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बरेलीः पेट्रोलियम पदार्थ की मांग 50 से 70 प्रतिशत तक गिरी
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बंद पड़ा पेट्रोलियम कंपनी का दफ्तर।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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डीजल, पेट्रोल, जीएनजी, कामर्शियल एलपीजी की मांग घटने से कारोबारी परेशान
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बरेली। लॉक डाउन का सबसे ज्यादा असर पेट्रोलियम उत्पादों की खपत पर पड़ा है। जिले भर में डीजल और पेट्रोल की खपत आधे से भी कम रह गई है। टेंपो-ऑटो बंद होने की वजह से सीएनजी को और भी बड़ा झटका लगा है और उसकी खपत 60 फीसदी तक कम हो गई है। पीएनजी और एलपीजी की स्थिर है।
पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई को 22 मार्च को जनता कर्फ्यू से झटका लगा और फिर लॉक डाउन लागू होने के बाद उसकी खपत का ग्राफ धराशायी ही हो गया। डीजल-पेट्रोल की सप्लाई जिले में इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के 196 पेट्रोल पंप हैं जिन पर सामान्य माहौल में हर महीने औसतन 12 हजार डीजल और 41 सौ किलोलीटर पेट्रोल की रोजाना सेल हो रही थी। जनता कर्फ्यू लगते ही डीजल और पेट्रोल दोनों की सेल धड़ाम हो गई। कंपनियों और कारोबारियों के मुताबिक डीजल-पेट्रोल की खपत 50 फीसदी से भी कम हो गई है। शहर के चार सीएनजी स्टेशनों पर सेल का आंकड़ा और भी खराब है। कुछ सीएनजी स्टेशनों की सेल में 60 तो कुछ पर 70 फीसदी तक की गिरावट बताई जा रही है। होटल, रेस्टोरेंट और फैक्टरियां बंद होने से कामर्शियल एलपीजी की मांग में भी भारी गिरावट आयी है। हालांकि घरेलू गैस की मांग जहां की तहां स्थिर है।
पेट्रोलियम सप्लाई नेटवर्क
पेट्रोल पंप 196
सीएनजी स्टेशन 04
जिले में पेट्रोलियम उत्पादों की मांग
पहले अब
डीजल 400 210
पेट्रोल 140 065
सीएनजी 30000 5000
आंकड़े किलोलीटर/प्रतिदिन
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सख्ती ज्यादा होने से पेट्रोल पंपों तक स्टाफ नहीं पहुंच पा रहा है। इससे पंप ऑपरेशन में समस्या आ रही है। लॉक डाउन में ग्राहक कम हो गए हैं। सेल कम और खर्च ज्यादा होने से घाटा हो रहा है। प्रशासन को हमारे स्टाफ को पास उपलब्ध कराने चाहिए। - अशोक कुमार गुप्ता, अध्यक्ष पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन
घरों तक एलपीजी सिलिंडर पहुंचाने और गैस एजेंसी तक आने के लिए स्टाफ को पास की सुविधा देने की गाइड लाइन अब तक नहीं बनी है। इससे घरेलू सिलिंडरों की सप्लाई में बाधा आ रही है। कॉमर्शियल सिलेंडरों की तो मांग ही लगभग खत्म हो गई है। - रंजना सोलंकी, अध्यक्ष एलपीजी डीलर एसोसिएशन
शहर के चार स्टेशनों पर आमतौर पर रोजाना करीब तीस हजार किलो सीएनजी गाड़ियों में भरी जाती थी लेकिन अब ऑटो और टेंपो पूरी तरह बंद होने के बाद सीएनजी की मांग 60 प्रतिशत तक गिर गई है। - एसएम अली, चीफ मैनेजर सीयूजीएल
पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई को 22 मार्च को जनता कर्फ्यू से झटका लगा और फिर लॉक डाउन लागू होने के बाद उसकी खपत का ग्राफ धराशायी ही हो गया। डीजल-पेट्रोल की सप्लाई जिले में इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के 196 पेट्रोल पंप हैं जिन पर सामान्य माहौल में हर महीने औसतन 12 हजार डीजल और 41 सौ किलोलीटर पेट्रोल की रोजाना सेल हो रही थी। जनता कर्फ्यू लगते ही डीजल और पेट्रोल दोनों की सेल धड़ाम हो गई। कंपनियों और कारोबारियों के मुताबिक डीजल-पेट्रोल की खपत 50 फीसदी से भी कम हो गई है। शहर के चार सीएनजी स्टेशनों पर सेल का आंकड़ा और भी खराब है। कुछ सीएनजी स्टेशनों की सेल में 60 तो कुछ पर 70 फीसदी तक की गिरावट बताई जा रही है। होटल, रेस्टोरेंट और फैक्टरियां बंद होने से कामर्शियल एलपीजी की मांग में भी भारी गिरावट आयी है। हालांकि घरेलू गैस की मांग जहां की तहां स्थिर है।
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पेट्रोलियम सप्लाई नेटवर्क
पेट्रोल पंप 196
सीएनजी स्टेशन 04
जिले में पेट्रोलियम उत्पादों की मांग
पहले अब
डीजल 400 210
पेट्रोल 140 065
सीएनजी 30000 5000
आंकड़े किलोलीटर/प्रतिदिन
पेट्रोलियम कंपनी अफसरों ने अपने घरों से शुरू किया काम
तीनों पेट्रोलियम कंपनियों ने अपना निवास कैंप कार्यालय बना लिया है। पेट्रोलियम नेटवर्क की सबसे बड़ी कंपनी इंडियन ऑयल कारपोरेशन मंडल कार्यालय में भी काम बंद है। एचपीसी और बीपीसी कार्यालय आंवला डिपो में ही है। वहां भी अफसर नहीं पहुंच रहे हैं। डिपो में फिलिंग कार्य से जुड़ा स्टाफ ही शिफ्ट में काम कर रहा है। मांग होने से स्टाफ में भी कटौती हो गई है। एलपीजी सप्लाई सुचारु रखने के लिए भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन बॉटलिंग प्लांट परसाखेड़ा में काम ज्यादा होने लगा है। आईओसी ने शाहजहांपुर में पूरी क्षमता से उत्पादन शुुरू कराया है।
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सख्ती ज्यादा होने से पेट्रोल पंपों तक स्टाफ नहीं पहुंच पा रहा है। इससे पंप ऑपरेशन में समस्या आ रही है। लॉक डाउन में ग्राहक कम हो गए हैं। सेल कम और खर्च ज्यादा होने से घाटा हो रहा है। प्रशासन को हमारे स्टाफ को पास उपलब्ध कराने चाहिए। - अशोक कुमार गुप्ता, अध्यक्ष पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन
घरों तक एलपीजी सिलिंडर पहुंचाने और गैस एजेंसी तक आने के लिए स्टाफ को पास की सुविधा देने की गाइड लाइन अब तक नहीं बनी है। इससे घरेलू सिलिंडरों की सप्लाई में बाधा आ रही है। कॉमर्शियल सिलेंडरों की तो मांग ही लगभग खत्म हो गई है। - रंजना सोलंकी, अध्यक्ष एलपीजी डीलर एसोसिएशन
शहर के चार स्टेशनों पर आमतौर पर रोजाना करीब तीस हजार किलो सीएनजी गाड़ियों में भरी जाती थी लेकिन अब ऑटो और टेंपो पूरी तरह बंद होने के बाद सीएनजी की मांग 60 प्रतिशत तक गिर गई है। - एसएम अली, चीफ मैनेजर सीयूजीएल