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राशन विक्रेता समेत दो की डेंगू से मौत
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पीलीभीत। डेंगू और संक्रामक रोगों से मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा। डेंगू से मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। डेंगू से राशन विक्रेता और एक डाककर्मी की बरेली में इलाज के दौरान मौत हो गई। पूरनपुर में तेज बुखार से आठ माह के बच्चे की मौत हो गई।
शहर के मोहल्ला इनायतगंज होली चौराहा निवासी राशन विक्रेता यशपाल सिंह (50) को कई दिन से बुखार था। स्थानीय डॉक्टरों से इलाज में राहत न मिलने पर परिजनों ने बरेली के अस्पताल में भर्ती कराया। वहां डेंगू के लक्षण मिलने और हालत में सुधार न होने पर दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया। दिल्ली में 20 दिन तक इलाज चला। कोई फायदा नहीं होने पर परिजनों ने पुन: बरेली लाकर अस्पताल में भर्ती कराया। शनिवार सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। न्यूरिया निवासी डाककर्मी सतीश कुमार को भी पहले तेज बुखार आया। हालत बिगड़ने पर उन्हें पहले शहर और फिर उसके बाद बरेली के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां जांच में डेंगू के लक्षण पाए गए। सतीश की शुक्रवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। वह डाक विभाग कानपुर में तैनात थे।
पूरनपुर क्षेत्र में डेंगू और वायरल फीवर का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। सीएचसी पर पिछले एक माह से बुखार पीड़ित मरीेजों की खासी भीड़ लग रही है। फॉगिंग और कीटनाशक दवा के छिड़काव के बाद भी मच्छरों का प्रकोप कम नहीं हो रहा है। इधर मोहल्ला ढका निवासी अफसर के आठ माह के पुत्र अनस को पांच दिन से बुखार आ रहा था। उसका इलाज एक प्राइवेट डॉक्टर से कराया जा रहा था। शनिवार को उसे गंभीर हालत में सीएचसी लाया गया। जहां डॉक्टरों ने इलाज से पहले हीे मृत घोषित कर दिया। इसके अलावा मोहल्ला रजागंज निवासी मुन्ने मियां को बुखार के चलते सीएचसी लाया गया। सीएचसी में हुई जांच में मुन्ने मियां को डेंगू की पुष्टि हुई। मुन्ने मियां के सीरम को जांच को बरेली लैब भेजा गया है।
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न्यूरिया में डाककर्मी की मौत की जानकारी मिलने पर एमओआईसी से जांच करवाई गई। जांच में एनएस वन पॉजिटिव पाया गया। किडनी में संक्रमण से मौत होना पाया गया। अन्य की भी जांच कराई जा रही है।
डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
कैसे मिले डेंगू से निजात, आरआरटी के पास नहीं है वाहन
पीलीभीत। डेंगू और संक्रामक रोगों की सूचना मिलने पर उसकी जांच को तीन सदस्यीय रैपिड रेसपांस टीम (आरआरटी ) तो बना दी गई, लेकिन आज तक टीम को अलग से कोई वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया। सूचना मिलने पर टीम को वाहन की डिमांड करने पर उन्हें वाहन उपलब्ध कराया जा रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग द्वारा डेंगू और संक्रामक रोगों पर रोकथाम की चल रही कवायद बेकार ही साबित हो रही है। इस संबंध में नोडल अधिकारी संक्रामक रोग डॉ. अश्वनी कुमार ने बताया कि जरूरत पड़ने पर टीम को वाहन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
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शहर के मोहल्ला इनायतगंज होली चौराहा निवासी राशन विक्रेता यशपाल सिंह (50) को कई दिन से बुखार था। स्थानीय डॉक्टरों से इलाज में राहत न मिलने पर परिजनों ने बरेली के अस्पताल में भर्ती कराया। वहां डेंगू के लक्षण मिलने और हालत में सुधार न होने पर दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया। दिल्ली में 20 दिन तक इलाज चला। कोई फायदा नहीं होने पर परिजनों ने पुन: बरेली लाकर अस्पताल में भर्ती कराया। शनिवार सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। न्यूरिया निवासी डाककर्मी सतीश कुमार को भी पहले तेज बुखार आया। हालत बिगड़ने पर उन्हें पहले शहर और फिर उसके बाद बरेली के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां जांच में डेंगू के लक्षण पाए गए। सतीश की शुक्रवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। वह डाक विभाग कानपुर में तैनात थे।
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पूरनपुर क्षेत्र में डेंगू और वायरल फीवर का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। सीएचसी पर पिछले एक माह से बुखार पीड़ित मरीेजों की खासी भीड़ लग रही है। फॉगिंग और कीटनाशक दवा के छिड़काव के बाद भी मच्छरों का प्रकोप कम नहीं हो रहा है। इधर मोहल्ला ढका निवासी अफसर के आठ माह के पुत्र अनस को पांच दिन से बुखार आ रहा था। उसका इलाज एक प्राइवेट डॉक्टर से कराया जा रहा था। शनिवार को उसे गंभीर हालत में सीएचसी लाया गया। जहां डॉक्टरों ने इलाज से पहले हीे मृत घोषित कर दिया। इसके अलावा मोहल्ला रजागंज निवासी मुन्ने मियां को बुखार के चलते सीएचसी लाया गया। सीएचसी में हुई जांच में मुन्ने मियां को डेंगू की पुष्टि हुई। मुन्ने मियां के सीरम को जांच को बरेली लैब भेजा गया है।
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न्यूरिया में डाककर्मी की मौत की जानकारी मिलने पर एमओआईसी से जांच करवाई गई। जांच में एनएस वन पॉजिटिव पाया गया। किडनी में संक्रमण से मौत होना पाया गया। अन्य की भी जांच कराई जा रही है।
डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
कैसे मिले डेंगू से निजात, आरआरटी के पास नहीं है वाहन
पीलीभीत। डेंगू और संक्रामक रोगों की सूचना मिलने पर उसकी जांच को तीन सदस्यीय रैपिड रेसपांस टीम (आरआरटी ) तो बना दी गई, लेकिन आज तक टीम को अलग से कोई वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया। सूचना मिलने पर टीम को वाहन की डिमांड करने पर उन्हें वाहन उपलब्ध कराया जा रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग द्वारा डेंगू और संक्रामक रोगों पर रोकथाम की चल रही कवायद बेकार ही साबित हो रही है। इस संबंध में नोडल अधिकारी संक्रामक रोग डॉ. अश्वनी कुमार ने बताया कि जरूरत पड़ने पर टीम को वाहन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।