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ठीक नहीं खानपान.. इसलिए 60 फीसदी युवाओं की हड्डियां बेजान
सार
अर्थराइटिस दिवस आज
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bone
- फोटो : demo photo
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विस्तार
शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को उसी के खिलाफ उकसाने वाले रुमेटाइड अर्थराइटिस के केस भी युवाओं में बढ़े
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80 फीसदी से ज्यादा लोगों में विटामिन डी की कमी
70 फीसदी लोग जूझ रहे हैं कैलिश्यम की कमी से
बरेली। जिंदगी जीने के तौर-तरीके बदलने का सीधा असर हड्डियों पर पड़ रहा है। कम उम्र में ही हड्डियां इतनी बेजान हो रही हैं कि जरा सी चोट पर ही टूट जाती हैं। जोड़ों के दर्द के इलाज में दवाएं बेअसर हो रही हैं। खानपान में पौष्टिकता की कमी से शरीर में कैल्शियम और विटामिन डी की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है। ऊपर से हारमोन की गड़बड़ी ने गठिया जैसी बीमारी को भी असाध्य कर दिया है। उस रुमेटाइड अर्थराइटिस के भी मरीज लगातार बढ़ रहे हैं, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली खुद अपने खिलाफ काम करने लगती है। युवाओं को कमर के गठिया से सबसे ज्यादा जूझना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिद दो दशक पहले तक गठिया को बुजुर्गों की की बीमारी माना जाता था लेकिन अब यह युवाओं में भी आम हो चुकी है। यह समस्या कितनी व्यापक है, इसका अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है कि 80 फीसद लोगों में विटामिन डी की कमी पाई गई है। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. विनोद पागरानी के मुताबिक भारतीय जीन में वैसे भी विटामिन डी अवशोषित करने की क्षमता कम है। 70 फीसदी लोगों में कैल्शियम की भी कमी है। कुल मिलाकर 60 फीसदी युवा ऐसे हैं जिनकी हड्डियां उम्र से पहले ही बूढ़ी हो चुकी हैं। कार्टिलेज खराब होने से घुटना और कूल्हा प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ने के मामले भी बढ़ रहे हैं। गलत खानपान शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ा रहा है जिसकी वजह से जोड़ों में सूजन आ रही है।
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हड्डियों को सलामत रखना है तो नशे को कहें अलविदा
बरेली आर्थोपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. आरके सिंह का कहना है कि धूम्रपान, तंबाकू सेवन और हारमोन के असंतुलन से गठिया के मामले बढ़े हैं। पानी, हवा और सब्जियों के जरिये शरीर में पहुंचने वाले भारी तत्वों से रुमेटाइड गठिया बढ़ रहा है। इसमें शरीर की प्रतिरोधक क्षमता ही जोड़ों पर हमला करने लगती है। हड्डी रोगों की एक प्रमुख वजह खेतीबाड़ी से खानपान तक जरूरत से ज्यादा पेस्टिसाइड यानी कीटनाशक दवाओं का प्रयोग भी है। इसके अलावा विटामिन डी, फास्फोरस और कैल्शियम की कमी के साथ यूरिक एसिड के बढ़ने, प्रदूषण, व्यायाम की कमी जैसे कारणों से अर्थराइटिस के केस बढ़ रहे हैं।
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ज्यादा दवाएं खाना भी हड्डियों के लिए खतरनाक
चिकित्सकों के मुताबिक रंग-बिरंगी सब्जियां, चमकदार टमाटर, मिलावटी मिठाई खाने से बचना चाहिए। एल्कोहल का सेवन और चिकनाई युक्त खानपान भी हड्डियों के लिए ठीक नहीं है। बंद कमरों में ज्यादा देर रहने से बचने की जरूरत है। मोटापा और शुगर से बचें। कोल्ड ड्रिंक, नमक, कॉफी और चीनी की मात्रा खानपान में नियंत्रित रहनी चाहिए। इसके साथ दर्दनाशक दवाओं को भी बगैर डाक्टर की सलाह के नहीं लेना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय मोटापा दिवसः जिम से पसीना बहाने से नहीं, खानपान ठीक करने से काबू में रहेगा मोटापा
बरेली। मोटापा भी युवाओं के लिए बड़ी समस्या बन गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक अनियमित दिनचर्या के साथ जंक फूड और कोल्डड्रिंक्स जैसी अत्यधिक कैलोरी वाली चीजों का सेवन लोगों में मोटापा बढ़ा रहा है। खानपान को ठीक करने के बजाय लोग मोटापा कम करने के लिए जिम में पसीना बहा रहे हैं या फिर योग ट्रेनर डाइटीशियन की मदद ले रहे हैं।
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अर्जुन गुप्ता के मुताबिक फिटनेस का ख्याल न रखने से ही लोगों में शुगर, हाई ब्लड प्रेशर के साथ सांस और हृदय रोग समेत कई बीमारियां बढ़ जाती हैं। इनसे बचने के लिए व्यायाम जरूरी है। हर रोज कम से कम तीन किलोमीटर पैदल चलने का लक्ष्य बनाना चाहिए। हरी और ताजे सब्जी-फलों का सेवन भी जरूरी है। दिनचर्या को नियमित कर मोटापे पर नियंत्रण किया जा सकता है। जंक फूड और कोल्डड्रिंक्स से परहेज जरूरी है। मीठी चीजों के बजाय कम कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें। देर रात तक जागने और ज्यादा सोने से परहेज करके भी खुद को स्वस्थ बनाया जा सकता है। ब्यूरो
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80 फीसदी से ज्यादा लोगों में विटामिन डी की कमी
70 फीसदी लोग जूझ रहे हैं कैलिश्यम की कमी से बरेली। जिंदगी जीने के तौर-तरीके बदलने का सीधा असर हड्डियों पर पड़ रहा है। कम उम्र में ही हड्डियां इतनी बेजान हो रही हैं कि जरा सी चोट पर ही टूट जाती हैं। जोड़ों के दर्द के इलाज में दवाएं बेअसर हो रही हैं। खानपान में पौष्टिकता की कमी से शरीर में कैल्शियम और विटामिन डी की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है। ऊपर से हारमोन की गड़बड़ी ने गठिया जैसी बीमारी को भी असाध्य कर दिया है। उस रुमेटाइड अर्थराइटिस के भी मरीज लगातार बढ़ रहे हैं, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली खुद अपने खिलाफ काम करने लगती है। युवाओं को कमर के गठिया से सबसे ज्यादा जूझना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिद दो दशक पहले तक गठिया को बुजुर्गों की की बीमारी माना जाता था लेकिन अब यह युवाओं में भी आम हो चुकी है। यह समस्या कितनी व्यापक है, इसका अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है कि 80 फीसद लोगों में विटामिन डी की कमी पाई गई है। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. विनोद पागरानी के मुताबिक भारतीय जीन में वैसे भी विटामिन डी अवशोषित करने की क्षमता कम है। 70 फीसदी लोगों में कैल्शियम की भी कमी है। कुल मिलाकर 60 फीसदी युवा ऐसे हैं जिनकी हड्डियां उम्र से पहले ही बूढ़ी हो चुकी हैं। कार्टिलेज खराब होने से घुटना और कूल्हा प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ने के मामले भी बढ़ रहे हैं। गलत खानपान शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ा रहा है जिसकी वजह से जोड़ों में सूजन आ रही है।
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हड्डियों को सलामत रखना है तो नशे को कहें अलविदा
बरेली आर्थोपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. आरके सिंह का कहना है कि धूम्रपान, तंबाकू सेवन और हारमोन के असंतुलन से गठिया के मामले बढ़े हैं। पानी, हवा और सब्जियों के जरिये शरीर में पहुंचने वाले भारी तत्वों से रुमेटाइड गठिया बढ़ रहा है। इसमें शरीर की प्रतिरोधक क्षमता ही जोड़ों पर हमला करने लगती है। हड्डी रोगों की एक प्रमुख वजह खेतीबाड़ी से खानपान तक जरूरत से ज्यादा पेस्टिसाइड यानी कीटनाशक दवाओं का प्रयोग भी है। इसके अलावा विटामिन डी, फास्फोरस और कैल्शियम की कमी के साथ यूरिक एसिड के बढ़ने, प्रदूषण, व्यायाम की कमी जैसे कारणों से अर्थराइटिस के केस बढ़ रहे हैं।
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ज्यादा दवाएं खाना भी हड्डियों के लिए खतरनाक
चिकित्सकों के मुताबिक रंग-बिरंगी सब्जियां, चमकदार टमाटर, मिलावटी मिठाई खाने से बचना चाहिए। एल्कोहल का सेवन और चिकनाई युक्त खानपान भी हड्डियों के लिए ठीक नहीं है। बंद कमरों में ज्यादा देर रहने से बचने की जरूरत है। मोटापा और शुगर से बचें। कोल्ड ड्रिंक, नमक, कॉफी और चीनी की मात्रा खानपान में नियंत्रित रहनी चाहिए। इसके साथ दर्दनाशक दवाओं को भी बगैर डाक्टर की सलाह के नहीं लेना चाहिए।अंतरराष्ट्रीय मोटापा दिवसः जिम से पसीना बहाने से नहीं, खानपान ठीक करने से काबू में रहेगा मोटापा
बरेली। मोटापा भी युवाओं के लिए बड़ी समस्या बन गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक अनियमित दिनचर्या के साथ जंक फूड और कोल्डड्रिंक्स जैसी अत्यधिक कैलोरी वाली चीजों का सेवन लोगों में मोटापा बढ़ा रहा है। खानपान को ठीक करने के बजाय लोग मोटापा कम करने के लिए जिम में पसीना बहा रहे हैं या फिर योग ट्रेनर डाइटीशियन की मदद ले रहे हैं।वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अर्जुन गुप्ता के मुताबिक फिटनेस का ख्याल न रखने से ही लोगों में शुगर, हाई ब्लड प्रेशर के साथ सांस और हृदय रोग समेत कई बीमारियां बढ़ जाती हैं। इनसे बचने के लिए व्यायाम जरूरी है। हर रोज कम से कम तीन किलोमीटर पैदल चलने का लक्ष्य बनाना चाहिए। हरी और ताजे सब्जी-फलों का सेवन भी जरूरी है। दिनचर्या को नियमित कर मोटापे पर नियंत्रण किया जा सकता है। जंक फूड और कोल्डड्रिंक्स से परहेज जरूरी है। मीठी चीजों के बजाय कम कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें। देर रात तक जागने और ज्यादा सोने से परहेज करके भी खुद को स्वस्थ बनाया जा सकता है। ब्यूरो