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Bareilly News: बसों में लगे पैनिक बटन बेदम, मेडिकल किट में एक्सपायर दवाएं
Thu, 03 Sep 2026 11:52 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Thu, 03 Sep 2026 11:52 PM IST
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बरेली। यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक सफर देने के दावे परिवहन निगम की बसों में ही दम तोड़ रहे हैं। लगातार नई बसें मिलने के बावजूद सड़कों पर अब भी पुरानी बसें दौड़ रही हैं। आपात स्थिति में यात्रियों की मदद के लिए लगाए गए पैनिक बटन कई बसों में बेदम पड़े हैं। संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में बृहस्पतिवार को ये खामियां सामने आईं।
टीम दोपहर 12 बजे सेटेलाइट बस अड्डे पहुंची और सीतापुर जाने वाली बस में सवार हुई। वहां फर्स्ट एड बॉक्स पर धूल जमी मिली। उसे खोलने पर पता चला कि चोट लगने पर लगाए जाने वाला ट्यूब दो साल पहले ही एक्सपायर हो चुका है। बस में महिला आरक्षित सीट संबंधी कोई सूचना भी नजर नहीं आई। इसके बाद टीम उतरकर पीलीभीत जाने वाली बस में पहुंची तो उसकी हालत काफी जर्जर मिली। सीटों के पास पैनिक बटन तो लगे थे, लेकिन उनको दबाने पर कोई आवाज नहीं हुई। चालक ने बताया कि काफी दिन से ये ऐसे ही हैं।
दिल्ली कांड से भी नहीं चेते
दिल्ली में बस में 16 वर्षीय किशोरी के साथ दुष्कर्म की वारदात के बावजूद जिम्मेदारों की आंख नहीं खुली। इसका मुख्य कारण ये सामने आया कि बस में पर्दे लगे हुए थे। यहां भी हालात कुछ ऐसे ही नजर आए। सेटेलाइट बस अड्डे पर दिल्ली जाने के लिए तैयार खड़ी बस संख्या यूपी 25 एचटी 2127 में हर तरफ पर्दे पड़े थे। पैनिक बटन गायब मिला। कंडक्टर ने बताया कि बस में पैनिक बटन नहीं है। दूसरी बस यूपी 32 एमएन 9846 में भी पैनिक बटन नहीं मिला। चालक ने बताया कि बस वर्षों पुरानी है, इसलिए अंदर कोई पैनिक बटन नहीं है। यदि होता भी तो खराब स्थिति में ही होता, क्योंकि यात्री पैनिक बटन इस्तेमाल कर स्टाफ को परेशान करते हैं।
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इनसेट
नई बसें आईं, फिर भी पुरानी बसों से पीछा नहीं छूटा
परिवहन निगम के बेड़े में नई बसें शामिल की जा रही हैं। इसका उद्देश्य यात्रियों को बेहतर, सुरक्षित और आरामदायक सफर उपलब्ध कराना है। इसके बावजूद पुरानी बसों का संचालन जारी है। पुरानी बसों में सीट, खिड़की, दरवाजे, लाइट, पंखे, इमरजेंसी उपकरण और अन्य सुविधाओं की स्थिति को लेकर यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। बीते बुधवार को ही यात्रियों ने बसों की छत से पानी टपकते हुए और इंजन में करंट आने की शिकायत भी अफसरों से की।
बस अड्डे पर भी अव्यवस्थाओं का अंबार
बस अड्डों पर भी यात्रियों को कई तरह की अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ रहा है। वहां लगीं पानी की टंकियां टूटी हैं। उनके आसपास गंदगी पसरी हुई है। यात्रियों के बैठने, शौचालय समेत अन्य जरूरी इंतजाम भी अव्यवस्था की गिरफ्त में हैं।
इसलिए जरूरी है पैनिक बटन
