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पहला नवरात्र आज, मंदिरों, घरों में होगी देवी की पूजा
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Sun, 18 Mar 2018 01:34 AM IST
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नवमी तिथि का क्षय होने के कारण इस बार नवरात्र आठ दिन के हैं। नवरात्र में कलश स्थापना और पूजा शुभ और श्रेष्ठ मुहूर्त में की जाए तो विशेष फलदायी होती है।
तुलसी मठ के महंत कमल नयन दास ने बताया कि नवरात्र में घट स्थापना शुभ मुहूर्त में ही करनी चाहिए। श्रेष्ठ समय अभिजीत मुहूर्त पूर्वान्ह 11:36 से दोपहर 12:24 बजे तक है। इससे पहले सुबह 5:05 से 6:30 बजे तक और इसके बाद सुबह 8:05 से दोपहर 12:35 बजे तक शुभ समय है। इस दौरान की गई पूजा विशेष फलदायी होगी। राहुकाल में घट स्थापना और पूजन करने से बचें। राहुकाल शाम 05:00 से 06:30 बजे तक रहेगा।
सरल विधि से ऐसे करें घट स्थापना
घट स्थापना के लिए सबसे पहले शुद्ध मिट्टी में गाय का गोबर मिलाकर उसमें जौ मिला दें, फिर पूजा स्थान के ईशान कोण में मंत्र ‘ऊं वरुणाय नम:’ का उच्चारण करते हुए कलश स्थापित कर दें। कलश में लौंग, इलायची, कमलगट्टा, सुपारी, दूर्वा, सिक्का, सोने या चांदी की वस्तु डालें और गंगाजल भरें। कलश के ऊपर, आम, पाकड, पीपल, गूलर और बरगद के पत्ते सजाएं। इसके ऊपर जटायुक्त नारियल कपड़े में बांधकर रखें। दूध, दही, शहद, घी और बूरा से स्नान कराएं, फिर जनेऊ चढ़ाएं, रोली चंदन का तिलक लगाएं। अक्षत चढ़ाएं, धूप, दीप, नैवेध का भोग लगाकर ऋतुफल, पान और फूल चढ़ाएं। इसके बाद देवी की पूजा आरंभ करें।
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तुलसी मठ के महंत कमल नयन दास ने बताया कि नवरात्र में घट स्थापना शुभ मुहूर्त में ही करनी चाहिए। श्रेष्ठ समय अभिजीत मुहूर्त पूर्वान्ह 11:36 से दोपहर 12:24 बजे तक है। इससे पहले सुबह 5:05 से 6:30 बजे तक और इसके बाद सुबह 8:05 से दोपहर 12:35 बजे तक शुभ समय है। इस दौरान की गई पूजा विशेष फलदायी होगी। राहुकाल में घट स्थापना और पूजन करने से बचें। राहुकाल शाम 05:00 से 06:30 बजे तक रहेगा।
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सरल विधि से ऐसे करें घट स्थापना
घट स्थापना के लिए सबसे पहले शुद्ध मिट्टी में गाय का गोबर मिलाकर उसमें जौ मिला दें, फिर पूजा स्थान के ईशान कोण में मंत्र ‘ऊं वरुणाय नम:’ का उच्चारण करते हुए कलश स्थापित कर दें। कलश में लौंग, इलायची, कमलगट्टा, सुपारी, दूर्वा, सिक्का, सोने या चांदी की वस्तु डालें और गंगाजल भरें। कलश के ऊपर, आम, पाकड, पीपल, गूलर और बरगद के पत्ते सजाएं। इसके ऊपर जटायुक्त नारियल कपड़े में बांधकर रखें। दूध, दही, शहद, घी और बूरा से स्नान कराएं, फिर जनेऊ चढ़ाएं, रोली चंदन का तिलक लगाएं। अक्षत चढ़ाएं, धूप, दीप, नैवेध का भोग लगाकर ऋतुफल, पान और फूल चढ़ाएं। इसके बाद देवी की पूजा आरंभ करें।
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