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सावधान! रामगंगा पुल पर गुजरें जरा संभलकर
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बरेली। चौबारी में रामगंगा का पुराना पुल भी खतरनाक हो गया है। हाल ही में पुल के निरीक्षण के दौरान यह पता लगने पर पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर दंग रह गए कि पिलर और बीम के बीच पुल को बैलेंस करने के लिए लगी बियरिंग टूटकर टेढ़ी हो गई है। इस वजह से हैवी ट्रैफिक के गुजरने के दौरान भी पुल में कंपन नहीं हो रहा। ऐसे में पुल टूटने का खतरा पैदा हो गया है। तकनीकी मदद के लिए पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर ने रुड़की से सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआई) की टीम को बुलाया है।
बरेली-बदायूं हाईवे पर करीब 680 मीटर लंबे रामगंगा पुल डेढ़ लेन का ही है। काफी पुराना हो चुका यह पुल अब जर्जर भी हो रहा है। दो दिन पहले पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर राकेश राजवंशी पुल का निरीक्षण करने पहुंचे तो वहां बरेली की तरफ से पिलर नंबर दो पर पुल को रोकने के लिए बने लोहे की दो मीटर गोलाई की बियरिंग टूटी मिली। बियरिंग टूटी होने के साथ अपनी जगह से हट भी गई थी। इंजीनियरों का कहना है कि भारी वाहनों के निकलने के दौरान उनके भार को डायवर्ट करने के लिए बियरिंग का अहम रोल होता है। इसके क्षतिग्रस्त होने से पुल में कंपन बंद हो जाता है और पुल के टूटने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके अलावा पुल में कई और जगहों पर भी गंभीर खामियां मिली है। हादसे की आशंका देखते हुए पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर ने रूड़की से सीआरआरआई की टीम को पुल की रिपोर्ट तैयार करने के लिए बुला लिया है। विशेषज्ञों की टीम अध्ययन के बाद इस समस्या के समाधान का हल बताएगी।
सेतु निगम की लापरवाही से नहीं बन पाया नया पुल
रामगंगा का पुल जर्जर और संकरा होने के कारण सेतु निगम ने 37 करोड़ रुपये की लागत से नए पुल का निर्माण शुरू कराया था। इस पुल का निर्माण अब तक पूरा हो जाना चाहिए था लेकिन शुरूआत में सेतु निगम की टीम ने काम शुरू करने में देरी की। बाद में निर्माण सामग्री महंगी हो जाने की हवाला देते हुए पुरानी लागत से पुल का निर्माण करने से हाथ खड़े कर दिए। अब 45 करोड़ का रिवाइज इस्टीमेट भेजा गया है। इसकी मंजूरी न मिल पाने से करीब तीन महीने से काम ठप पड़ा है।
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‘रामगंगा पुल की एक पिलर पर बियरिंग टूटी हुई है। यह गंभीर मामला है और इससे पुल को गंभीर नुकसान पहुंचता है। इस मामले में तकनीकी मदद के लिए सीआरआरआई रूड़की की टीम को बुलाया गया है।’
- राकेश राजवंशी, चीफ इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी
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बरेली-बदायूं हाईवे पर करीब 680 मीटर लंबे रामगंगा पुल डेढ़ लेन का ही है। काफी पुराना हो चुका यह पुल अब जर्जर भी हो रहा है। दो दिन पहले पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर राकेश राजवंशी पुल का निरीक्षण करने पहुंचे तो वहां बरेली की तरफ से पिलर नंबर दो पर पुल को रोकने के लिए बने लोहे की दो मीटर गोलाई की बियरिंग टूटी मिली। बियरिंग टूटी होने के साथ अपनी जगह से हट भी गई थी। इंजीनियरों का कहना है कि भारी वाहनों के निकलने के दौरान उनके भार को डायवर्ट करने के लिए बियरिंग का अहम रोल होता है। इसके क्षतिग्रस्त होने से पुल में कंपन बंद हो जाता है और पुल के टूटने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके अलावा पुल में कई और जगहों पर भी गंभीर खामियां मिली है। हादसे की आशंका देखते हुए पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर ने रूड़की से सीआरआरआई की टीम को पुल की रिपोर्ट तैयार करने के लिए बुला लिया है। विशेषज्ञों की टीम अध्ययन के बाद इस समस्या के समाधान का हल बताएगी।
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सेतु निगम की लापरवाही से नहीं बन पाया नया पुल
रामगंगा का पुल जर्जर और संकरा होने के कारण सेतु निगम ने 37 करोड़ रुपये की लागत से नए पुल का निर्माण शुरू कराया था। इस पुल का निर्माण अब तक पूरा हो जाना चाहिए था लेकिन शुरूआत में सेतु निगम की टीम ने काम शुरू करने में देरी की। बाद में निर्माण सामग्री महंगी हो जाने की हवाला देते हुए पुरानी लागत से पुल का निर्माण करने से हाथ खड़े कर दिए। अब 45 करोड़ का रिवाइज इस्टीमेट भेजा गया है। इसकी मंजूरी न मिल पाने से करीब तीन महीने से काम ठप पड़ा है।
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‘रामगंगा पुल की एक पिलर पर बियरिंग टूटी हुई है। यह गंभीर मामला है और इससे पुल को गंभीर नुकसान पहुंचता है। इस मामले में तकनीकी मदद के लिए सीआरआरआई रूड़की की टीम को बुलाया गया है।’
- राकेश राजवंशी, चीफ इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी