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UP News: बरेली नगर निगम में ताक पर नियम, चहेतों को भुगतान कर 100 करोड़ रुपये का किया घपला

Wed, 30 Jul 2025 02:46 PM IST
मुकेश कुमार निर्मल पांडेय, संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
निर्मल पांडेय, संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 30 Jul 2025 02:46 PM IST
सार

बरेली नगर निगम के आय-व्यय के तीन वर्ष के ऑडिट में 171 करोड़ रुपये के हिसाब-किताब पर सवाल खड़े किए गए हैं। इसमें से करीब सौ करोड़ रुपये  का भुगतान अनियमित खर्चों से जुड़ा है।

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one hundred crore rupees scam exposed in audit report of Bareilly Nagar Nigam
नगर निगम बरेली - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली नगर निगम में नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को भुगतान किया गया। तीन वर्षों के ऑडिट में सौ करोड़ रुपये से अधिक का घपला सामने आया है। कई मामलों में अनियमित रूप से धन का व्यय दिखाया गया है। स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग के ऑडिट की आपत्तियों पर जवाब देने के बजाय जिम्मेदार लीपापोती में जुट गए हैं।वर्ष 2020-21 में हुए ऑडिट में 36 मामलों में 63.73 करोड़ रुपये की अनियमितता सामने आई। 

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वर्ष 2021-22 में निगम के आय-व्यय का फिर ऑडिट हुआ तो उसमें 26 मामलों में 25.46 करोड़ रुपये की हेराफेरी एवं नियम विरुद्ध भुगतान पाया गया। मामला यहीं नहीं थमा। वर्ष 2022-23 के ऑडिट में 22 मामलों में 82.14 करोड़ रुपये से संबंधित गड़बड़ियां सामने आईं। 
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ऑडिटरों ने तीन वर्ष के ऑडिट में 171 करोड़ रुपये के हिसाब-किताब पर सवाल खड़े किए हैं। इसमें से करीब सौ करोड़ रुपये का भुगतान अनियमित खर्चों से जुड़ा है। इन आपत्तियों पर नगर निगम के जिम्मेदार कुंडली मारे बैठे हैं। विभिन्न मदों से प्राप्त अनुदान व अन्य शासकीय धनराशि को गलत तरह से क्यों खर्च किया गया? लेखा परीक्षा विभाग को इस सवाल का जवाब अब तक नहीं दिया है। यह हाल तब है, जबकि इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने के लिए लेखा परीक्षा विभाग के उप निदेशक स्तर से नगर निगम को कई पत्र लिखे जा चुके हैं। 

डीजल खरीद और विज्ञापन ठेके में भी करोड़ों की हेराफेरी
वर्ष 2021-22 की ऑडिट रिपोर्ट में विज्ञापन एजेंसियों से बकाया नहीं वसूलने से निगम को 86.94 लाख रुपये की क्षति का उल्लेख है। अमृत योजना में वर्ष 2015-16 और 2016-17 के कार्यों को पांच-छह वर्ष बाद भी पूरा नहीं किया गया। इससे जो 1.62 करोड़ रुपये खर्च हुए, उसे ऑडिटरों ने निष्फल बताया। ऑडिट रिपोर्ट से पता चला कि वर्ष 2021-22 में वाहनों के डीजल पर 7.29 करोड़ का खर्च दिखाया, लेकिन ऑडिट टीम को लॉग बुक नहीं दिखाईं। 

डीजल पर बजट अनुमान से 1.33 करोड़ रुपये अधिक खर्च दिखाया है। वर्ष 2022-23 की ऑडिट रिपोर्ट में निगम निधि को 54.58 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति की आशंका जताई गई है। स्वास्थ्य एवं सफाई अनुभाग में नियोजित वाहनों की लॉग बुक न दिखाने और डीजल आपूर्ति के 8.82 करोड़ रुपये का हिसाब न देने की बात कही गई है। विज्ञापन ठेका मामले में स्टांप न लगाने से 22.36 लाख रुपये की राजस्व हानि बताई गई है। 

मूल इनवॉइस के बिना ठेकेदार को दिए 37.62 लाख
वर्ष 2022-23 के ऑडिट में पाया गया कि वार्ड-52 में बानखाना में मुख्य मार्ग के अधूरे निर्माण पर 45 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया, जो अलाभकारी साबित हुआ। 15वें वित्त आयोग से प्राप्त धन से एलईडी स्ट्रीट लाइटों की आपूर्ति में अनियमित रूप से अधिष्ठापन चार्ज जोड़ दिया। फिर 12.08 लाख का अधिक एवं अनियमित भुगतान किया है। बिटुमिन खरीद में बिल के साथ ऑयल रिफाइनरी के मूल इनवाॅइस के बिना ही कार्यदायी संस्था अग्रवाल कांट्रैक्टर्स को 37.62 लाख रुपये दिए गए। वर्ष 2020-21 के ऑडिट में अवैध नियुक्ति के सापेक्ष अनियमित एवं आपत्तिजनक वेतन-भत्ते के रूप में 33.33 लाख के भुगतान का उल्लेख है।

जेम पोर्टल दरकिनार कर ठेकेदार को 13.50 करोड़ रुपये का भुगतान
वर्ष 2022-23 में निगम के अधिकारियों ने ठेका कर्मियों के नाम पर जमकर खेल किया है। रिपोर्ट में ऑडिटरों ने टिप्पणी की है कि शासनादेश को दरकिनार कर आउटसोर्सिंग कर्मियों की तैनाती की गई। जेम पोर्टल को दरकिनार कर ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया गया है। इन ठेकेदारों को 13.50 करोड़ रुपये दिए हैं।

नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि ऑडिट नियमित प्रक्रिया है। मौके पर दस्तावेज प्रस्तुत नहीं होने पर आपत्ति लग जाती है। बाद में साक्ष्य प्रस्तुत कर आपत्ति समाप्त करा ली जाती है। इसमें कोई अनियमितता नहीं है। उस बीच में जो लॉग बुक उपलब्ध नहीं हो सकीं, उन्हें उपलब्ध करा दिया जाएगा। जिन कर्मियों के वेतन के साथ अधिक भुगतान हो गया है, उनसे रिकवरी या पेंशन से कटौती कर ली जाएगी। 

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मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने बताया कि ऑडिट आपत्तियों पर साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए संबंधित विभाग को मौका मिलता है। यदि उसके बाद भी इन लोगों ने साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए हैं तो इस मामले को देखेंगे और अभियान चलाकर निस्तारण कराएंगे। गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई भी की जाएगी।

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