बसों में पैनिक बटन लगाने का उद्देश्य यात्रियों को आपात स्थिति में तत्काल मदद उपलब्ध कराना है। दुर्घटना, महिला सुरक्षा से जुड़ी घटना, चालक-परिचालक की लापरवाही या अन्य गंभीर परिस्थितियों में यात्री इसका इस्तेमाल कर सकें, इसके लिए व्यवस्था की गई है। यदि बटन काम ही नहीं कर रहा है तो यह पूरा इंतजाम सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाता है।
बसों में ये व्यवस्थाएं होना जरूरी
- प्रत्येक बस के रवाना होने से पहले पैनिक बटन की कार्यशीलता की जांच।
- मेडिकल किट की नियमित जांच और एक्सपायर दवाओं को तत्काल हटाना।
- अग्निशमन यंत्र की वैधता और कार्यशीलता की जांच।
- खराब सुरक्षा उपकरण वाली बस को बिना सुधार के रूट पर नहीं भेजना।
- चालक और परिचालक को आपात स्थिति में यात्रियों की मदद के लिए प्रशिक्षण।
- महिलाओं और दिव्यांग यात्रियों के लिए सुविधाजनक एवं सुरक्षित इंतजाम।
महिलाओं को सेफ्टी फीचर जानकारी नहीं
मैं अक्सर बस से बरेली से हल्द्वानी जाती हूं। पैनिक बटन और फायर सेफ्टी के बारे में जानकारी नहीं है। जिस बस में पहले से कुछ महिलाएं बैठी होती हैं, उसी में बैठती हूं। - सलमा, यात्री
बस के सुरक्षा उपकरणों के बार में ज्यादा नहीं जानती, लेकिन अग्निशमन सिलिंडर और इमरजेंसी खिड़की जरूर दिख जाती है। कभी पैनिक बटन के इस्तेमाल की नौबत नहीं आई। - सुनीता, यात्री
मैं फरीदपुर की निवासी हूं। बीते दिनों पिता के साथ रोडवेज बस से दिल्ली जा रही थी। रास्ते में उनको बुखार आया तो कंडक्टर से दवा मांगी। उसने किट में दवा नहीं होने की बात कही। - गीता देवी, यात्री
वर्जन
कुछ पुरानी बसों में पैनिक बटन और प्राथमिक चिकित्सा पेटिका में खामी हो सकती है। रक्षाबंधन के दौरान यात्रियों का दबाव बढ़ने पर सभी श्रेणी की बसों को सड़कों पर उतार दिया गया है। जिन बसों में खामियों की जानकारी मिल रही है, उन्हें ठीक कराया जा रहा है। - मोहम्मद अजीम, क्षेत्रीय प्रबंधक, परिवहन निगम
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टीम दोपहर 12 बजे सेटेलाइट बस अड्डे पहुंची और सीतापुर जाने वाली बस में सवार हुई। वहां फर्स्ट एड बॉक्स पर धूल जमी मिली। उसे खोलने पर पता चला कि चोट लगने पर लगाए जाने वाला ट्यूब दो साल पहले ही एक्सपायर हो चुका है। बस में महिला आरक्षित सीट संबंधी कोई सूचना भी नजर नहीं आई। इसके बाद टीम उतरकर पीलीभीत जाने वाली बस में पहुंची तो उसकी हालत काफी जर्जर मिली। सीटों के पास पैनिक बटन तो लगे थे, लेकिन उनको दबाने पर कोई आवाज नहीं हुई। चालक ने बताया कि काफी दिन से ये ऐसे ही हैं।
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दिल्ली कांड से भी नहीं चेते
दिल्ली में बस में 16 वर्षीय किशोरी के साथ दुष्कर्म की वारदात के बावजूद जिम्मेदारों की आंख नहीं खुली। इसका मुख्य कारण ये सामने आया कि बस में पर्दे लगे हुए थे। यहां भी हालात कुछ ऐसे ही नजर आए। सेटेलाइट बस अड्डे पर दिल्ली जाने के लिए तैयार खड़ी बस संख्या यूपी 25 एचटी 2127 में हर तरफ पर्दे पड़े थे। पैनिक बटन गायब मिला। कंडक्टर ने बताया कि बस में पैनिक बटन नहीं है। दूसरी बस यूपी 32 एमएन 9846 में भी पैनिक बटन नहीं मिला। चालक ने बताया कि बस वर्षों पुरानी है, इसलिए अंदर कोई पैनिक बटन नहीं है। यदि होता भी तो खराब स्थिति में ही होता, क्योंकि यात्री पैनिक बटन इस्तेमाल कर स्टाफ को परेशान करते हैं।
