजनों की हिम्मत टूट जाती है। ठिरिया निजावत खां की अत्यंत वृद्ध निसार बेगम भी अपने बेटे के साथ यही वेरीफिकेशन कराने ट्रेजरी पहुंचीं थीं।
मंत्री के निरीक्षण के बाद साफ कराई गई घास
वित्तमंत्री के गुुरुवार को ट्रेजरी में निरीक्षण के बाद अगले दिन यानी शुक्रवार को ट्रेजरी के पास जमा घास की सफाई कराई गई। इसके अलावा टेबल पर धूल और कमरों में लगे जालों को भी हटवाया गया।
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ट्रेजरी से करीब 22 हजार पेंशनर जुड़े हैं। इसके अलावा तमाम विभागों के कर्मचारियों का वेतन भी यहीं से जारी होता है, जबकि यहां 24 कर्मचारियों का ही स्टाफ हैं। इसमें भी चार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। कर्मचारी एक के बाद एक रिटायर होते रहे लेकिन बाबुओं की नई तैनाती नहीं हुई। ऐसे में ट्रेजरी में कर्मचारियों की तमाम टेबल खाली हैं। रूम नंबर-16 में बिल पास करने के लिए पांच काउंटर बने हैं लेकिन दो कर्मचारी ही हैं। यही हाल ट्रेजरी के दूसरे कक्षों का भी है। स्टाफ की कमी और काम में लेटलतीफी का खामियाजा आखिरकार वृद्ध पेंशनरों को ही भुगतना पड़ रहा है। रिटायर कर्मियों का कहना है कि गुरुवार को वित्तमंत्री सुरेश खन्ना ने ट्रेजरी में छापा मारा तो उन्हें सफाई में कमी और पेंशन रजिस्टरों में खामी तो दिखाई दी लेकिन कमजोर विभागीय सिस्टम से सालों से पेंशनर्स को जो दिक्कत झेलनी पड़ रही है, मंत्री जी ने उसे नजरअंदाज कर दिया।
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लोगों से बातचीत :
तीन माह से इंतजार के बाद भी नहीं बनी पेंशन
आंवला तहसील में तैनात रहे लेखपाल पूरनलाल इसी साल 30 जुलाई को रिटायर हो गए थे, लेकिन उनकी पेंशन पत्रावली अब तक पूरी नहीं हुई है। उनका कहना है कई बार ट्रेजरी आ चुके हैं लेकिन औपचारिकताएं ही पूरी नहीं हो रहीं।
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पति के निधन के बाद पेंशन के लिए चक्कर काट रही वृद्धा
शीशगढ़ की रहने वाली बुजुर्ग सुनीता देवी करीब साढ़े तीन माह से पेंशन बनवाने के लिए ट्रेजरी के चक्कर काट रही हैं। उन्होंने बताया कि उनके पति मुकुट बिहारी लाल प्राइमरी स्कूल में तैनात थे। उनके निधन के बाद उन्हें पेंशन मिलनी है।
एरियर भुगतान के लिए मांग रहे जानकारी
नार्थ सिटी के रहने वाले डॉ. विजय की माताजी के एरियर का भुगतान होना है। उनका कहना है कि वह यहां इसी सिलसिले में आए थे। उनका कहना है कि ट्रेजरी की व्यवस्था और बेहतर होनी चाहिए।
चल-फिर पाने में अक्षम बुजुर्गों को वेरीफिकेशन का झेलना पड़ रहा दर्द
पेंशन पा रहे बेहद बुजुर्ग, जो चल फिर पाने में भी अक्षम हैं, उनको दूर-दराज से किसी तरह आकर ट्रेजरी में हर साल जीवित होने का सत्यापन कराना पड़ता है। कई बार बेहद बीमार बुजुर्गों को ट्रेजरी तक लाने में उनके परिजनों की हिम्मत टूट जाती है। ठिरिया निजावत खां की अत्यंत वृद्ध निसार बेगम भी अपने बेटे के साथ यही वेरीफिकेशन कराने ट्रेजरी पहुंचीं थीं।
मंत्री के निरीक्षण के बाद साफ कराई गई घास
वित्तमंत्री के गुुरुवार को ट्रेजरी में निरीक्षण के बाद अगले दिन यानी शुक्रवार को ट्रेजरी के पास जमा घास की सफाई कराई गई। इसके अलावा टेबल पर धूल और कमरों में लगे जालों को भी हटवाया गया।