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बरेली: सोते रहे अफसर, हाथ से निकल गई रबर फैक्टरी, कागजी खानापूर्ती में वक्त काटते रहे अधिकारी

Mon, 14 Dec 2020 02:51 PM IST
प्राची प्रियम संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: प्राची प्रियम Updated Mon, 14 Dec 2020 02:51 PM IST
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Officials ignored governments order do not appear before bombay high court in rubber factory case
रबर फैक्टरी - फोटो : अमर उजाला

रबर फैक्टरी के लिए राज्य सरकार ने जिन शर्तों पर जमीन दी थी, उनके मुताबिक फैक्टरी बंद होने के बाद जमीन पर फिर राज्य सरकार का स्वामित्व स्थापित होना चाहिए था लेकिन फिर भी यह जमीन सरकार के हाथों से आखिर निकल ही गई। 

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21 साल पहले फैक्टरी बंद होने के बाद अब तक सरकार का नीचे से ऊपर तक का तंत्र सोता रहा। अदालत में पैरवी के बजाय कागजी खानापूर्ती से काम चलाया गया। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक सोमवार तक फैक्टरी की जमीन के साथ सारी संपत्तियों को अल केमिस्ट कंपनी के सुपुर्द किया जाना है। इससे ऐन पहले प्रशासन ने यह भी साफ कर दिया कि रबर फैक्टरी प्रकरण से उसका कोई लेना-देना नहीं है।
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सरकार की मंशा रबर फैक्टरी की जमीन को दोबारा अपने स्वामित्व में लेकर उसे औद्योगिक तौर पर विकसित करने की थी लेकिन फिर भी अफसरों ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई। दो महीने पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैक्टरी की जमीन और संपत्तियों को निजी कंपनी अल केमिस्ट को सौंपने का आदेश दिया, उसके बाद भी अफसर नहीं जागे। 
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शासन और प्रशासन की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट में पक्ष रखने तक कोई नहीं पहुंचा। तीन महीने पहले राज्य सरकार की ओर से रबर फैक्टरी की जमीन को अपने स्वामित्व में लेने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए विशेष सचिव मुथुकुमार स्वामी को नोडल अधिकारी नामित किया था, लेकिन मुथुकुमार ने इस प्रकरण की कानूनी स्थिति जानने तक में दिलचस्पी नहीं दिखाई। 

अब बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक सोमवार को रबर फैक्टरी की जमीन समेत सारी संपत्तियां अल केमिस्ट कंपनी के सुपुर्द किए जाने की समय सीमा का आखिरी दिन है। माना जा रहा है कि इसके बाद राज्य सरकार की ओर से इस मामले में कानूनी तौर पर पैरवी का रास्ता बंद भले न हो, लेकिन और मुश्किल हो जाएगा।

संतोष गंगवार नाराज, मुख्यमंत्री को लिखा- अफसरों पर कार्रवाई करें
शासन के आदेश के बावजूद विशेष सचिव मुथुकुमार स्वामी की ओर से इस प्रकरण में कोई पैरवी न करने का संज्ञान मुख्यमंत्री कार्यालय ने लिया है। केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर रब फैक्टरी प्रकरण में लापरवाही दिखाने वाले अफसरों पर कार्रवाई की सिफारिश की है। उन्होंने इस बारे में यूपीसीडा, कमिश्नर और डीएम को भी पत्र लिखा है। उधर, अल केमिस्ट कंपनी फैक्टरी की संपत्ति पर कब्जा लेने के लिए लगातार दबाव बनाए हुए है। 

प्रशासन ने किया किनारा, कहा- रबर फैक्टरी प्रकरण से कोई लेनादेना नहीं

रविवार को अमर उजाला से बातचीत में मंडलायुक्त रणवीर प्रसाद ने साफ किया कि रबर फैक्टरी प्रकरण से प्रशासन का कोई संबंध नहीं है। यह पूरी तरह कंपनी का आंतरिक मामला है। उधर, केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार का कहना है कि पूरा प्रकरण प्रशासन से ही संबंधित है। 

फैक्टरी पर कब्जा लेने के लिए यूपीसीडा को नोडल बनाया गया था। अब भी यूपीसीडा ही नोडल है। शासन ने बैठक कर जब यह जिम्मेदारी सौंपी थी तक मंडलायुक्त रणवीर प्रसाद ही यूपीसीडा में प्रबंध निदेशक थे। 

प्रशासन अब तक इस मामले में गंभीर नहीं है जबकि यह साफ है कि रबर फैक्टरी की 14 सौ एकड़ से ज्यादा जमीन हाथ से निकलने पर बरेली जिले का बड़ा नुकसान होगा और इस जमीन पर इंडस्ट्रियल हब बनाने की योजना भी धरी रह जाएगी।

पहले हमारे 270 करोड़ का भुगतान करे कंपनी, फिर कब्जा लेने आए
उधर अल केमिस्ट कंपनी को रबर फैक्टरी की जमीन पर कब्जा दिए जाने की सूचना पर रविवार को फैक्टरी के तमाम पूर्व श्रमिक फैक्टरी गेट पर पहुंचकर धरने पर बैठ गए। पूर्व श्रमिकों ने घोषणा की कि उनके बकाया 270 करोड़ रुपये मिलने तक वे जमीन पर कब्जा नहीं होने देंगे। 

रविवार सुबह 9 बजे रबर फैक्टरी गेट पर पहुंचे श्रमिकों ने धरना-प्रदर्शन के साथ सभा भी की। इस दौरान उन्होंने एलान किया कि उनका फैक्टरी पर 270 करोड़ रुपये का बकाया है जिसका भुगतान होने तक वे फैक्टरी संपत्ति पर किसी का कब्जा नहीं होने देंगे। श्रमिकों ने कहा कि कोर्ट के आदेश का वे सम्मान करते हैं लेकिन जब तक उनका बकाया देने के लिए अल केमिस्ट कंपनी अपनी योजना का एलान नहीं करेगी, तब तक वे उसे रबर फैक्टरी की एक इंच जमीन पर भी कब्जा नहीं करने देंगे।

 

अफसर 21 सालों में भी रबर फैक्टरी प्रकरण को निस्तारित नहीं करा पाए। मेरे आग्रह पर शासन ने तीन सितंबर को नोडल अधिकारी भी नामित किया लेकिन तीन महीने गुजर जाने के बावजूद वह बैठक करने तक नहीं पहुंचे। अब पूरा प्रकरण मुख्यमंत्री को संदर्भित कर उनसे प्रभावी कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
- संतोष गंगवार, केंद्रीय मंत्री

रबर फैक्टरी प्रकरण से प्रशासन का कुछ लेनादेना नहीं है। बॉंम्बे हाईकोर्ट से जो आदेश हुआ है वह कंपनी का आंतरिक मामला है। हमने फैक्टरी की जमीन की पैमाइश कराकर रिपोर्ट बनवाकर शासन को मामला संदर्भित कर दिया है। अब इस स्थानीय प्रशासन का कोई फैसला लागू नहीं हो सकता। 
-रणवीर प्रसाद, मंडलायुक्त

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 14 दिसंबर तक रबर फैक्टरी की जमीन और सभी संपत्तियों को अल केमिस्ट कंपनी को सौंपने का आदेश दिया है जिसका हमें पालन कराना है। प्रशासन और शासन चाहे तो हाईकोर्ट में इस आदेश के खिलाफ याचिका दायर कर अपना पक्ष रख सकता है। 
-एनबी ठक्कर, रिसीवर रबर फैक्टरी
 
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