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Bareilly News: तीन सौ बेड की ओपीडी बढ़ा रही मरीजों का दर्द
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बरेली। इलाज की बेहतर सुविधा मुहैया कराने के लिए संचालित तीन सौ बेड ओपीडी मरीजों का दर्द बढ़ा रही है। दोनों फिजिशियन के मेडिकल लीव पर जाने से ओपीडी में सन्नाटा है। मरीजों की संख्या घटकर चार सौ पर टिकी है। एआरवी क्लीनिक प्रभारी ही मरीजों को देख रहे हैं।
जाम से गुजरकर जिला अस्पताल पहुंचने और लंबी कतार से राहत दिलाने के लिए तीन सौ बेड अस्पताल में ओपीडी दो वर्ष पूर्व शुरू हुई। आधी अधूरी व्यवस्था के साथ शुरू हुई ओपीडी में अब तक चिकित्सकों की कमी बरकरार है। बीते दिनों इंटर्न पर पहुंचे जूनियर डॉक्टर ने ओपीडी को कुछ हद तक संभाला। उनकी वापसी के बाद हालत जस की तस है। अस्पताल में अब दो फिजिशियन, एक-एक त्वचा रोग, नेत्र रोग, दंत रोग विशेषज्ञ की तैनाती है, लेकिन फिजिशियन डॉ. विवेक और डॉ. सतीश चंद्रा के मेडिकल लीव पर होने से मरीज भटकने को विवश हैं।
ऐसे में एंटी रैबीज क्लीनिक प्रभारी डॉ. फैसल को मेडिसिन ओपीडी का भी जिम्मा भी दिया है। लिहाजा, कुछ मरीजों को तो वे देख रहे हैं लेकिन ज्यादातर समय ओपीडी कक्ष खाली रहता है। शनिवार दोपहर एक बजे डॉक्टर कुर्सी से उठ गए। जो मरीज पहुंचे, वे खाली कुर्सी देखकर लौट गए।
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सामान्य दिनों से करीब तीन सौ कम पहुंचे मरीज
सर्दियों के चलते ज्यादातर मरीज सर्दी, बुखार, खांसी, त्वचा रोग, पेट में दर्द, मरोड़ और दस्त के आ रहे थे। इधर, डॉक्टरों के अवकाश पर होने से सामान्य दिनों के सापेक्ष ओपीडी में तीन सौ मरीज कम पहुंचे। मेडिसिन ओपीडी 70 मरीजों की रही। जबकि एआरवी क्लीनिक पर करीब 250 लोगों को टीका लगा। शेष मरीज नेत्र रोगों के रहे। जिनकी जांच के बाद दवाएं और ऑपरेशन का सुझाव दिया।
त्वचा रोग ओपीडी बंद, मरीज जिला अस्पताल रेफर
इंटर्न डॉक्टरों की वापसी से तीन सौ बेड अस्पताल में संचालित त्वचा रोग ओपीडी ठप हो गई है। मरीजों को जिला अस्पताल भेजा जा रहा है। वहीं, जिला अस्पताल में भी त्वचा रोग विशेषज्ञ न होने की वजह से मरीजों को फिजिशियन देख रहे हैं। बता दें कि करीब साल भर पहले त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. त्रिभुवन प्रसाद के प्रोन्नति के बाद से जिला अस्पताल में त्वचा रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हुई।
वर्जन
दो फिजिशियन के अवकाश पर जाने से मरीजों को देखने के लिए एआरवी प्रभारी को जिम्मेदारी दी गई है। त्वचा रोग विशेषज्ञ न होने से अब मरीज नहीं देखे जा रहे। इससे मरीज घटे हैं। नेत्र, दंत रोग ओपीडी और बच्चों का टीकाकरण हो रहा है। - डॉ. इंतजार हुसैन, सीएमएस
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जाम से गुजरकर जिला अस्पताल पहुंचने और लंबी कतार से राहत दिलाने के लिए तीन सौ बेड अस्पताल में ओपीडी दो वर्ष पूर्व शुरू हुई। आधी अधूरी व्यवस्था के साथ शुरू हुई ओपीडी में अब तक चिकित्सकों की कमी बरकरार है। बीते दिनों इंटर्न पर पहुंचे जूनियर डॉक्टर ने ओपीडी को कुछ हद तक संभाला। उनकी वापसी के बाद हालत जस की तस है। अस्पताल में अब दो फिजिशियन, एक-एक त्वचा रोग, नेत्र रोग, दंत रोग विशेषज्ञ की तैनाती है, लेकिन फिजिशियन डॉ. विवेक और डॉ. सतीश चंद्रा के मेडिकल लीव पर होने से मरीज भटकने को विवश हैं।
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ऐसे में एंटी रैबीज क्लीनिक प्रभारी डॉ. फैसल को मेडिसिन ओपीडी का भी जिम्मा भी दिया है। लिहाजा, कुछ मरीजों को तो वे देख रहे हैं लेकिन ज्यादातर समय ओपीडी कक्ष खाली रहता है। शनिवार दोपहर एक बजे डॉक्टर कुर्सी से उठ गए। जो मरीज पहुंचे, वे खाली कुर्सी देखकर लौट गए।
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सामान्य दिनों से करीब तीन सौ कम पहुंचे मरीज
सर्दियों के चलते ज्यादातर मरीज सर्दी, बुखार, खांसी, त्वचा रोग, पेट में दर्द, मरोड़ और दस्त के आ रहे थे। इधर, डॉक्टरों के अवकाश पर होने से सामान्य दिनों के सापेक्ष ओपीडी में तीन सौ मरीज कम पहुंचे। मेडिसिन ओपीडी 70 मरीजों की रही। जबकि एआरवी क्लीनिक पर करीब 250 लोगों को टीका लगा। शेष मरीज नेत्र रोगों के रहे। जिनकी जांच के बाद दवाएं और ऑपरेशन का सुझाव दिया।
त्वचा रोग ओपीडी बंद, मरीज जिला अस्पताल रेफर
इंटर्न डॉक्टरों की वापसी से तीन सौ बेड अस्पताल में संचालित त्वचा रोग ओपीडी ठप हो गई है। मरीजों को जिला अस्पताल भेजा जा रहा है। वहीं, जिला अस्पताल में भी त्वचा रोग विशेषज्ञ न होने की वजह से मरीजों को फिजिशियन देख रहे हैं। बता दें कि करीब साल भर पहले त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. त्रिभुवन प्रसाद के प्रोन्नति के बाद से जिला अस्पताल में त्वचा रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हुई।
वर्जन
दो फिजिशियन के अवकाश पर जाने से मरीजों को देखने के लिए एआरवी प्रभारी को जिम्मेदारी दी गई है। त्वचा रोग विशेषज्ञ न होने से अब मरीज नहीं देखे जा रहे। इससे मरीज घटे हैं। नेत्र, दंत रोग ओपीडी और बच्चों का टीकाकरण हो रहा है। - डॉ. इंतजार हुसैन, सीएमएस