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सिंचाई विभाग की परियोजना में शुरू हो गया था सेटिंग का खेल

Fri, 23 Aug 2019 02:03 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 23 Aug 2019 02:03 AM IST
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बरेली। धर्मपाल सिंह के साथ कुछ अप्रिय सा ही इत्तफाक हुआ कि लंबी कोशिशों के बाद बतौर सिंचाई मंत्री वह जब अपने कार्यकाल की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक 22 अरब की बदायूं सिंचाई परियोजना को वित्त समिति की मंजूरी दिलाने में कामयाब हुए तभी उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। इस परियोजना में उनका निर्वाचन क्षेत्र आंवला भी कवर होना था और इसे सिर्फ कैबिनेट की औपचारिक मंजूरी मिलनी बाकी रह गई थी। इस बीच चर्चाएं ये भी उठी थीं कि सिंचाई विभाग के तमाम दूसरे प्रोजेक्ट की तरह अफसरों ने इस परियोजना में भी सेटिंग का खेल शुरू कर दिया है। परियोजना पर जल्द काम शुरू होने की उम्मीद में ठेकों पर निर्णय लेने के लिए इंजीनियरों की खास टीम भी खड़ी की जा चुकी थी। माफिया किस्म के ठेकेदार भी जुगाड़ लगाने में जुट गए थे। इसके लिए शासन तक कुछ अफसरों पर ‘चढ़ावा’ तक पहुंच गया था।
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बदायूं सिंचाई परियोजना को यूं समाजवादी पार्टी के शासन में मंजूरी मिली थी। तब इसका एस्टीमेट 15.78 अरब रुपये का बना था। इसके तहत बरेली से बदायूं के दातागंज तक सिंचाई की दिक्कतों को दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर काम होने थे और परियोजना को 2015 में ही पूरा किया जाना था। परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद ही सूबे में विधानसभा चुनाव के बाद तख्तापलट हो गया। इसके बाद भाजपा सरकार में सिंचाई मंत्री बने धर्मपाल सिंह ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए जोर लगाना शुरू किया। इससे पहले करीब साल भर तक यह परियोजना लटकी रही थी। धर्मपाल सिंह की तगड़ी पैरवी के बाद कुछ समय पहले ही परियोजना के 22 अरब के संशोधित बजट को वित्त समिति की सहमति हासिल हो गई थी। इसके बाद मंत्रिमंडल की औपचारिक अनुमति मिलनी ही बाकी थी।
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सूत्रों के मुताबिक परियोजना पर अगले दो से तीन महीने के अंदर काम शुरू करने की तैयारियां चल रही थी। धर्मपाल सिंह भी इस पर जल्द से जल्द काम शुरू कराना चाहते थे। इसी बीच अरबों के काम झपटने के लिए बड़े ठेकेदारों के बीच सेटिंग का भी खेल शुरू हो गया। ई-टेंडरिंग के बावजूद चहेते ठेकेदारों को काम देने के लिए विभाग में ऊपर से लेकर नीचे तक खास इंजीनियरों की पोस्टिंग कराने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी गई। खेल इस कदर खुलकर चला कि आखिरकार इस सारी कवायद का दाग धर्मपाल सिंह के दामन पर भी लग गया।
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धर्मपाल ने बनवाया था 22 अरब का संशोधित बजट
बदायूं सिंचाई परियोजना के तहत चौबारी में रामगंगा पर बैराज बनाने के साथ नहर और रजवाहों का नेटवर्क बनाने के लिए सिंचाई विभाग को अरबों का मुआवजा देकर 1929 हेक्टेअर भूमि का अधिग्रहण करना था। इसमें 106 हेक्टेअर जमीन बैराज, 261 हेक्टेयर भूमि मुख्य नहर और 563 हेक्टेयर जमीन छोटी नहरों के लिए अधिग्रहीत की जानी थी। पहले चरण में इस प्रोजेक्ट के लिए 6.30 अरब रुपये का बजट मिल चुका था, जिसका इस्तेमाल कर बैराज का निर्माण कराया गया। अधिग्रहण भी केवल 311 हेक्टेयर भूमि का हो सका है। कुछ महीनों

पहले ही बाढ़ खंड के अधिकारियों ने इस परियोजना का करीब 22 अरब का संशोधित बजट बनाकर शासन को भेजा था।

ट्रांसफर की हवा से इंजीनियरों में फैली बेचैनी
सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह के इस्तीफे के बाद विभाग में तैनात इंजीनियरों के ट्रांसफर की भी हवा उड़ी हुुई है। ऐसी आशंका के बीच कुछ अधिकारियों ने शासन में बैठे अपने आकाओं से भी संपर्क साधना शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि बरेली में चीफ इंजीनियर, एसई और एक्सईएन की कुर्सी पर बैठे इंजीनियर तैनाती महज से एक से डेढ़ साल पहले ही है। जबकि तैनाती नियमावली ने आमतौर पर ट्रांसफर तीन साल बाद होना चाहिए। जबकि सिंचाई मंत्री की टीम के इन अफसरों के स्थानांतरण की चर्चा उड़ी है।
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