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इनसेट
नई बसें आईं, फिर भी पुरानी बसों से पीछा नहीं छूटा
परिवहन निगम के बेड़े में नई बसें शामिल की जा रही हैं। इसका उद्देश्य यात्रियों को बेहतर, सुरक्षित और आरामदायक सफर उपलब्ध कराना है। इसके बावजूद पुरानी बसों का संचालन जारी है। पुरानी बसों में सीट, खिड़की, दरवाजे, लाइट, पंखे, इमरजेंसी उपकरण और अन्य सुविधाओं की स्थिति को लेकर यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। बीते बुधवार को ही यात्रियों ने बसों की छत से पानी टपकते हुए और इंजन में करंट आने की शिकायत भी अफसरों से की।
बस अड्डे पर भी अव्यवस्थाओं का अंबार
बस अड्डों पर भी यात्रियों को कई तरह की अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ रहा है। वहां लगीं पानी की टंकियां टूटी हैं। उनके आसपास गंदगी पसरी हुई है। यात्रियों के बैठने, शौचालय समेत अन्य जरूरी इंतजाम भी अव्यवस्था की गिरफ्त में हैं।
इसलिए जरूरी है पैनिक बटन
बसों में पैनिक बटन लगाने का उद्देश्य यात्रियों को आपात स्थिति में तत्काल मदद उपलब्ध कराना है। दुर्घटना, महिला सुरक्षा से जुड़ी घटना, चालक-परिचालक की लापरवाही या अन्य गंभीर परिस्थितियों में यात्री इसका इस्तेमाल कर सकें, इसके लिए व्यवस्था की गई है। यदि बटन काम ही नहीं कर रहा है तो यह पूरा इंतजाम सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाता है।
बसों में ये व्यवस्थाएं होना जरूरी
- प्रत्येक बस के रवाना होने से पहले पैनिक बटन की कार्यशीलता की जांच।
- मेडिकल किट की नियमित जांच और एक्सपायर दवाओं को तत्काल हटाना।
- अग्निशमन यंत्र की वैधता और कार्यशीलता की जांच।
- खराब सुरक्षा उपकरण वाली बस को बिना सुधार के रूट पर नहीं भेजना।
- चालक और परिचालक को आपात स्थिति में यात्रियों की मदद के लिए प्रशिक्षण।
- महिलाओं और दिव्यांग यात्रियों के लिए सुविधाजनक एवं सुरक्षित इंतजाम।
महिलाओं को सेफ्टी फीचर जानकारी नहीं
मैं अक्सर बस से बरेली से हल्द्वानी जाती हूं। पैनिक बटन और फायर सेफ्टी के बारे में जानकारी नहीं है। जिस बस में पहले से कुछ महिलाएं बैठी होती हैं, उसी में बैठती हूं। - सलमा, यात्री
बस के सुरक्षा उपकरणों के बार में ज्यादा नहीं जानती, लेकिन अग्निशमन सिलिंडर और इमरजेंसी खिड़की जरूर दिख जाती है। कभी पैनिक बटन के इस्तेमाल की नौबत नहीं आई। - सुनीता, यात्री
मैं फरीदपुर की निवासी हूं। बीते दिनों पिता के साथ रोडवेज बस से दिल्ली जा रही थी। रास्ते में उनको बुखार आया तो कंडक्टर से दवा मांगी। उसने किट में दवा नहीं होने की बात कही। - गीता देवी, यात्री
वर्जन
कुछ पुरानी बसों में पैनिक बटन और प्राथमिक चिकित्सा पेटिका में खामी हो सकती है। रक्षाबंधन के दौरान यात्रियों का दबाव बढ़ने पर सभी श्रेणी की बसों को सड़कों पर उतार दिया गया है। जिन बसों में खामियों की जानकारी मिल रही है, उन्हें ठीक कराया जा रहा है। - मोहम्मद अजीम, क्षेत्रीय प्रबंधक, परिवहन निगम