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Bareilly News: सफलता में बाधा नहीं बनता मनचाहे अंक न मिलना या फेल होना
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बरेली। यूपी माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से शुक्रवार को हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का परीक्षा परिणाम एक साथ घोषित होना प्रस्तावित है। कुछ छात्र जश्न मनाएंगे तो कुछ एक या इससे ज्यादा विषय में मनचाहे अंक या फेल होने से निराश भी होंगे। लेकिन यह सफलता का अंत नहीं है।
इसलिए उम्मीद पूरी न होने पर डरने या घबराने की जरूरत नहीं है। क्योंकि जीवन में कोई भी परिस्थिति संभावनाओं का आखिरी पड़ाव नहीं बन सकती। ये विचार जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. आशीष कुमार ने साझा किए हैं।
कहा कि यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम में मनोनुकूल अंक न मिलने पर रीचेकिंग, स्क्रूटनी का विकल्प भी होता है। अगर प्रतीत होता है कि अंक कम मिले हैं तो इसके लिए विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा एक या दो विषय में पीछे रहे हैं तो यूपी बोर्ड सप्लीमेंट्री परीक्षा के लिए भी आवेदन कर सकते हैं। इसलिए चिंता की बात नहीं।
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अगर फेल हो गए हैं तो भी घबराने की जरूरत नहीं है। फिर यूपी बोर्ड परीक्षा में शामिल होना होगा। पिछले वर्षों में भी तमाम विद्यार्थी फेल हुए और दोबारा तैयारी कर अच्छे अंक हासिल करने में सफल रहे हैं। अगले साल अच्छे से विषयाें को तैयार करें और खुशमिजाज होकर परीक्षा दें।
डॉ. आशीष के मुताबिक अभिभावक के मारने-पीटने के डर से कई बच्चे घर से भागते हैं या आत्मघाती कदम उठाने में नहीं हिचकते। इसलिए अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चे को समझाएं। भविष्य में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करें।
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इसलिए उम्मीद पूरी न होने पर डरने या घबराने की जरूरत नहीं है। क्योंकि जीवन में कोई भी परिस्थिति संभावनाओं का आखिरी पड़ाव नहीं बन सकती। ये विचार जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. आशीष कुमार ने साझा किए हैं।
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कहा कि यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम में मनोनुकूल अंक न मिलने पर रीचेकिंग, स्क्रूटनी का विकल्प भी होता है। अगर प्रतीत होता है कि अंक कम मिले हैं तो इसके लिए विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा एक या दो विषय में पीछे रहे हैं तो यूपी बोर्ड सप्लीमेंट्री परीक्षा के लिए भी आवेदन कर सकते हैं। इसलिए चिंता की बात नहीं।
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अगर फेल हो गए हैं तो भी घबराने की जरूरत नहीं है। फिर यूपी बोर्ड परीक्षा में शामिल होना होगा। पिछले वर्षों में भी तमाम विद्यार्थी फेल हुए और दोबारा तैयारी कर अच्छे अंक हासिल करने में सफल रहे हैं। अगले साल अच्छे से विषयाें को तैयार करें और खुशमिजाज होकर परीक्षा दें।
डॉ. आशीष के मुताबिक अभिभावक के मारने-पीटने के डर से कई बच्चे घर से भागते हैं या आत्मघाती कदम उठाने में नहीं हिचकते। इसलिए अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चे को समझाएं। भविष्य में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करें।