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किसी को हक नहीं दूसरे मजहब पर टिप्पणी करने का
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बातचीत करते मौलाना सैयद सैम मेहंदी नकवी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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शिया धर्मगुरू मौलाना सैम ने कहा- हमारा टकराव सुन्नी, देवबंद या हनफी से नहीं, सरकार से मुतालबा है
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बरेली। मौजूदा हालात में उलझे पूरे समाज और खास तौर से मजहबी तौर तरीकों, विचारों और मसलकों में बंटे मुसलमानों के सवाल पर ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष एवं धर्मगुरू मौलाना सैय्यद सैम मेहंदी नकवी ने अपनी बेबाक बात कही। उन्होंने कहा समाज में मजहब कोई भी हो ये किसी का हक नहीं बनता कि वह दूसरे मजहब पर टिप्पणी करे। जो अपनी समस्या है अपनी बात है सिर्फ वो सामने रखें।
मौलाना सैम यहां पीलीभीत बाईपास स्थित सैय्यद वजाहत हुसैन रिजवी के निवास पर पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए मुस्लिम पर्सनल बोर्ड पर कहा कि कहा कि केंद्र सरकार शिया और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मर्ज करना चाहती हैं वह कुबूल नहीं। क्योंकि पहले भी जब बोर्ड एक था तो वहां तमाम लोग इस बात पर बार बार एतराज उठाते रहे कि पर्सनल लॉ बोर्ड में शिया कुबूल नहीं। तब 40 साल के बाद सोते जागे और शिया पर्सनल लॉ बोर्ड को वजूद में लाया गया। उन्होंने कहा कि उनका टकराव सुन्नी, देवबंदी, हनफी या किसी से भी नहीं है। हमारा मुतालबा सरकार से है, हमें जो कहना है सरकार से कहना है और प्यार मोहब्बत से समस्या का समाधान चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार मुसलमानों को 20 या 22 प्रतिशत जो भी मानती है उसमें एक तिहाई शिया भी हैं। उसी एतबार से उनके समाज को भी हर स्तर पर भागीदारी मिलना चाहिए।
एक और सवाल पर उन्होंने कहा कि हम अपनी बात कहने के लिए प्रोटेस्ट भी करते हैं तो अपनी जगह पर करते हैं न कि सड़क या ट्रेेन का रास्ता रोककर अपनी बात सरकार तक पहुंचाएं। हमारे इमामबाड़ों में ही इतनी जगह है कि हजारों लोग आ जाएं और पता भी न चलें। इसलिए अपनी बात को कहने के लिए आम आदमी को परेशान करना मुनासिब नहीं। इन सब के साथ कोरोना काल में बंद की गई इबादतगाहों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि मस्जिदों में नमाज पढ़ने की इजाजत दी गई, मगर सामाजिक दूरी के साथ। यह कुबूल नहीं, क्योंकि मजहब हमें दूरी बना कर नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं देता। मीलाद और मजलिसें तो हो सकती हैं। मगर नमाज में ऐसा मुमकिन नहीं। इसके अलावा उन्होंने उत्तर प्रदेश हज कमेटी और अल्पसंख्यक आयोग में चेयरमैन मुकर्रर किए जाने की मांग भी हुकूमत से की है।
मौलाना सैम यहां पीलीभीत बाईपास स्थित सैय्यद वजाहत हुसैन रिजवी के निवास पर पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए मुस्लिम पर्सनल बोर्ड पर कहा कि कहा कि केंद्र सरकार शिया और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मर्ज करना चाहती हैं वह कुबूल नहीं। क्योंकि पहले भी जब बोर्ड एक था तो वहां तमाम लोग इस बात पर बार बार एतराज उठाते रहे कि पर्सनल लॉ बोर्ड में शिया कुबूल नहीं। तब 40 साल के बाद सोते जागे और शिया पर्सनल लॉ बोर्ड को वजूद में लाया गया। उन्होंने कहा कि उनका टकराव सुन्नी, देवबंदी, हनफी या किसी से भी नहीं है। हमारा मुतालबा सरकार से है, हमें जो कहना है सरकार से कहना है और प्यार मोहब्बत से समस्या का समाधान चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार मुसलमानों को 20 या 22 प्रतिशत जो भी मानती है उसमें एक तिहाई शिया भी हैं। उसी एतबार से उनके समाज को भी हर स्तर पर भागीदारी मिलना चाहिए।
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एक और सवाल पर उन्होंने कहा कि हम अपनी बात कहने के लिए प्रोटेस्ट भी करते हैं तो अपनी जगह पर करते हैं न कि सड़क या ट्रेेन का रास्ता रोककर अपनी बात सरकार तक पहुंचाएं। हमारे इमामबाड़ों में ही इतनी जगह है कि हजारों लोग आ जाएं और पता भी न चलें। इसलिए अपनी बात को कहने के लिए आम आदमी को परेशान करना मुनासिब नहीं। इन सब के साथ कोरोना काल में बंद की गई इबादतगाहों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि मस्जिदों में नमाज पढ़ने की इजाजत दी गई, मगर सामाजिक दूरी के साथ। यह कुबूल नहीं, क्योंकि मजहब हमें दूरी बना कर नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं देता। मीलाद और मजलिसें तो हो सकती हैं। मगर नमाज में ऐसा मुमकिन नहीं। इसके अलावा उन्होंने उत्तर प्रदेश हज कमेटी और अल्पसंख्यक आयोग में चेयरमैन मुकर्रर किए जाने की मांग भी हुकूमत से की है।
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