Bareilly News: राहत की कागजी उछलकूद, शहर में बंदरों का आतंक बरकरार, लोगों को कर रहे घायल
बरेली में बंदरों के हमलों से रोज करीब 250 लोग घायल हो रहे हैं, जिसकी पुष्टि अस्पताल के आंकड़े करते हैं। बंदरों के आतंक से लोग इस कदर परेशान हैं कि उन्होंने अपने घरों में लोहे के जाल लगवा रखे हैं।
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बरेली शहर में बंदरों का आतंक है। ये रोज ढाई सौ लोगों पर हमलावर हो रहे हैं। तीन सौ बेड अस्पताल व जिला अस्पताल के आंकड़े इसकी पुष्टि कर रहे हैं। इसके बावजूद नगर निगम हाथ पर हाथ धरे बैठा है। एक साल से बंदरों को पकड़ने के लिए सिर्फ कागजी उछलकूद जारी है। जिम्मेदारी कभी निगम के पाले में रही तो कभी वन विभाग को सौंप दी गई, पर शहरवासियों को राहत नहीं मिल सकी। नतीजा, ज्यादातर शहरवासियों ने बचाव के लिए अपने घरों पर लोहे के जाल लगवा लिए हैं।
बीते एक साल से किसी भी विभाग के पास बंदरों को पकड़ने का ठेका नहीं होने की वजह से इनकी संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। राजेंद्रनगर, सिविल लाइंस, जनकपुरी, चौपुला रोड आदि इलाकों में बंदरों की दहशत है। यहां सड़कों से लेकर छतों और दीवारों पर बंदरों के झुंड डटे रहते हैं। सड़क से पैदल गुजरने वाले लोग इनका आसान शिकार होते हैं। पलक झपकते ही ये उनका सामान छीन लेते हैं और काटकर उनको जख्मी कर देते हैं।
अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे लोग
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बंदरों के हमलों में जख्मी हुए करीब 250 लोग रोज एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। यानी सालभर में तीन हजार से अधिक लोग बंदरों के हमलों में जख्मी हो रहे हैं। वर्ष 2025 में नगर निगम ने 780 रुपये की दर से बंदर पकड़ने का ठेका एक एजेंसी को दिया था, लेकिन वन विभाग के जटिल नियमों की वजह से एक भी बंदर नहीं पकड़ा जा सका था।
अब शासन के निर्देश पर नगर निगम ने एक बार फिर बंदरों को पकड़ने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। वहीं, पार्षद गौरव सक्सेना ने बताया कि शास्त्री नगर में बंदरों का आतंक है। कई बार निगम से बंदरों को पकड़ने के लिए कहा गया है, लेकिन हर बार फरियाद अनसुनी कर दी गई।
नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि शासन की ओर से बंदर पकड़ने का आदेश मिला है। टेंडर प्रकिया जारी है। एजेंसी का चयन होते ही बंदरों को पकड़वाया जाएगा।