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सहकारी समितियों के घोटालों की जांच होगी
बरेली।
Updated Fri, 05 May 2017 01:21 AM IST
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Of co-operative societies Scandals will be investigated
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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प्रदेश के सहकारिता मंत्री मुकुल बिहारी ने कहा कि घोटाले होने की वजह से सहकारी समितियों का बुरा हाल है। ज्यादातर समितियां घाटे में चल रही हैं। पिछली सरकार के कुछ लोगों ने समितियों को अपने परिवार का भला करने के लिए इस्तेमाल किया है। समितियों में घोटाला करने वालों की जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई होगी। बहेड़ी की चीनी मिल इसका उदाहरण हैै। उन्होंने कहा कि समितियों को जिंदा करके उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने का प्रयास किया जाएगा। किसानों की फसलों के लिए समितियां बाजार तैयार करके उन्हें बिक वाने का काम करके उन्हें बिचौलियों से मुक्ति दिलाएंगे।
सर्किट हाउस में पत्रकारों से बात करके हुए कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में सहकारी समितियाें का बुरा हाल है। हमारी सरकार को दो महीने हुए हैं। हमने समितियों को कंप्यूटराइज्ड कराना शुरू कर दिया है। ई-टेंडरिंग व्यवस्था हो गई है। गेेहूं खरीद, खाद और बीज की बिक्री के अलावा समितियां और भी ऐसे काम करेंगी जिनसे किसानों का भला होगा। सब्जी किसानों को समितियों से जोड़कर उनके लिए बाजार तैयार कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि हम लालबत्ती के लिए सरकार में नहीं आए हैं। किसानों की भलाई के लिए कुछ काम करने हैं। यही वजह है कि पहली बार ऐसा हुआ कि गेहूं क्रय कें द्र खुलने पर भुगतान के लिए पैसा मिल गया। किसानों के बैठने के लिए केंद्रों पर पूरे इंतजाम किए गए हैं।
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सरकार का मकसद यह है कि समितियां अपने पैरों पर खड़े होकर आगे बढ़ें। किसानों को उनके प्रति विश्वास बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। मंत्री ने कहा कि पहले गन्ना, दूध और उद्यान भी सहकारिता का हिस्सा होता था। पिछली सरकारों ने इन्हें अपने फायदे की खातिर अलग दिया। इसे लेकर भी विचार चल रहा है। इसके बाद सहकारिता मंत्री ने सर्किट हाउस में अधिकारियों से साथ मीटिंग करके समितियों को जिंदा करके अपने पैरों पर खड़ा करने का प्लान बनाया।
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सर्किट हाउस में पत्रकारों से बात करके हुए कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में सहकारी समितियाें का बुरा हाल है। हमारी सरकार को दो महीने हुए हैं। हमने समितियों को कंप्यूटराइज्ड कराना शुरू कर दिया है। ई-टेंडरिंग व्यवस्था हो गई है। गेेहूं खरीद, खाद और बीज की बिक्री के अलावा समितियां और भी ऐसे काम करेंगी जिनसे किसानों का भला होगा। सब्जी किसानों को समितियों से जोड़कर उनके लिए बाजार तैयार कराया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि हम लालबत्ती के लिए सरकार में नहीं आए हैं। किसानों की भलाई के लिए कुछ काम करने हैं। यही वजह है कि पहली बार ऐसा हुआ कि गेहूं क्रय कें द्र खुलने पर भुगतान के लिए पैसा मिल गया। किसानों के बैठने के लिए केंद्रों पर पूरे इंतजाम किए गए हैं।
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सरकार का मकसद यह है कि समितियां अपने पैरों पर खड़े होकर आगे बढ़ें। किसानों को उनके प्रति विश्वास बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। मंत्री ने कहा कि पहले गन्ना, दूध और उद्यान भी सहकारिता का हिस्सा होता था। पिछली सरकारों ने इन्हें अपने फायदे की खातिर अलग दिया। इसे लेकर भी विचार चल रहा है। इसके बाद सहकारिता मंत्री ने सर्किट हाउस में अधिकारियों से साथ मीटिंग करके समितियों को जिंदा करके अपने पैरों पर खड़ा करने का प्लान बनाया।