Bareilly: शाही इलाके में महिलाओं की हत्या की गुत्थी है उलझी, पुलिस नहीं कर पा रही सटीक खुलासा
बरेली के शाही इलाके में सातवीं हत्या 68 वर्षीय दुलारी देवी की होने के बाद अब पुराने अनसुलझे मामलों का भी जल्द खुलासा किए जाने की मांग उठी है। क्षेत्र के लोग ये जानना चाहते हैं कि इन हत्याओं के पीछे आखिर है कौन?
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बरेली के शाही थाना क्षेत्र और उससे सटे इलाके में बीते छह महीनों में हुईं सात महिलाओं की हत्याओं में कई की गुत्थी उलझी हुई है। एक मामले में बेटा हत्यारा निकला है, लेकिन बाकी खुलासों पर सवाल उठ रहे हैं। हत्याओं का तरीका एक जैसा है और 45 वर्ष से अधिक उम्र वालीं महिलाएं ही निशाने पर हैं।
अनसुलझे मामलों में पुलिस की तफ्तीश की दिशा भी बदल रही है, लेकिन सटीक खुलासा नहीं हो रहा। सातवीं हत्या 68 वर्षीय दुलारी देवी की होने के बाद अब पुराने अनसुलझे मामलों का भी जल्द खुलासा किए जाने की मांग उठी है। क्षेत्र के लोग ये जानना चाहते हैं कि इन हत्याओं के पीछे अगर कोई एक व्यक्ति या गैंग नहीं तो एक जैसा तरीका कैसे अपनाया जा रहा है। ये महज संयोग है या फिर साजिश?
नहीं पता चल रहा हत्या का कारण, संदिग्ध को छोड़ा
शाही थाने के गांव खरसैनी में बीते सोमवार की रात 68 वर्षीय दुलारी देवी का शव मिला था। उनके गले में साड़ी का वैसा ही फंदा लगा था जो पहले के मामलों में मिलता रहा है। पुलिस ने घटनास्थल के पास से एक संदिग्ध चौकीदार को पकड़ा था। उसको लेकर खुलासे का तानाबाना बुना जा रहा था, लेकिन पोस्टमार्टम में मौत का कारण साफ न होने से खुलासा अटक गया। संदिग्ध को छोड़कर पुलिस साक्ष्य मजबूत करने में जुटी है।
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शाही के आनंदपुर गांव की महिला प्रेमवती 29 जून को उस समय लापता हो गईं, जब वह पशुओं के लिए घास लेने जंगल गईं थीं। अगले दिन खेत में उनका शव पड़ा मिला। साड़ी से गला घोंटकर हत्या की गई थी। परिवार ने संदेह के आधार पर ईंट भट्ठा मालिक समेत दो लोगों को नामजद कराया था। पुलिस ने उन्हें पकड़ा, लेकिन पर्याप्त साक्ष्य न मिलने की बात कहकर उन्हें छोड़ दिया। विवेचना अभी चल रही है।
धानवती मामले को खारिज करने की तैयारी
कुल्छा की धानवती का शव गन्ने के खेत में मिला था। शव की हालत ऐसी हो गई थी कि पोस्टमार्टम में मौत की स्थिति साफ न हो सकी। हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस ने विसरा जांच को भेजा। अब मौत की वजह साफ न होने पर पुलिस हत्या का मामला खारिज करने जा रही है। हालांकि परिवार और गांव के लोग इस घटनाक्रम को हत्या के रूप में ही देख रहे हैं।
रेशमा देवी के मामले में विसरा रिपोर्ट ने फंसाया
मीरगंज के गांव गूला में श्मशान भूमि के पास झाड़ियों में 62 वर्षीय रेशमा देवी का शव मिला था। वह 12 अक्तूबर को बेटे रोहताश के साथ दवा व परचून की दुकान का सामान लेने मीरगंज गई थीं। बेटे ने मां को दवा और सामान दिलवाकर एक टेंपो में बैठा दिया था। लेकिन वह घर नहीं पहुंची और कुछ दिन बाद झाड़ियों में उनका क्षतविक्षत शव मिला। परिवार ने हत्या की आशंका जताई, लेकिन पोस्टमार्टम में मौत स्पष्ट न होने व विसरा सुरक्षित होने के बाद पुलिस सुस्त पड़ गई। कुछ लोगों ने रेशमा देवी को सड़क किनारे सुस्ताते देखा था। इस पर पुलिस कह रही कि रेशमा बीमार थीं और मौत की वजह बीमारी हो सकती है। हालांकि यह सवाल अनुत्तरित है कि उन्हें सड़क किनारे से झाड़ियों में खींचकर कौन ले गया।
शाही से सटे शीशगढ़ के गांव लखीमपुर में 31 अक्तूबर को 60 साल की महमूदन का शव खेत में मिला था। महिला की चप्पलें खेत के बाहर मिली थीं। चुनरी से ही गला कसा गया था। बेटे ने अज्ञात हत्यारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दो टीमें खुलासे के लिए सुराग खोज रही हैं। पुलिस ने दो ऐसे लोगों को चिह्नित किया था जो हत्या के दिन गांव से बाहर गए थे। इनमें से एक को तलाश कर उसके लापता होने की सही वजह तलाश ली गई, दूसरे को लेकर शक अभी कायम है। हत्या का खुलासा भी नहीं हो पा रहा।
खजुरिया निवासी कुसुमा देवी की हत्या भी खेत से घर लौटते वक्त हुई थी। साड़ी से गला कसा मिला था। परिजनों ने अज्ञात में रिपोर्ट कराई थी। पुलिस ने काफी समय बाद एक नशेड़ी को जेल भेजा। तर्क था कि यह शख्स कुसुमा के खेत में सुल्फा पीने आता था। कुसुमा इसका विरोध करती थीं। आरोपी के जेल जाने के बाद से परिवार खामोश है। गांव वालों को खुलासे की थ्योरी समझ नहीं आ रही।
शाही के मुबारकपुर गांव की शांति देवी का शव फतेहगंज पश्चिमी थाने के पनवड़िया के जंगल में मिला था। इसमें शांति देवी का बेटा तोताराम ही जेल गया है। संपत्ति विवाद के मामले को काफी हद तक सही माना गया। चूंकि शांति देवी की हत्या के काफी समय बाद तक परिवार ने उनकी गुमशुदगी तक दर्ज नहीं कराई थी। शांति देवी अपनी संपत्ति दूसरों को दे रही थीं, इसी पर बेटा नाराज था।