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पुलिस का खेल.. लापरवाही से हुई पर अफसरों को बताया गुडवर्क
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जेल जाता हत्यारोपी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
नवाबगंज में 12 साल की बच्ची की हत्या की उसके पिता ने ही दी थी पुलिस को सूचना
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गुमशुदगी तक दर्ज न करने वाली पुलिस ने इसके बाद रचा हत्या के खुलासे का तानाबाना
बरेली। नवाबगंज में 12 साल की बच्ची के अपहरण और हत्या के मामले में फिर पुलिस का संवेदनहीन चेहरा नुमाया हुआ। बच्ची के घरवालों ने ही उसकी हत्या की सूचना पुलिस को दी थी। थाने के बार-बार चक्कर काटने के बावजूद उसकी गुमशुदगी तक दर्ज न करने वाली पुलिस ने इसके बाद आनन-फानन शव को कब्जे में लेकर हत्या का खुलासा और आरोपी की गिरफ्तारी के गुडवर्क का तानाबाना बुन डाला।
पोस्टमार्टम हाउस पर लड़की के पिता ने बताया कि नौ फरवरी को लड़की के जाने के बाद उन्होंने काफी छानबीन की लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। लड़की के पास जो मोबाइल था, वह भी बंद था। मोबाइल में चूंकि लड़की के पिता के नाम लिया गया सिम पड़ा हुआ था लिहाजा उसका कुछ पता न चलने पर घरवालों ने कस्टमर केयर पर फोन कर पूछा कि नौ फरवरी को उनके नंबर पर आखिरी कॉल किसकी आई थी। कस्टमर केयर से जो नंबर बताया गया, वह पास के ही गांव चमरौआ के विकास गंगवार का था। इसके बाद लड़की के घरवाले विकास के घर पहुंचे जहां पंचायत बैठी लेकिन इसके बावजूद विकास ने कुछ नहीं कबूला। इसके बाद 11 फरवरी को लड़की के परिजन नवाबगंज थाने पहुंचे और इंस्पेक्टर धनंजय सिंह की गैरमौजूदगी में दरोगा कैलाश सिंह को पूरी बात बताई।
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लड़की के पिता ने बताया कि उन्होंने पुलिस को आरोपी विकास का फोन नंबर भी दिया जिस पर सिपाही सत्यप्रकाश ने उससे बात कर थाने आने को कहा। जब वह थाने नहीं आया तो सिपाही विकास के घर भी गया लेकिन इसके बावजूद न उसे पकड़ा गया न रिपोर्ट दर्ज की गई। इसके बाद वे लोग फिर 13 फरवरी को थाने पहुंचे लेकिन पुलिस ने तब भी उनकी नहीं सुनी। लड़की के पिता के मुताबिक वे लोग खुद ही छानबीन करते रहे। विकास की निगरानी भी शुरू कर दी। विकास ने अपनी बहन-बहनोई को पूरी बात बता दी थी। उसके बहनोई मुकेश ने 14 फरवरी को लड़की के पिता को बता दिया कि उनकी बेटी की हत्या कर दी गई है।
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लड़की के पिता के मुताबिक इसके बाद उन्होंने फिर नवाबगंज थाने जाकर पुलिस को पूरी बात बताई। छह दिन से लापता लड़की की हत्या की बात सुनकर पुलिस के होश उड़ गए। इंस्पेक्टर धनंजय सिंह ने तत्काल पुलिस को भेजकर विकास को पकड़वा लिया। थाने में पूछताछ की गई तो उसने हत्या की बात कबूल करने के साथ लड़की की लाश भी बरामद करा दी। इसके बाद पुलिस ने उसके अपहरण और हत्या की रिपोर्ट दर्ज की। लड़की के पिता ने बताया कि वह घर से 20 हजार रुपये और मोबाइल लेकर गई थी। इसके अलावा वह पाजेब और कुंडल पहनी हुई थी। इनमें से कुछ भी नहीं मिला।
सांस बची थी इसलिए दोबारा घोटा गला
