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जो मंत्री आता है तो ‘नेताजी’ के गढ़ों में जरूर जाता है
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बरेली। डीएम कार्यालय के बगल में ट्रेजरी ऑफिस में वित्तमंत्री सुरेश खन्ना के छापे से हड़कंप सिर्फ कलक्ट्रेट में नहीं बल्कि शहर के राजनीतिक क्षेत्रों में भी मचा। सवाल उठे कि जब भी कोई कद्दावर मंत्री बरेली आता है तो ‘नेताजी’ के किसी न किसी पुराने गढ़ पर अपनी छाप जरूर छोड़ जाता है।
बरेली ट्रेजरी में कथित रूप से फैले भ्रष्टाचार पर कुछ महीनों पहले आंवला सांसद धर्मेंद्र कश्यप और शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार ने तत्कालीन वित्तमंत्री राजेश अग्रवाल से कार्रवाई की मांग की थी। मगर जांच तक नहीं हुई। वित्त मंत्री बनने के बाद पहली बार सुरेश खन्ना बरेली आए तो सीधे मुख्य कोषागार ही पहुंच गए। डीएम और ट्रेजरी अफसरों को तक इसकी भनक नहीं लग पाई। इससे पहले प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा बरेली आए तो कालीबाड़ी की एक गंदी गली में पहुंच गए थे। इससे नगर निगम के अफसरों को कटघरे में खड़ा होना पड़ा था। इस बार वित्तमंत्री ट्रेजरी पहुंचे तो कानाफूसी होने लगी कि कोई मंत्री आता है तो ‘नेताजी’ के गढ़ों में जरूर जाता है।
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बरेली ट्रेजरी में कथित रूप से फैले भ्रष्टाचार पर कुछ महीनों पहले आंवला सांसद धर्मेंद्र कश्यप और शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार ने तत्कालीन वित्तमंत्री राजेश अग्रवाल से कार्रवाई की मांग की थी। मगर जांच तक नहीं हुई। वित्त मंत्री बनने के बाद पहली बार सुरेश खन्ना बरेली आए तो सीधे मुख्य कोषागार ही पहुंच गए। डीएम और ट्रेजरी अफसरों को तक इसकी भनक नहीं लग पाई। इससे पहले प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा बरेली आए तो कालीबाड़ी की एक गंदी गली में पहुंच गए थे। इससे नगर निगम के अफसरों को कटघरे में खड़ा होना पड़ा था। इस बार वित्तमंत्री ट्रेजरी पहुंचे तो कानाफूसी होने लगी कि कोई मंत्री आता है तो ‘नेताजी’ के गढ़ों में जरूर जाता है।
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