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एक करोड़ के गबन में एडीओ पंचायत पर भी शक की सुई

Sun, 24 Apr 2022 11:54 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 24 Apr 2022 11:54 PM IST
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officer may involved in fraud
बरेली। बिथरी चैनपुर की ग्राम पंचायत मोहनपुर में तैनात ग्राम विकास अधिकारी आलोक यादव के एक करोड़ का गबन करने का मामले में अफसरों के शक की सुई अब एडीओ पंचायत की ओर घूम रही है। हालांकि यह भी सवाल उठ रहा है कि बीडीओ, डीपीआरओ और डीडीओ को भी गबन पर गबन होने की भनक क्यों नहीं लगी।
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आलोक यादव के एक करोड़ का गबन करने की पोल तब खुली जब लखनऊ से पहुंचे उप निदेशक ने निरीक्षण किया। अगर वह निरीक्षण न करते तो शायद जनता को इस खेल का पता ही नहीं लगता। चुनाव से पहले ग्राम विकास अधिकारी आलोक यादव पर आरोप थे कि वह किसी एक पार्टी का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। इस आरोप में उन्हें उपायुक्त मनरेगा कार्यालय से अटैच किया गया था। चुनाव के बाद वह अपनी ग्राम पंचायतों में चले गए।
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आलोक यादव ने अटैचमेंट के दौरान ही लगभग एक करोड़ रुपये अलग-अलग ग्राम पंचायतों के खाते से निकाले। सूत्रों का कहना है कि उसी दौरान अधिकारियों को उनके कार्यों का स्थलीय सत्यापन करना चाहिए था। यदि ऐसा होता तो यह नौबत नहीं आती और एक करोड़ गबन नहीं हो पाता। इस प्रकरण के बाद अन्य ग्राम पंचायतों के कुछ अधिकारियों में हड़कंप मचा है। कहा जा रहा है कि 15 लाख से अधिक राशि जिन गांवों में खर्च हुई है, वहां की जांच कराई जाए तो कई और घोटाले सामने आ सकते हैं।
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सूत्रों का कहना है कि एडीओ पंचायत और बीडीओ से भी इस प्रकरण को लेकर स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। मालूम हो कि बिथरी चैनपुर की सात ग्राम पंचायतों के खाते से प्रधानों व ग्राम विकास अधिकारी ने मिलकर लगभग एक करोड़ रुपये निकाल लिए थे।
प्रधान अपने बचाव का रास्ता निकाल रहे
डीपीआरओ कार्यालय की ओर से जिन सात प्रधानों को नोटिस भेजे गए हैं वह अपने बचाव के रास्ते तलाश रहे हैं। कुछ नेताओं के पास जा रहे हैं तो कुछ अधिकारियों के दरबार में। वहीं उच्चाधिकारियों ने भी इशारा कर दिया है कि प्रकरण अब सार्वजनिक हो गया। इसमें किसी को बचाया गया तो उन पर भी आंच आ सकती है, ऐसे में वह प्रधानों को मदद नहीं दे रहे हैं।

गांव में विकास कार्य ग्राम प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी कराते हैं। उसके बाद सुपरवाइजर का काम एडीओ पंचायत का है। उन्हें भी इस कार्य को देखना चाहिए था। निगरानी उनको करनी चाहिए थी। कहीं न कहीं चूक हुई है। - चंद्र प्रकाश, डीडीओ
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