{"_id":"5e557c258ebc3ef3e411451e","slug":"plenty-of-opportunities-create-new-identity-in-society-by-struggle-bareilly-news-bly397315935","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘अवसर खूब, संघर्ष से समाज में नई पहचान बनाएं’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘अवसर खूब, संघर्ष से समाज में नई पहचान बनाएं’
विज्ञापन
फ्यूचर में पुरस्कृत की गई छात्राएं।
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
अमर उजाला अपराजिता के तहत भाषण प्रतियोगिता का आयोजन
विज्ञापन
बरेली। अमर उजाला अपराजिता (100 मिलियन स्माइल) कार्यक्रम के तहत मंगलवार को फ्यूचर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के ऑडिटोरियम में भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें छात्राओं ने खुलकर अपने विचार रखे। कहा कि महिलाओं के लिए आज समाज में अवसर उपलब्ध हैं। इनका फायदा उठाते हुए महिलाओं को संघर्ष कर समाज में नई पहचान बनानी चाहिए। प्रतियोगिता में निहारिका प्रथम रहीं। द्वितीय स्थान पर पूजा गुग्तियाल, श्रीन हाफिज और तीसरे स्थान पर मेनका राठौर रहीं।
प्रतियोगिता में बीएड छात्रा दिव्या मांजरेकर ने कहा कि यूनाइटेड नेशंस से लेकर अपनी संसद तक महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की लगातार कोशिश हो रही है। मेनका राठौर ने कहा कि महिलाओं के जागरूक होने से ही राष्ट्र में नई चेतना और जागृति आ सकेगी। निहारिका ने कहा कि अभी वर्किंग प्लेस पर कामकाजी महिलाओं के लिए माहौल ठीक करने की जरूरत है। छात्रा पूजा गुग्तियाल ने कहा कि लोग अब अपने घरों की महिलाओं को शिक्षा समेत नौकरी के लिए घर से बाहर भेज रहे हैं। हालांकि सामाजिक स्तर पर सामूहिक रूप से संस्कारों में बदलाव और महिलाओं के प्रति सम्मान का भाव जगाना होगा। श्रीन हाफिज ने कहा कि जब प्रकृति महिला-पुरुष में भेदभाव नहीं करती तो समाज में ऐसा क्यों है। शाहजीन फातिमा ने कहा कि महिला सशक्तीकरण से तात्पर्य उनके जीवन और उनकी क्षमताओं से है। एक बार क्षमताओं और अधिकारों का पता लगने पर महिला खुद ही सशक्त हो जाती है।
इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर रितेश सक्सेना ने छात्राओं को किरण बेदी, पीवी सिंधु, साइना नेहवाल आदि नामों की याद दिलाते हुए कहा कि महिलाओें को संघर्ष के बल पर समाज में पहचान बनाकर राष्ट्र में योगदान देना चाहिए। विजेता छात्राओं को डायरेक्टर ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
प्रतियोगिता में बीएड छात्रा दिव्या मांजरेकर ने कहा कि यूनाइटेड नेशंस से लेकर अपनी संसद तक महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की लगातार कोशिश हो रही है। मेनका राठौर ने कहा कि महिलाओं के जागरूक होने से ही राष्ट्र में नई चेतना और जागृति आ सकेगी। निहारिका ने कहा कि अभी वर्किंग प्लेस पर कामकाजी महिलाओं के लिए माहौल ठीक करने की जरूरत है। छात्रा पूजा गुग्तियाल ने कहा कि लोग अब अपने घरों की महिलाओं को शिक्षा समेत नौकरी के लिए घर से बाहर भेज रहे हैं। हालांकि सामाजिक स्तर पर सामूहिक रूप से संस्कारों में बदलाव और महिलाओं के प्रति सम्मान का भाव जगाना होगा। श्रीन हाफिज ने कहा कि जब प्रकृति महिला-पुरुष में भेदभाव नहीं करती तो समाज में ऐसा क्यों है। शाहजीन फातिमा ने कहा कि महिला सशक्तीकरण से तात्पर्य उनके जीवन और उनकी क्षमताओं से है। एक बार क्षमताओं और अधिकारों का पता लगने पर महिला खुद ही सशक्त हो जाती है।
विज्ञापन
इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर रितेश सक्सेना ने छात्राओं को किरण बेदी, पीवी सिंधु, साइना नेहवाल आदि नामों की याद दिलाते हुए कहा कि महिलाओें को संघर्ष के बल पर समाज में पहचान बनाकर राष्ट्र में योगदान देना चाहिए। विजेता छात्राओं को डायरेक्टर ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
विज्ञापन