{"_id":"59d938c64f1c1b59678b4a01","slug":"perfection-from-moon-vision-on-karva-chauth","type":"story","status":"publish","title_hn":" करवाचौथ पर चंद्र दर्शन से मिलेगी पूर्णता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
करवाचौथ पर चंद्र दर्शन से मिलेगी पूर्णता
बरेली।
Updated Sun, 08 Oct 2017 01:57 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
कार्तिक के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाने वाला पर्व करवाचौथ रविवार को मनाया जाएगा। सुहागिन महिलाएं व्रत रखेंगी और चंद्र दर्शन कर अर्घ्य देकर व्रत का परायण करेंगी।
चतुर्थी तिथि आठ अक्तूबर को शाम 4.58 बजे लग जाएगी और अगले दिन तक रहेगी। बता दें कि जो व्रत चंद्र से संबंधित होते हैं वे चंद्र उदय व्यापिनी तिथि से मान्य होते हैं। ज्योतिषाचार्य आचार्य मुकेश मिश्रा ने बताया कि इस बार चंद्रोदय के समय वृष राशि पर चंद्रमा भी आ जाएगा, जो उच्च राशि का माना जाता है। वृष राशि के स्वामी शुक्र ग्रह हैं, जो सुंदरता और श्रृंगार के देवता हैं, जबकि चंद्रमा को प्रेम, शीतलता, प्रसिद्धि, दीर्घायु और पूर्णता का कारक माना जाता है। ऐसे में सुहागिन स्त्रियों पर शुक्र और चंद्रमा की पूर्ण कृपा होगी, इसलिए अटूट प्रेम बरसेगा। इस दिन शिव परिवार और गणेश जी का पूजन करने का विधान है। आचार्य बताते हैं कि निर्जला व्रत रखकर सोलह शृंगार के साथ चंद्र देव के दर्शन करने चाहिए। इससे परम सौभाग्य, दीर्घायु, यश, वैभव आदि प्राप्त होता है।
चंद्रोदय का समय
पंचांगों के मुताबिक रात 8.12 बजे चंद्रमा उदय होगा। कभी-कभी बादल होने की वजह से चंद्रमा के दर्शन देर से होते हैं। थोड़ा इंतजार करके चांद देखकर ही व्रत खोलना चाहिए।
विज्ञापन
पूजन विधि
निर्जला व्रत रहते हुए शाम को 16 शृंगार करके पूजा की थाली सजाएं। रोली, चावल, सिंदूर, फल, फूल, मिठाई, पूड़ी, पकवान आदि रखकर चांद की पूजा करें फिर आरती करें। इसके बाद करवे में जल भरकर रोली, चावल, मिठाई और चांदी डालकर चंद्रमा को तीन बार अर्घ्य दें। पति की दीर्घायु की कामना चंद्रदेव और गणेश जी से करें। पूरा बताशा खाकर ही व्रत खोलें। बताशा चंद्रमा की विशेष वस्तु है।
चतुर्थी तिथि आठ अक्तूबर को शाम 4.58 बजे लग जाएगी और अगले दिन तक रहेगी। बता दें कि जो व्रत चंद्र से संबंधित होते हैं वे चंद्र उदय व्यापिनी तिथि से मान्य होते हैं। ज्योतिषाचार्य आचार्य मुकेश मिश्रा ने बताया कि इस बार चंद्रोदय के समय वृष राशि पर चंद्रमा भी आ जाएगा, जो उच्च राशि का माना जाता है। वृष राशि के स्वामी शुक्र ग्रह हैं, जो सुंदरता और श्रृंगार के देवता हैं, जबकि चंद्रमा को प्रेम, शीतलता, प्रसिद्धि, दीर्घायु और पूर्णता का कारक माना जाता है। ऐसे में सुहागिन स्त्रियों पर शुक्र और चंद्रमा की पूर्ण कृपा होगी, इसलिए अटूट प्रेम बरसेगा। इस दिन शिव परिवार और गणेश जी का पूजन करने का विधान है। आचार्य बताते हैं कि निर्जला व्रत रखकर सोलह शृंगार के साथ चंद्र देव के दर्शन करने चाहिए। इससे परम सौभाग्य, दीर्घायु, यश, वैभव आदि प्राप्त होता है।
विज्ञापन
चंद्रोदय का समय
पंचांगों के मुताबिक रात 8.12 बजे चंद्रमा उदय होगा। कभी-कभी बादल होने की वजह से चंद्रमा के दर्शन देर से होते हैं। थोड़ा इंतजार करके चांद देखकर ही व्रत खोलना चाहिए।
विज्ञापन
पूजन विधि
निर्जला व्रत रहते हुए शाम को 16 शृंगार करके पूजा की थाली सजाएं। रोली, चावल, सिंदूर, फल, फूल, मिठाई, पूड़ी, पकवान आदि रखकर चांद की पूजा करें फिर आरती करें। इसके बाद करवे में जल भरकर रोली, चावल, मिठाई और चांदी डालकर चंद्रमा को तीन बार अर्घ्य दें। पति की दीर्घायु की कामना चंद्रदेव और गणेश जी से करें। पूरा बताशा खाकर ही व्रत खोलें। बताशा चंद्रमा की विशेष वस्तु है।