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Bareilly News: दिव्यांगों की सहूलियत पर उपेक्षा का ताला
Tue, 04 Aug 2026 01:25 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Tue, 04 Aug 2026 01:25 AM IST
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बरेली। दिव्यांगजन को बेहतर शिक्षा और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सुभाषनगर क्षेत्र के पटेल विहार में बनाए गए संस्थानों पर ताला लटक रहा है। एक वर्ष पहले तैयार हुए तीन संस्थानों में से केवल मानसिक मंदित आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्र (पुरुष) का ही संचालन शुरू हो सका है। ममता राजकीय मानसिक मंदित बालिका विद्यालय व स्पर्श विद्यालय स्टाफ के अभाव में बंद पड़े हैं। दोनों भवनों पर ताले का पहरा होने से जरूरतमंदों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन भवनों का निर्माण वर्ष 2025 में पूर्ण हो गया था, लेकिन संचालन के लिए शिक्षक, वार्डन और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं हो सकी। इससे दो संस्थान शुरू नहीं हो पाए। बंद पड़े भवनों की नियमित निगरानी नहीं होने से शाम ढलते ही यहां अराजक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है। इससे आसपास रहने वाले लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
सात करोड़ रुपये से हुआ था निर्माण
शासन की ओर से इन संस्थानों के निर्माण के लिए दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग को सात करोड़ जारी किए गए थे। उद्देश्य था कि जिले के मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों, बालिकाओं और पुरुषों को सुरक्षित वातावरण में रहने, भोजन, स्वास्थ्य देखभाल, विशेष शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण की सुविधा एक ही परिसर में उपलब्ध हो सके।
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वर्जन
स्टाफ की तैनाती और संचालन से संबंधित प्रक्रिया शासन स्तर पर लंबित है। कई बार पत्राचार भी किया जा चुका है। अब आउटसोर्सिंग के माध्यम से स्टाफ की तैनाती कर संस्थानों का संचालन शुरू कराने की योजना है। शासन से अनुमति मिलते ही नियुक्तियां शुरू की जाएंगी। - चमन सिंह, जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी
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दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन भवनों का निर्माण वर्ष 2025 में पूर्ण हो गया था, लेकिन संचालन के लिए शिक्षक, वार्डन और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं हो सकी। इससे दो संस्थान शुरू नहीं हो पाए। बंद पड़े भवनों की नियमित निगरानी नहीं होने से शाम ढलते ही यहां अराजक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है। इससे आसपास रहने वाले लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
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सात करोड़ रुपये से हुआ था निर्माण
शासन की ओर से इन संस्थानों के निर्माण के लिए दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग को सात करोड़ जारी किए गए थे। उद्देश्य था कि जिले के मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों, बालिकाओं और पुरुषों को सुरक्षित वातावरण में रहने, भोजन, स्वास्थ्य देखभाल, विशेष शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण की सुविधा एक ही परिसर में उपलब्ध हो सके।
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स्टाफ की तैनाती और संचालन से संबंधित प्रक्रिया शासन स्तर पर लंबित है। कई बार पत्राचार भी किया जा चुका है। अब आउटसोर्सिंग के माध्यम से स्टाफ की तैनाती कर संस्थानों का संचालन शुरू कराने की योजना है। शासन से अनुमति मिलते ही नियुक्तियां शुरू की जाएंगी। - चमन सिंह, जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी