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Bareilly News: रैबीज नियंत्रण के लिए तैयार होगी ओरल वैक्सीन

Tue, 02 Apr 2024 02:27 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 02 Apr 2024 02:27 AM IST
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Oral vaccine will be ready to control rabies
बरेली। जंगली पशुओं का रैबीज टीकाकरण मुश्किल है। ओरल वैक्सीन ही इसका विकल्प है। इसके लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान जल्द यूएसए की यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन के साथ करार करेगा। वैज्ञानिक यूएसए जाकर वैक्सीन विकास के लिए कार्य करेंगे।
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आईवीआरआई निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त के मुताबिक मनुष्यों को लाइलाज रैबीज बीमारी से बचाने के लिए पशुओं का टीकाकरण जरूरी है। पालतू पशुओं का टीकाकरण संभव है पर आवारा कुत्तों, बिल्ली, बंदर सहित जंगली जानवरों का टीकाकरण मुमकिन नहीं है। वहीं, चंद पशुओं के टीकाकरण से रैबीज से मुक्ति संभव नहीं। इसके लिए बड़े पैमाने पर टीकाकरण की जरूरत है। ऐसे में ओरल वैक्सीन ही बेहतर विकल्प है जो किसी पदार्थ में मिलाकर खिलाई जा सके। यह प्रकिया सफल होगी। वर्ष 2030 तक देश रैबीज से मुक्त हो सकता है।
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डॉ. दत्त के मुताबिक भारत में प्रतिवर्ष करीब 20 हजार लोगों की मौत रैबीज से हो रही है। ओरल वैक्सीन पर शोध के लिए आईवीआरआई के वैज्ञानिक डॉ. एम स्वामीनाथन आईसीएमआर की फेलोशिप पर एक वर्ष के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन की मेडिसिन विभाग की लैब में भेजे जाएंगे।
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रैबीज नित्रयंण के लिए ग्लोबल हेल्थ इंस्टीट्यूट, स्कूल ऑफ वेटरनरी मेडिसिन, यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन यूएसए के मेडिसिन विभाग के निदेशक डॉ. जॉर्ज ई. ओसोरियो आईवीआरआई पहुंचे। आईवीआरआई परिसर का भ्रमण कर वैज्ञानिकों के साथ बैठक की। रैबीज की ओरल वैक्सीन के अलावा अफ्रीकन स्वाइन फीवर, एवियन इंफ्लुएंजा, निपाह वायरस की भी ओरल वैक्सीन विकसित करने की संभावना जताई।

संयुक्त निदेशक कैडराड डॉ. केपी सिंह ने बताया कि डॉ. जॉर्ज दिल्ली में भारतीय आर्युविज्ञान अनुसंधान परिषद के महानिदेशक, स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव से समग्र स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत रैबीज नियंत्रण के लिए ओरल वैक्सीन के भारत में प्रयोग की संभावना और शोध पर वार्ता करेंगे।


संयुक्त निदेशक शोध डॉ. एसके सिंह, संयुक्त निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. रूपसी तिवारी, संयुक्त निदेशक शैक्षणिक डॉ. एसके मेंदीरत्ता, प्रभारी पीएमई सेल डॉ. जी साईं कुमार समेत वैज्ञानिक डाॅ. फिरदौस, डाॅ. आरवीएस पव्वैया, डॉ. रविकांत अग्रवाल, डॉ. प्रणव धर, डॉ. प्रिमांशु दंडपत, डॉ. पी मदन मोहन, डॉ. एम पावड़े, डॉ. एस दंडपत, डॉ. हिमानी धांजे, डाॅ. पल्लव चौधरी व अन्य मौजूद रहे।
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