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कभी साल भर में जलती थीं दो-चार चिताएं, अब हर रोज उठ रही हैं इतनी अर्थियां

Wed, 12 May 2021 01:47 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 12 May 2021 01:47 AM IST
सार

गांवों में मौत और मातम का दौर
 

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Once in a year, two-four pyre were burning, now everyday it is getting so many meanings
गांव में जलती चिता। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

विस्तार

हफ्ते भर में सैकड़ों तोड़ हैं चुके दम, ज्यादातर में थे कोरोना से मिलते-जुलते लक्षण

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बरेली। पंचायत चुनाव के बाद लगातार मौतों से गांव संभल नहीं पा रहे हैं। जिन गांवों में साल में बमुश्किल एक-दो मौतें होती थीं वहां अब मंजर यह है कि हर रोज चिताएं जल रहीं है। कई गांवों में अंतिम संस्कार करने की जगह नहीं बची है इसलिए वहां चिताएं जलाने के लिए नए श्मशान बनाए जा रहे हैं।
अधिकतर गांवों में लोग बीमार हैं। जिनमें कोरोना से मिलते-जुलते लक्षण हैं, वे भी झोलाछापों से ही इलाज करा रहे हैं क्योंकि सरकारी अस्पतालों की ओपीडी लगभग बंद हैं। हालत गंभीर होने पर कुछ लोग शहर की तरफ दौड़ते हैं और कुछ गांव में ही दम तोड़ देते हैं। दूसरा प्रमुख कारण यह है कि इस बार सरकारी इंतजाम न्यूनतम हैं। न संदिग्ध लोगों को क्वारंटीन कराया जा रहा है न कहीं शेल्टर होम बनाया गया है। संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की जांच भी नहीं की जा रही है। गांव-गांव से जो खबरें मिली हैं, उनके मुताबिक पिछले एक हफ्ते में ही जिले भर में सैकड़ों ऐसे लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें कोरोना से मिलते-जुलते लक्षण थे।
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आंवला के नगरिया सतन में दस दिन में ही 12 मौतें

आंवला से सटे ब्लॉक मझगवां की ग्राम पंचायत नगरिया सतन में 10 दिनों में ही 12 लोगों की मौत हो चुकी हैं। गांव के लोगों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति बेहद गुस्सा है। ग्रामीणों के मुताबिक दस दिन के अंदर गांव के पाती, रमेश की मां, कैलाश हलवाई, रामलाल और उनकी पत्नी सरवती, रूबी पाल, मीरा देवी, चिंकी देवी, नन्हे, सत्यपाल सिंह और राजबहादुर सिंह की मौत हुई है। इन सभी को बुखार के साथ सांस लेने में दिक्कत थी। मोहब्बतगंज गौंटिया के नफीस, रजनी, कैलाश हलवाई की मौत तो 24 घंटे के अंदर हो गई। इनके परिजन का कहना है कि बुखार और सांस लेने की दिक्कत होने के बाद इतना भी समय नहीं मिला कि उन्हें डॉक्टर के पास ले जा पाते। गांव में लगातार मौतों पर ग्राम प्रधान गुड्डी देवी ने कहा कि उन्होंने एएनएम से अफसरों तक यह बात पहुंचाने को कहा है कि गांव के हर घर में जांच कर बीमारों का इलाज उपचार कराया जाए।
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दुनका में लगातार मौतों से ग्रामीणों में दहशत

मीरगंज तहसील के कस्बा दुनका में भी कई दिनों से लगातार लोग दम तोड़ रहे हैं। आधा दर्जन गांवों में दर्जन भर से ज्यादा लोग एक हफ्ते के अंदर जान गवां चुके हैं। इन मृतकों में दुनका के काबिल की 60 वर्षीय पत्नी राबिया, मुस्तफा बेग की 50 वर्षीय पत्नी मोबीन, 60 वर्षीय फातमा और रघुवर दयाल गुप्ता की मौत हो चुकी है। इसके अलावा बसई गांव के होरीलाल (60), हरप्यारी (50), भजन लाल (65), बड़ी (60) की जान जा चुकी है। गनेशपुर गांव में सात मई को एक ही दिन में दो की मौत हो गई थी। गांव सीहोर में एक सप्ताह में सुनीता (50), धनीराम (55), भगवानदास (60), ओमप्रकाश (56), झुंडे लाल (60), टिकोली देवी (58) की मौत हो चुकी है, यहां दर्जनों और लोग बीमार हैं। गांव वाले बताते हैं कि इन सभी में कोरोना जैसे लक्षण थे। लगातार मौतों से उनमें प्रशासन के प्रति बेहद गुस्सा है।

