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Bareilly News: बच्चों की सेहत पर बेपरवाही भारी, 24 में सीवियर एनिमिया की पुष्टि

Tue, 10 Sep 2024 05:14 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 10 Sep 2024 05:14 AM IST
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Negligence is taking a toll on children's health, severe anemia confirmed in 24
बरेली। पौष्टिक घरेलू आहार के बजाय फास्ट और जंक फूड का सेवन बच्चों में सीवियर एनीमिया की वजह बन रहा है। बीमार होने पर अस्पताल में भर्ती हो रहे बच्चों में से करीब 30 फीसदी में हीमोग्लोबिन कम मिल रहा है। इसकी पुष्टि जिला अस्पताल बच्चा वार्ड के चिकित्सक कर रहे हैं।
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आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले माह जिला अस्पताल में 52 बच्चे खून की कमी से हालत बिगड़ने पर भर्ती हुए। इनमें 24 बच्चे सीवियर एनीमिक यानी खून की कमी से ग्रसित मिले। जिन्हें खून चढ़ाना पड़ा। ज्यादातर बच्चों के लिए उनके अभिभावकों ने रक्तदान किया। कुछ बच्चे जिनके परिजन किन्हीं वजहों से खून नहीं दे सकते थे, उन्हें ब्लड बैंक से निशुल्क खून उपलब्ध कराया गया। इलाज से स्वस्थ बच्चे को डिस्चार्ज किया जा चुका है। वार्ड स्टाफ के मुताबिक सभी बच्चे तीन से दस वर्ष के रहे।
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वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप के मुताबिक बच्चों में एनीमिया की वजह आयरन डिफिशिएंसी होती है। अगर गर्भावस्था के दौरान मां एनीमिक रही हो तो बच्चे भी एनीमिक हो सकते हैं। इसके अलावा थैलेसीमिया होने पर भी एनीमिक होते हैं। पेट में कीड़े भी वजह होती है।
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छह माह बाद दूध के साथ आहार बेहद जरूरी
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनीस बेग के अनुसार बच्चों को भरपूर दूध पीता देख अभिभावकों को सेहत मजबूत होने की उम्मीद रहती है। पर ऐसा नहीं है। अगर बच्चा छह माह से ज्यादा है तो दूध से मिलने वाले पोषण के साथ अन्य पोषक तत्वों की जरूरत होती है। पेट में कीड़े होने पर डॉक्टर की सलाह पर ही बच्चों को कृमिनाशक दवा दें। अनदेखी करने पर एनीमिया बच्चों के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है।


बच्चों में खून की कमी से लक्षण
एनीमिक यानी रक्ताल्पता के चपेट में आए बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इससे वे बार-बार बीमार होते हैं। उनमें थकान, कमजोरी, मुंह में छाले निकलना, वजन घटना, बेचैनी और चिड़चिड़ापन होना, खेलकूद या अन्य शारीरिक गतिविधि करने पर सांस फूलना, चेहरे और त्वचा का रंग पीला और सफेद होना, मिट्टी खाना आदि लक्षण दिखाई देते हैं।
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