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डीएम ने मेडिकल कॉलेज के लिए देखी नई जमीन
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पच्चीस करोड़ की लागत से बनने वाला मेडिकल कॉलेज अब ललौरीखेड़ा में नहीं बन सकेगा। प्रशासन ने किन्ही कारणों के चलते उक्त भूमि का चयन निरस्त कर दिया। इधर डीएम ने प्रशासनिक अमले के साथ ड्रमंड कॉलेज में भूमि की तलाश की।
शासन द्वारा जिले में मेडिकल कॉलेज बनाने को कैबिनेट में मंजूरी मिल चुकी है। पूर्व में प्रमुख सचिव ने मेडिकल कॉलेज के लिए डीएम से प्रस्ताव मांगा था। जिस पर डीएम वैभव श्रीवास्तव ने पीलीभीत-बरेली रोड पर शाही में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज के लिए करीब 17 एकड़ जमीन का चयन कर रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। करीब दो माह पूर्व इस प्रस्ताव को मंजूरी देने के साथ शासन से पहली किस्त के रूप में 14 लाख की पहली किश्त भी जारी कर दी, लेकिन उक्त भूमि विवादित निकाली। इसके बाद ललौरीखेडा में करीब 12 एकड़ भूमि का चयन किया गया। जिसका प्रस्ताव बनाकर राजस्व परिषद को भेज दिया गया। जिला प्रशासन के मुताबिक ललौरीखेड़ा की भूमि भी किन्ही कारणों से उपयुक्त नहीं पाई गई है। लिहाजा अब दूसरे विकल्प की तलाश की जा रही है। इधर शुक्रवार को डीएम ने प्रशासनिक अमले के साथ ड्रमंड कॉलेज पहुंचकर परिसर में घूमकर प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज के लिए भूमि की तलाश की। उनके साथ एडीएम देवेंद्र मिश्रा, एसडीएम सदर वंदना श्रीवास्तव आदि अधिकारी मौजूद रहे।
जमीन गई तो खत्म हो जाएगी कृषि की मान्यता
डीएम वैभव श्रीवास्तव जब ड्रमंड कॉलेज में भूमि देखकर वापस लौटे तो कॉलेज के कृषि संकाय के शिक्षक ने डीएम को बताया कि कॉलेज में कृषि संकाय में करीब 600 विद्यार्थी है। यदि यह भूमि मेडिकल कॉलेज को दे दी गई तो कॉलेज से कृषि विषय की मान्यता समाप्त हो जाएगी। हालांकि डीएम ने यह बात सुनकर आगे बढ़ गए।
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किन्हीं कारणों से ललौरीखेड़ा मेें चिन्ह्ति की गई भूमि को निरस्त कर दिया गया है। अब अन्य स्थानों पर सुरक्षित भूमि की तलाश शुय कर दी गई है।
वैभव श्रीवास्तव, डीएम
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शासन द्वारा जिले में मेडिकल कॉलेज बनाने को कैबिनेट में मंजूरी मिल चुकी है। पूर्व में प्रमुख सचिव ने मेडिकल कॉलेज के लिए डीएम से प्रस्ताव मांगा था। जिस पर डीएम वैभव श्रीवास्तव ने पीलीभीत-बरेली रोड पर शाही में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज के लिए करीब 17 एकड़ जमीन का चयन कर रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। करीब दो माह पूर्व इस प्रस्ताव को मंजूरी देने के साथ शासन से पहली किस्त के रूप में 14 लाख की पहली किश्त भी जारी कर दी, लेकिन उक्त भूमि विवादित निकाली। इसके बाद ललौरीखेडा में करीब 12 एकड़ भूमि का चयन किया गया। जिसका प्रस्ताव बनाकर राजस्व परिषद को भेज दिया गया। जिला प्रशासन के मुताबिक ललौरीखेड़ा की भूमि भी किन्ही कारणों से उपयुक्त नहीं पाई गई है। लिहाजा अब दूसरे विकल्प की तलाश की जा रही है। इधर शुक्रवार को डीएम ने प्रशासनिक अमले के साथ ड्रमंड कॉलेज पहुंचकर परिसर में घूमकर प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज के लिए भूमि की तलाश की। उनके साथ एडीएम देवेंद्र मिश्रा, एसडीएम सदर वंदना श्रीवास्तव आदि अधिकारी मौजूद रहे।
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जमीन गई तो खत्म हो जाएगी कृषि की मान्यता
डीएम वैभव श्रीवास्तव जब ड्रमंड कॉलेज में भूमि देखकर वापस लौटे तो कॉलेज के कृषि संकाय के शिक्षक ने डीएम को बताया कि कॉलेज में कृषि संकाय में करीब 600 विद्यार्थी है। यदि यह भूमि मेडिकल कॉलेज को दे दी गई तो कॉलेज से कृषि विषय की मान्यता समाप्त हो जाएगी। हालांकि डीएम ने यह बात सुनकर आगे बढ़ गए।
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किन्हीं कारणों से ललौरीखेड़ा मेें चिन्ह्ति की गई भूमि को निरस्त कर दिया गया है। अब अन्य स्थानों पर सुरक्षित भूमि की तलाश शुय कर दी गई है।
वैभव श्रीवास्तव, डीएम