लड़की के शव का पोस्टमार्टम तीन डाक्टरों के पैनल ने किया। इसमें गला दबाकर हत्या की पुष्टि हो गई। पुलिस की पूछताछ में आरोपी विकास ने उसके साथ दुष्कर्म करने की बात भी कबूली। पुष्टि के लिए डाक्टरों की टीम ने स्लाइड बनाकर जांच को भेजी है। विकास ने बताया कि उसने लड़की का गला घोट दिया था। उसके गले में दुपट्टा लिपटा हुआ था लेकिन हल्की सांस चल रही थी। लड़की के जिंदा रहने की कोई गुंजाइश न बचे इसलिए उसने दोबारा दुपट्टे से लड़की का गला घोटकर उसकी आखिरी सांसें भी बंद कर दी।
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गुमशुदगी तक दर्ज न करने वाली पुलिस ने इसके बाद रचा हत्या के खुलासे का तानाबाना बरेली। नवाबगंज में 12 साल की बच्ची के अपहरण और हत्या के मामले में फिर पुलिस का संवेदनहीन चेहरा नुमाया हुआ। बच्ची के घरवालों ने ही उसकी हत्या की सूचना पुलिस को दी थी। थाने के बार-बार चक्कर काटने के बावजूद उसकी गुमशुदगी तक दर्ज न करने वाली पुलिस ने इसके बाद आनन-फानन शव को कब्जे में लेकर हत्या का खुलासा और आरोपी की गिरफ्तारी के गुडवर्क का तानाबाना बुन डाला।
पोस्टमार्टम हाउस पर लड़की के पिता ने बताया कि नौ फरवरी को लड़की के जाने के बाद उन्होंने काफी छानबीन की लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। लड़की के पास जो मोबाइल था, वह भी बंद था। मोबाइल में चूंकि लड़की के पिता के नाम लिया गया सिम पड़ा हुआ था लिहाजा उसका कुछ पता न चलने पर घरवालों ने कस्टमर केयर पर फोन कर पूछा कि नौ फरवरी को उनके नंबर पर आखिरी कॉल किसकी आई थी। कस्टमर केयर से जो नंबर बताया गया, वह पास के ही गांव चमरौआ के विकास गंगवार का था। इसके बाद लड़की के घरवाले विकास के घर पहुंचे जहां पंचायत बैठी लेकिन इसके बावजूद विकास ने कुछ नहीं कबूला। इसके बाद 11 फरवरी को लड़की के परिजन नवाबगंज थाने पहुंचे और इंस्पेक्टर धनंजय सिंह की गैरमौजूदगी में दरोगा कैलाश सिंह को पूरी बात बताई।
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लड़की के पिता ने बताया कि उन्होंने पुलिस को आरोपी विकास का फोन नंबर भी दिया जिस पर सिपाही सत्यप्रकाश ने उससे बात कर थाने आने को कहा। जब वह थाने नहीं आया तो सिपाही विकास के घर भी गया लेकिन इसके बावजूद न उसे पकड़ा गया न रिपोर्ट दर्ज की गई। इसके बाद वे लोग फिर 13 फरवरी को थाने पहुंचे लेकिन पुलिस ने तब भी उनकी नहीं सुनी। लड़की के पिता के मुताबिक वे लोग खुद ही छानबीन करते रहे। विकास की निगरानी भी शुरू कर दी। विकास ने अपनी बहन-बहनोई को पूरी बात बता दी थी। उसके बहनोई मुकेश ने 14 फरवरी को लड़की के पिता को बता दिया कि उनकी बेटी की हत्या कर दी गई है।
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लड़की के पिता के मुताबिक इसके बाद उन्होंने फिर नवाबगंज थाने जाकर पुलिस को पूरी बात बताई। छह दिन से लापता लड़की की हत्या की बात सुनकर पुलिस के होश उड़ गए। इंस्पेक्टर धनंजय सिंह ने तत्काल पुलिस को भेजकर विकास को पकड़वा लिया। थाने में पूछताछ की गई तो उसने हत्या की बात कबूल करने के साथ लड़की की लाश भी बरामद करा दी। इसके बाद पुलिस ने उसके अपहरण और हत्या की रिपोर्ट दर्ज की। लड़की के पिता ने बताया कि वह घर से 20 हजार रुपये और मोबाइल लेकर गई थी। इसके अलावा वह पाजेब और कुंडल पहनी हुई थी। इनमें से कुछ भी नहीं मिला।