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एनएचएआई का मूल्यांकन घोटाला : जांच को अंतिम रूप दे रहे मुख्य अभियंता
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बरेली। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के मूल्यांकन घोटाले में फंसे पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं को आरोपपत्र जारी किए जाने के बाद विस्तृत जांच चल रही है। मुख्य अभियंता अजय कुमार अब व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देते हुए जांच को अंतिम रूप दे रहे हैं। जांच आख्या जुलाई में शासन को भेजी जा सकती है।
बरेली-सितारगंज और बरेली रिंग रोड के लिए मुआवजा तय करते समय हेराफेरी की गई थी। एनएचएआई की ओर से नियुक्त निजी एजेंसी ने जमीन और परिसंपत्तियों के मूल्यांकन के बदले मुआवजा अधिक तय किया गया था। लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं ने इसका सत्यापन कर दिया था। जब जांच हुई तो संबंधित एजेंसी, एनएचएआई के तत्कालीन अधिकारियों और लोक निर्माण विभाग के तत्कालीन अभियंता जिम्मेदार पाए गए।
सहायक अभियंता स्नेहलता श्रीवास्तव, जेई राकेश कुमार, अंकित सक्सेना, सुरेंद्र सिंह और विभागीय अमीन शिवशंकर के नाम आरोपपत्र जारी हुए थे। जांच की जिम्मेदारी नवंबर 2024 में मुख्य अभियंता अजय कुमार को सौंपी गई है। छह महीने में जांच पूरी होनी है। मुख्य अभियंता को सभी ने जवाब दाखिल कर दिए हैं। अब मुख्य अभियंता ने व्यक्तिगत सुनवाई के लिए पत्र जारी किया है। ब्यूरो
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बरेली-सितारगंज और बरेली रिंग रोड के लिए मुआवजा तय करते समय हेराफेरी की गई थी। एनएचएआई की ओर से नियुक्त निजी एजेंसी ने जमीन और परिसंपत्तियों के मूल्यांकन के बदले मुआवजा अधिक तय किया गया था। लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं ने इसका सत्यापन कर दिया था। जब जांच हुई तो संबंधित एजेंसी, एनएचएआई के तत्कालीन अधिकारियों और लोक निर्माण विभाग के तत्कालीन अभियंता जिम्मेदार पाए गए।
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सहायक अभियंता स्नेहलता श्रीवास्तव, जेई राकेश कुमार, अंकित सक्सेना, सुरेंद्र सिंह और विभागीय अमीन शिवशंकर के नाम आरोपपत्र जारी हुए थे। जांच की जिम्मेदारी नवंबर 2024 में मुख्य अभियंता अजय कुमार को सौंपी गई है। छह महीने में जांच पूरी होनी है। मुख्य अभियंता को सभी ने जवाब दाखिल कर दिए हैं। अब मुख्य अभियंता ने व्यक्तिगत सुनवाई के लिए पत्र जारी किया है। ब्यूरो
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