{"_id":"5d5c60c58ebc3e6c3b49d0bb","slug":"political-bareilly-news-bly3730629111","type":"story","status":"publish","title_hn":"धर्मपाल का भी इस्तीफा: भूमाफिया नहीं गए जेल.. मंत्री जी हो गए फेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धर्मपाल का भी इस्तीफा: भूमाफिया नहीं गए जेल.. मंत्री जी हो गए फेल
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बरेली। सिंचाईं विभाग भी पिछले कुछ सालों में भ्रष्टाचार के लिए सर्वाधिक बदनाम महकमों में शुमार हुआ। विभागीय जमीनों पर कब्जों से लेकर नहरों और बांधोें की सफाई और ट्रांसफर-पोस्टिंग तक हर मामले में भ्रष्टाचार की शिकायतें आम थीं। बरेली में पिछले साल से खाली चीफ इंजीनियर पद के साथ प्रदेश में एक्सईएन करीब 40 रिक्त पदों पर तैनाती ‘सौदा’ न पटने की वजह से न हो पाने की चर्चाएं ऊपर तक पहुंची थीं। पूरे सूबे नहरों की जमीनों पर कब्जों को हटाने का दावा सिंचाईं मंत्री बार-बार करते रहे, लेकिन दो सालों में एक भी भूमाफिया पर कार्रवाई नहीं हो पाई। नाकामियों की यही बाढ़ सिंचाई मंत्री की कुर्सी भी बहा ले गई।
सिंचाईं विभाग में ठेकों का मामला हो या फिर ट्रांसफर और पोस्टिंग का, काफी समय से इन मामलों में सौदेबाजी होने की चर्चा विभाग में आम थी। पीलीभीत बाईपास समेत कई प्रमुख स्थानों पर नहर और सिंचाईं विभाग की जमीनों पर भूमाफिया के कब्जे हैं। विभाग में इस बात की भी चर्चा है कि सिंचाईं मंत्री के नजदीकी ही दो सालों से विभागीय अतिथि गृह पर काबिज हैं। करीब 40 एक्सईएन पदों पर काफी समय से पोस्टिंग न होना और तमाम एक्सईएन को दो-दो चार्ज दिए जाने का मामला भी उच्चस्तर तक चर्चा में है। बरेली में चीफ इंजीनियर के रिक्त पद पर नियमों के खिलाफ उन प्रवीण कुमार का कब्जा है जिनका ट्रांसफर जून में बिजनौर हो चुका है। एक्सईएन सीपी सिंह और सुरेंद्र यादव जैसे अफसरों को लेकर विभाग में ही तमाम सवाल खड़े होते रहे हैं।
कहा बहुत-कुछ, किया कुछ भी नहीं
शहर में 3.329 हेक्टेयर जमीन
पर 17 भूमाफिया का कब्जा
सिंचाई मंत्री बनने के बाद धर्मपाल सिंह ने शहर में नहर की जमीनें कब्जाने वाले कालोनाइजर पर कार्रवाई का खूब ढिंढोरा पीटा था। 23 जून को हुई एंटी भू- माफिया टास्क फोर्स की बैठक में नहर विभाग के अधिकारियों ने खुलासा किया कि शहर में 3.329 हेक्टेयर जमीन पर 17 लोगों का अवैध कब्जा है। इस पर डीएम ने नहर विभाग के अधिकारियों को इन अवैध कब्जेदारों पर रिपोर्ट दर्ज कराने और गुंडा एक्ट की कार्रवाई कराने के निर्देश दिए लेकिन अफसर मामले को दबाकर बैठ गए। यह सारी जमीनें पीलीभीत बाईपास और उसके आसपास बताई जा रही हैं। पिछले दिनों रामपुर में विधायक अब्दुल्ला आजम खां के रिसोर्ट पर सिंचाई विभाग की कार्रवाई के बाद यहां भी कुछ उम्मीदें जागी थीं लेकिन कोई परिणाम सामने नहीं आया।
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सिंचाईं विभाग में ठेकों का मामला हो या फिर ट्रांसफर और पोस्टिंग का, काफी समय से इन मामलों में सौदेबाजी होने की चर्चा विभाग में आम थी। पीलीभीत बाईपास समेत कई प्रमुख स्थानों पर नहर और सिंचाईं विभाग की जमीनों पर भूमाफिया के कब्जे हैं। विभाग में इस बात की भी चर्चा है कि सिंचाईं मंत्री के नजदीकी ही दो सालों से विभागीय अतिथि गृह पर काबिज हैं। करीब 40 एक्सईएन पदों पर काफी समय से पोस्टिंग न होना और तमाम एक्सईएन को दो-दो चार्ज दिए जाने का मामला भी उच्चस्तर तक चर्चा में है। बरेली में चीफ इंजीनियर के रिक्त पद पर नियमों के खिलाफ उन प्रवीण कुमार का कब्जा है जिनका ट्रांसफर जून में बिजनौर हो चुका है। एक्सईएन सीपी सिंह और सुरेंद्र यादव जैसे अफसरों को लेकर विभाग में ही तमाम सवाल खड़े होते रहे हैं।
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कहा बहुत-कुछ, किया कुछ भी नहीं
शहर में 3.329 हेक्टेयर जमीन
पर 17 भूमाफिया का कब्जा
सिंचाई मंत्री बनने के बाद धर्मपाल सिंह ने शहर में नहर की जमीनें कब्जाने वाले कालोनाइजर पर कार्रवाई का खूब ढिंढोरा पीटा था। 23 जून को हुई एंटी भू- माफिया टास्क फोर्स की बैठक में नहर विभाग के अधिकारियों ने खुलासा किया कि शहर में 3.329 हेक्टेयर जमीन पर 17 लोगों का अवैध कब्जा है। इस पर डीएम ने नहर विभाग के अधिकारियों को इन अवैध कब्जेदारों पर रिपोर्ट दर्ज कराने और गुंडा एक्ट की कार्रवाई कराने के निर्देश दिए लेकिन अफसर मामले को दबाकर बैठ गए। यह सारी जमीनें पीलीभीत बाईपास और उसके आसपास बताई जा रही हैं। पिछले दिनों रामपुर में विधायक अब्दुल्ला आजम खां के रिसोर्ट पर सिंचाई विभाग की कार्रवाई के बाद यहां भी कुछ उम्मीदें जागी थीं लेकिन कोई परिणाम सामने नहीं आया।
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