बरेली: चक महमूद में परंपरागत रूट से ही निकलेगा अंजुमन जुलूस, नहीं बजेगा डीजे; बैठक में बनी सहमति
चक महमूद में सावन में कांवड़ यात्रा निकालने को लेकर दो समुदायों में मनमुटाव हुआ था। इसके चलते उस वक्त यहां दो बार बवाल भी हुआ। वहीं, अब ईद मिलादुन्नबी जुलूस में 27 व 28 सितंबर को अंजुमन जुलूस निकाले जाएंगे। प्रस्तावित मार्ग पीपल वाली मौर्य गली को लेकर इस बार दूसरे पक्ष ने आपत्ति कर दी था। फिलहाल पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने मोहल्ले में बैठक कर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाई।
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बरेली के चक महमूद में परंपरागत रास्ते से ही अंजुमन जुलूस निकाला जाएगा। पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने मंगलवार को मोहल्ले में बैठक कर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाई। बताया गया कि बैठक में तय हुआ है कि परंपरागत रास्ते से शांतिपूर्ण तरीके से अंजुमन जुलूस निकाला जाएगा। डीजे नहीं बजेगा। हालांकि मोहल्ले की महिलाएं अभी इस फैसले से संतुष्ट नहीं है।
चक महमूद में सावन में कांवड़ यात्रा निकालने को लेकर दो समुदायों में मनमुटाव हुआ था। इसके चलते उस वक्त यहां दो बार बवाल भी हुआ। नतीजा ये निकला कि आखिरी सोमवार तक विवादित रास्ते पर होकर कांवड़ यात्रा नहीं निकाली जा सकी। इसके लिए अनुमति न होने की बात आड़े आई थी। वहीं, अब ईद मिलादुन्नबी जुलूस में 27 व 28 सितंबर को अंजुमन जुलूस निकाले जाएंगे। प्रस्तावित मार्ग पीपल वाली मौर्य गली को लेकर इस बार दूसरे पक्ष ने आपत्ति कर दी थी।
बैठक में दिए तर्क, शोर करने पर चेताया
चक महमूद से निकलने वाली चारों अंजुमनों को भी परंपरागत बताया जा रहा है। हाजी दिलगीर, शौकीन व इमरान आदि अंजुमन संचालकों व बुजुर्गों ने बारादरी थाने में अधिकारियों के साथ हुई बैठक में बताया कि कई वर्षों से मौर्या गली से होकर उनकी अंजुमन निकल रही है।
इस बार आला हजरत दरगाह से ऐलान हुआ है कि डीजे न बजाया जाए। वह लोग शांतिपूर्वक तरीके से अंजुमन लेकर निकलेंगे। सीओ तृतीय आशीष प्रताप सिंह व इंस्पेक्टर हिमांशु निगम ने साफ कहा कि परंपरागत तरीके से जो होता रहा है, वही होगा। नई परंपरा किसी को नहीं डालने दी जाएगी।
इत्तेहादे मिल्लत के जुलूस की ही अनुमति
अंजुमनों के जुलूस को लेकर अनुमति न होने की बात को लेकर तरह-तरह के तर्क दिए जा रहे हैं। दरअसल, जिले भर में साल में करीब साढ़े चार सौ जुलूस व शोभायात्रा निकलती हैं, इनमें से करीब पौने दो सौ की अनुमति नहीं होतीं, वह परंपरागत श्रेणी में मानी जाती हैं और थाने के रजिस्टर में इनका उल्लेख होता है। इसी तरह मुन्ना खां के नीम से शुरू होने वाले इत्तेहादे मिल्लत मुसलेमीन के मुख्य जुलूस की अनुमति है, बाकी करीब 90 अंजुमन इस जुलूस में मिलती हैं जिनमें से अधिकांश को परंपरागत माना जाता है।
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उनका कहना है जिस तरह जुलूस में अखाड़ों पर रोक लगी उसी तरह डीजे भी पाबंदी लगेगी। इसके अलावा बाइक स्टंट और आवाज वाले साइलेंसर की बाइक पर भी पाबंदी रहेगी। वहीं महिलाओं और युवतियों को भी जुलूस में लाने के लिए मना किया गया है। यह जुलूस पुराना शहर की छह मीनार मस्जिद मुन्ना खां की नीम से शाम चार बजे रवाना होगा। इसकी कयादत दरगाह तहसीनिया के सज्जादानशीन मौलाना हस्सान रजा खान करेंगे।
अंजुमनों की डीजे की अनुमति रद्द
तीन दिन पहले ही डीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक में जहां दरगाह के प्रतिनिधि व आयोजन की मुख्य संस्था ने डीजे न बजाने को लेकर बात रखी थी, वहीं 26 अंजुमन कमेटी की ओर से डीजे बजाने की अनुमति मांगी। तर्क दिया कि इसके लिए काफी तैयारी और खर्चा हो चुका है।
सिटी मजिस्ट्रेट ने इन सभी अनुमति आवेदनों को रद्द कर दिया है। बावजूद कुछ अंजुमन ईंट पजाया चौराहे से डीजे बजाने की बात कह रही हैं। प्रदेश सरकार के एक आदेश को आधार बताया जा रहा है। हालांकि पुलिस इस मामले में सख्त है। एसपी सिटी राहुल भाटी ने बताया कि डीजे को लेकर कोई अनुमति नहीं दी है, ऐसा करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।