{"_id":"5bf49ecbbdec2269bd06b692","slug":"piro-murshid-shah-saklan-mian-says-akbar-is-not-a-hero-he-was-villain-of-islam","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"अकबर नायक नहीं, इस्लाम का खलनायक, उर्स-ए-शराफती में दरगाह शराफतिया के सज्जादानशीन की टिप्पणी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अकबर नायक नहीं, इस्लाम का खलनायक, उर्स-ए-शराफती में दरगाह शराफतिया के सज्जादानशीन की टिप्पणी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
Updated Wed, 21 Nov 2018 05:24 AM IST
विज्ञापन
उर्स-ए-शराफती में मौजूद जायरीन
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इतिहास की किताबों में बादशाह अकबर को मुगल साम्राज्य के गिने-चुने उदारवादी शासकों में एक माना जाता है, लेकिन हजरत शाह मौलाना शराफत अली मियां के मंगलवार को कुल के मौके पर पर दरगाह के सज्जादानशीन पीरोमुर्शिद शाह सकलैन मियां ने उन्हें इस्लाम का खलनायक करार दिया।
उन्होंने पिछले दिनों उर्स-ए-रजवी के कुल में मुसलमानों को दरगाह अजमेर शरीफ जाने से मना करने पर भी सवाल उठाया। कहा, दुनिया भर के मुसलमान हज के लिए मक्का जाते हैं, अगर वहां कोई बदसलूकी करेगा तो क्या मुसलमानों को हज करना भी छुड़वा दिया जाएगा।
सकलैन मियां ने कुल में जुटे हजारों मुसलमानों के बीच तकरीर के दौरान मुगलकालीन आलिम हजरत शेख अहमद मुजद्दिद अलफिसानी सरहिंद का नाम लेते हुए कहा कि जब भी उनका जिक्र होता है तो उन्हें वहाबी या देवबंदी बता दिया जाता है
विज्ञापन
लेकिन असलियत यह है कि जिस वक्त बादशाह अकबर इस्लाम को मिटाने पर तुला था और दीन ए इलाही बनाकर हिंदुस्तान में एक नए इस्लाम को शुरू करने की कोशिश कर रहा था, शेख मुजद्दिद अलफिसानी ने ही उससे निजात दिलाने का काम किया था। उन्होंने ही अकबर की कोशिशों को जड़ से मिटाया था।
विज्ञापन
उन्होंने पिछले दिनों उर्स-ए-रजवी के कुल में मुसलमानों को दरगाह अजमेर शरीफ जाने से मना करने पर भी सवाल उठाया। कहा, दुनिया भर के मुसलमान हज के लिए मक्का जाते हैं, अगर वहां कोई बदसलूकी करेगा तो क्या मुसलमानों को हज करना भी छुड़वा दिया जाएगा।
विज्ञापन
सकलैन मियां ने कुल में जुटे हजारों मुसलमानों के बीच तकरीर के दौरान मुगलकालीन आलिम हजरत शेख अहमद मुजद्दिद अलफिसानी सरहिंद का नाम लेते हुए कहा कि जब भी उनका जिक्र होता है तो उन्हें वहाबी या देवबंदी बता दिया जाता है
विज्ञापन
लेकिन असलियत यह है कि जिस वक्त बादशाह अकबर इस्लाम को मिटाने पर तुला था और दीन ए इलाही बनाकर हिंदुस्तान में एक नए इस्लाम को शुरू करने की कोशिश कर रहा था, शेख मुजद्दिद अलफिसानी ने ही उससे निजात दिलाने का काम किया था। उन्होंने ही अकबर की कोशिशों को जड़ से मिटाया था।
उर्स-ए-रजवी के कुल में मुसलमानों से दरगाह अजमेर शरीफ न जाने की अपील किए जाने से शुरू हुए विवाद पर सकलैन मियां ने कहा कि हिंदुस्तान में जितने भी बुजुर्गाने दीन हैं, वे सब हमारे अकीदत के मरकज हैं।