सेंथल में 15 दिन के अंदर बीस से ज्यादा मौत

नवाबगंज के सेंथल कस्बे में भी लगातार मौतें हो रहीं हैं। एक दिन में हुईं छह मौतों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की कोई टीम यहां जांच करने नहीं पहुंची। कस्बे में 15 दिन के अंदर 20 से अधिक लोग दम तोड़ चुके हैं। इसमें 26 अप्रैल को तीन और 27 को छह लोगों की मौत हुई थी। रोज ही किसी न किसी के मरने की खबर से लोग चिंता में हैं। कस्बे के लोगों के मुताबिक सभी मरने वालों में बुखार, खांसी और सांस लेने में दिक्कत जैसे एक समान लक्षण थे।

फतेहगंज पूर्वी में भी मौतों का सिलसिला जारी

फरीदपुर तहसील के कस्बे फतेहगंज पूर्वी में भी चार दिन से लगातार मौतें होने से लोगों में दहशत है। गांव रमपुरा के फार्मर परमजीत सिंह कुछ दिन पहले गुरुद्वारे गए थे। रविवार रात उनकी मौत गई। इससे एक दिन पहले अंकित पाठक की मौत हुई थी। गांव लखनपुर की विद्या देवी की भी मौत हो गई थी। तीन दिन पहले ही गांव शिवपुरी में कृषि फार्म के बलबीर सिंह, एक पखवाड़े में ही गांव निवड़िया में पांच लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं ग्राम बिलपुर में भी पांच दिन पहले एक महिला रूपा पत्नी छोटेलाल की मृत्यु हो चुकी है।
गांवों में जांच न होने और संदिग्ध संक्रमितों की मौत की सूचना मिली है। सभी सीएचसी प्रभारी को गांवों में सघन जांच के निर्देश दिए हैं। मौतों का ऑडिट भी किया जाएगा जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. सुधीर गर्ग, सीएमओ

भाजपा नेता बोले- गांवों में चिकित्सा सुविधाएं नहीं

गांव में जांचें न के बराबर हो रही है। इसको लेकर सीएमओ से बात की गई है। जीवन बचाने के सभी सार्थक प्रयास सरकार कर रही है। सरकारी अस्पताल को कोविड अस्पताल बनाने की मांग के लिए एक पत्र मुख्यमंत्री और डीएम को भेजा है। - सरदार जैल सिंह, सांसद वरुण गांधी प्रतिनिधि
सरकार से मांग की है कि तहसील स्तर पर एक कोविड अस्पताल की स्थापना की जाए, जिससे लोगों को समय पर उपचार मिल सके। साथ ही जो निजी अस्पतालों में कोविड वार्ड बनाए जाएं और सीएचसी में ऑक्सीजन उपलब्ध कराई जाए। - नीरेंद्र सिंह राठौर, जिला उपाध्यक्ष भाजपा
सीएमओ से बात करके गांवों के प्रत्येक घर में बीमार लोगों की जांच कराई जाएगी और पीड़ित लोगों की हर संभव सहायता करने का प्रयास किया जाएगा। वीर सिंह पाल, भाजपा आंवला जिलाध्यक्ष


सरकार पीड़ितों के लिए प्रयास कर रही है लेकिन स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारी और कर्मचारी लापरवाही बरत रहे हैं। ऐसे लोगों को चिह्नित कर कार्रवाई कराई जाएगी। - मुन्नु गंगवार, जिला कार्य समिति सदस्य भाजपा

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