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प्रशासन के दबाव में जुलूस नहीं निकाला मगर हुजूम के साथ जताया विरोध

Bareily Bureauबरेली ब्यूरो Updated Sun, 22 Dec 2019 06:48 PM IST
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पूरनपुर(पीलीभीत)। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में मुस्लिम समुदाय के व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। अफसरों से वादे के मुताबिक जुलूस तो नहीं निकाला, लेकिन बड़ी संख्या में नूरीनगर व कस्बे में अन्य जगह में इकट्ठा होकर अफसरों को वहां आने के लिए मजबूर कर दिया। डीएम और एसपी ने भी लोगों को आगे न बढ़ने से रोकते हुए खुद ही नूरीनगर जाकर ज्ञापन लिया। पूरे दिन सड़कों पर हुजूम रहने से हड़कंप मचा रहा। हालांकि फोर्स भी काफी संख्या में तैनात करके प्रशासन हर स्थिति से निपटने को तैयार रहा, डीएम-एसपी पूरे दिन कैंप किए रहे।
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बृहस्पतिवार को कस्बे के एक मदरसा में उलेमा की बैठक में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध का निर्णय लिया गया था। इसके तहत शनिवार को जुलूस निकालना तय हुआ था। नगर मुफ्ती मौलाना आमिर रजा ने एसडीएम से जुलूस की अनुमति मांगी थी, मगर नहीं मिली। हालात को भांपते हुए शुक्रवार को डीएम और एसपी ने उलेमा से वार्ता की। इसमें नगर मुफ्ती ने जुलूस की परमीशन न होने पर प्रशासन को जुलूस न निकालने का आश्वासन दिया। मगर इसके बाद भी धरना, प्रदर्शन को लेकर प्रशासन सतर्क रहा। शनिवार विरोध को लेकर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अपने प्रतिष्ठान नहीं खोले। सुबह से अपरान्ह तक कई जगह भीड़ इकट्ठी रही। डीएम, एसपी पूरनपुर देहात के मोहल्ला नूरीनगर में मस्जिद मुस्तफा रजा के समीप पहुंचे। मौलाना शेर मोहम्मद, जाकिर खां के नेतृत्व में एकत्र लोगों ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा।
ब्लाक चौराहा पर हाजी लाडले, तौफीक अहमद कादरी आदि ने, जबकि स्टेशन चौराहा के समीप एकत्र लोगों ने हाजी लियाकत हुसैन के नेतृत्व मेें राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एसडीएम चंद्रभानु सिंह को सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि केंद्र सरकार तानाशाह रवैया अपना रही है। देश में एनआरसी, सीएए कानून लागू किया गया। इससे जनता में रोष है। देश के नागरिकों से नागरिकता का प्रमाण मांगा जा रहा है। एनआरसी से देश का भला नहीं होने वाला है। देश के युवाओं को रोजगार की गारंटी बिल, महिला सुरक्षा गारंटी बिल की जरुरत है। ज्ञापन में एनआरसी, सीएए जैसे कानून को वापस कराने की मांग की गई। विरोध प्रदर्शन को लेकर अफसर और पुलिस प्रशासन अलर्ट रहे।
देहात मेें रखी गई पैनी नजर, तैनात रहे अफसर
नगर के अलावा कहीं देहात में धरना, प्रदर्शन जुलूस न निकले। इसको लेकर प्रशासन अलर्ट रहा। नगर के अलावा गांवों में भी विभिन्न विभाग के अफसरों को लगाया गया था। पुलिस भी सर्किल के गांवों में सतर्क रही।
उलमा, नेता घरों में कैद
शुक्रवार को तहसील सभागार में हुई बैठक में शामिल कुछ नेताओं और उलमा को शनिवार को घरों में कैद कर दिया गया। उनके घरों के बाहर पुलिसकर्मी तैनात रहे। सुबह से अपराह्न तीन बजे तक पुलिस कर्मी इन लोगों के दरवाजे पर पहरा देते रहे।
उलमा पर आम लोग हुए नाराज
बृहस्पतिवार को हुई उलमा की बैठक में विरोध प्रदर्शन को लेकर शनिवार को नगर में जुलूस निकालने का निर्णय लिया गया था। इसकी जानकारी देकर लोगों से भारी संख्या में नगर के साबरी अहाता में एकत्र होने को कहा गया था। शुक्रवार को प्रशासन के साथ हुई बैठक के बाद जुलूस न निकालने का निर्णय लिया गया, इसका एलान शनिवार को मस्जिदों से भी किया गया। इसमें कहा गया कि जुलूस की परमीशन न होने के कारण जुलूस नहीं निकाला जाएगा और लोग साबरी अहाता मेें न एकत्र हो। इसको लेकर आम लोगों ने नाराजगी व्यक्त की। एकत्र हुए लोगों ने समुदाय की राय के बगैर जुलूस न निकालने का निर्णय पर उलमा से इस्तीफा देने की मांग की। जुलूस न निकलने पर उलमा के प्रति लोगों में रोष देखा गया।
सरकारी कार्यालयों में भी पसरा रहा सन्नाटा
शनिवार को इंटरनेट सेवाएं ठप रहीं। जुलूस, धरना प्रदर्शन की आशंका पर देहात से नगर को आने वाले लोगों की संख्या न के बराबर रही। अफसरों की ड्यूटी शांति व्यवस्था में लगी थी। सरकारी कार्यालयों में फरियादी या अन्य कार्यों से पहुंचने वाले लोग काफी कम मात्रा में पहुंचे।
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