उनकी हैसियत में जरूर फर्क हो सकता है, लेकिन हजरत ख्वाजा मोइनउद्दीन चिश्ती अजमेरी तो अपनी हैसियत के खुद ही मालिक हैं। किसे नहीं मालूम है कि लाखों मुसलमानों को इस्लाम और ईमान से ख्वाजा ने ही मालामाल किया।
सही मायनों में ख्वाजा मोइनउद्दीन चिश्ती ही हिंदुस्तान में इस्लाम और ईमान के सरचश्मा (रोशनी देने वाले) हैं। कुछ खुद्दाम बदसलूक या बदअकीदा भी हो जाएं तो क्या मुसलमान अजमेर जाना छोड़ देंगे। उन्होंने यह भी सवाल किया कि हम हज के लिए मक्का जाते हैं, मदीना मुनव्वरा भी जाते हैं, अगर वहां और भी ज्यादा धक्के मिलें तो क्या वहां भी जाना छोड़ दिया जाएगा।
उनकी हैसियत में जरूर फर्क हो सकता है, लेकिन हजरत ख्वाजा मोइनउद्दीन चिश्ती अजमेरी तो अपनी हैसियत के खुद ही मालिक हैं। किसे नहीं मालूम है कि लाखों मुसलमानों को इस्लाम और ईमान से ख्वाजा ने ही मालामाल किया।
सही मायनों में ख्वाजा मोइनउद्दीन चिश्ती ही हिंदुस्तान में इस्लाम और ईमान के सरचश्मा (रोशनी देने वाले) हैं। कुछ खुद्दाम बदसलूक या बदअकीदा भी हो जाएं तो क्या मुसलमान अजमेर जाना छोड़ देंगे। उन्होंने यह भी सवाल किया कि हम हज के लिए मक्का जाते हैं, मदीना मुनव्वरा भी जाते हैं, अगर वहां और भी ज्यादा धक्के मिलें तो क्या वहां भी जाना छोड़ दिया जाएगा।
अजहरी मियां के शिजरे में तीनों कुल नहीं हैं तो क्या उन्हें कुरान से हटा दिया
सकलैन मियां अपनी तकरीर में सिलसिलों के विवाद पर भी बोले। उन्होंने कहा कि कुछ मौलवी इल्जाम लगाते हैं कि वह फातेहा में ‘सूरे काफेरून’ नहीं पढ़ते। वजह भी बताते हैं कि वे गैर मुस्लिमों को खुश करने के लिए इस सूरे को नहीं पढ़ते। उन्होंने कहा कि गैरमुस्लिम को तो यह सूरा समझ ही नहीं आता। फिर यह तो उनके शिजरे में चला आ रहा है।
उन्होंने कहा कि मारहरा शरीफ के नूरी मियां के शजरे में ‘सूरे नास’ और ‘सूरे फलक’ भी नहीं है। अजहरी मियां के शिजरे में तीनों कुल नहीं है तो क्या उन्होंने इन सूरों को कुरान से हटा दिया। जैसा कि हम पर इल्जाम लगाया जाता है कि फातेहा में हम कुलिया नहीं पढ़ते तो क्या हमने कुरान से कुलिया को निकाल दिया है। उन्होंने कहा कि वह तो मुकम्मल कुरान पर ईमान रखते हैं। ‘बे’ से लेकर ‘सीन’ तक उनका ईमान है। जो इल्जाम लगाते हैं, वे खुद झूठे हैं।
उन्होंने कहा कि मारहरा शरीफ के नूरी मियां के शजरे में ‘सूरे नास’ और ‘सूरे फलक’ भी नहीं है। अजहरी मियां के शिजरे में तीनों कुल नहीं है तो क्या उन्होंने इन सूरों को कुरान से हटा दिया। जैसा कि हम पर इल्जाम लगाया जाता है कि फातेहा में हम कुलिया नहीं पढ़ते तो क्या हमने कुरान से कुलिया को निकाल दिया है। उन्होंने कहा कि वह तो मुकम्मल कुरान पर ईमान रखते हैं। ‘बे’ से लेकर ‘सीन’ तक उनका ईमान है। जो इल्जाम लगाते हैं, वे खुद झूठे हैं।