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राष्ट्रीय प्रसारण दिवस: श्रोताओं को लुभाना नहीं सरोकारों से जोड़ना आकाशवाणी का मंत्र
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डॉ. अजयवीर सिंह।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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आकाशवाणी केंद्र पर हर दिन पहुंच रहे हैं फरमाइशी गीतों के लिए तमाम पत्र
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नए एफएम रेडियो चैनलों के प्रसारण से शहरी श्रोता हुए कम, बुजुर्ग अभी भी हैं जुड़े
बरेली। संचार क्रांति के दौर में प्रसार क्षमता बढ़ाने के लिए नए एफएम रेडियो चैनल हर तरकीब अपना रहे हैं। उधर, आकाशवाणी अपने मंत्र ‘बहुजन हिताय बहुजन सुखाय’ से सूचना, शिक्षा के साथ लोगों का मनोरंजन भी करा रहा है। आज भी लाखों लोगों की सुबह आकाशवाणी के रामचरित मानस गान का श्रवण करने के साथ होती है। लोगों की घड़ियों की सुइयों की दिशा भी यहीं से तय हो रही है।
बदायूं रोड पर बुखारा में स्थित आकाशवाणी केंद्र की स्थापना 17 जून, 1993 को हुई थी। कृष्ण गोपाल शर्मा पहले केंद्राध्यक्ष (स्टेशन डायरेक्टर) नियुक्त हुए थे। वर्तमान केंद्राध्यक्ष डॉ. अजयवीर सिंह ने बताया कि तब से लेकर आज तक आकाशवाणी से प्रसारित कार्यक्रमों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया गया है। तमाम नए एफएम रेडियो चैनल के साथ ही इंटरनेट, मोबाइल आदि वजहों से शहरों में भले ही श्रोताओं की तादाद कम हुई हो, लेकिन गांवों में आज भी आकाशवाणी का कोई विकल्प नहीं है। मातृभाषा हिंदी के शुद्ध उच्चारण के लिए आज भी लोग बच्चों को आकाशवाणी के कार्यक्रम सुनने का सुझाव देते हैं। यह इसकी विश्वसनीयता का ही प्रमाण है।
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उन्होंने बताया कि 23 जुलाई 1927 को प्रायोगिक तौर पर भारत सरकार और इंडियन ब्रॉडकास्ट लिमिटेड के बीच समझौते के तहत रेडियो प्रसारण शुरू हुआ था। उस दौरान अंग्रेज ही इसका संचालन करते थे। वर्ष 1936 में इसका नाम ऑल इंडिया रेडियो हुआ और फिर आजादी के बाद 1957 में आकाशवाणी रखा गया। तब से दूर अंचलों के गांवों में सूचना, शिक्षा और संस्कारों के प्रति लोगों को आकाशवाणी केंद्र जागरूक कर रहा है।
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प्रसारण में प्रदेश में नंबर वन है बरेली केंद्र
केंद्राध्यक्ष डॉ. सिंह के मुताबिक, बरेली आकाशवाणी की पहुंच नैनीताल, शाहजहांपुर, पीलीभीत, बदायूं तक है। सामाजिक जागरूकता के कार्यक्रमों के लगातार प्रसारण के चलते कई बार बरेली आकाशवाणी को सम्मान से भी नवाजा गया है। बरेली समेत आसपास के जिलों से तमाम लोगों के पत्र आज भी केंद्र पर पहुंच रहे हैं। इनमें किसानों की समस्याएं, फरमाइशी गीत, बीमारियों आदि विषयों पर सवाल जवाब होते हैं।
लोगों को स्मार्ट बनाने की शुरू होगी कवायद
डॉ. सिंह के मुताबिक, बरेली स्मार्ट सिटी बन रहा है, इसलिए लोगों को स्मार्ट बनाने की पहल शुरू हुई है। आकाशवाणी केंद्र लोगों को ट्रैफिक रूल्स, पर्यावरण, साफ सफाई, स्वास्थ्य आदि के प्रति जागरूक करेगा। रामचरित मानस गान, नमस्ते बरेली, युववाणी, अंकुर, किसानवाणी, नारी संसार, घर अंगना, साहित्यिकी बेहद लोकप्रिय कार्यक्रम हैं। कार्यक्रम अधिकारी प्रवीण कुमार, मंशाराम यदुवंशी, रमेश चंद्रा, प्रसारण अधिकारी कुंवर बहादुर सिंह, अभियंता प्रेम सिंह आदि केंद्र को नबंर बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं।
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नए एफएम रेडियो चैनलों के प्रसारण से शहरी श्रोता हुए कम, बुजुर्ग अभी भी हैं जुड़े बरेली। संचार क्रांति के दौर में प्रसार क्षमता बढ़ाने के लिए नए एफएम रेडियो चैनल हर तरकीब अपना रहे हैं। उधर, आकाशवाणी अपने मंत्र ‘बहुजन हिताय बहुजन सुखाय’ से सूचना, शिक्षा के साथ लोगों का मनोरंजन भी करा रहा है। आज भी लाखों लोगों की सुबह आकाशवाणी के रामचरित मानस गान का श्रवण करने के साथ होती है। लोगों की घड़ियों की सुइयों की दिशा भी यहीं से तय हो रही है।
बदायूं रोड पर बुखारा में स्थित आकाशवाणी केंद्र की स्थापना 17 जून, 1993 को हुई थी। कृष्ण गोपाल शर्मा पहले केंद्राध्यक्ष (स्टेशन डायरेक्टर) नियुक्त हुए थे। वर्तमान केंद्राध्यक्ष डॉ. अजयवीर सिंह ने बताया कि तब से लेकर आज तक आकाशवाणी से प्रसारित कार्यक्रमों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया गया है। तमाम नए एफएम रेडियो चैनल के साथ ही इंटरनेट, मोबाइल आदि वजहों से शहरों में भले ही श्रोताओं की तादाद कम हुई हो, लेकिन गांवों में आज भी आकाशवाणी का कोई विकल्प नहीं है। मातृभाषा हिंदी के शुद्ध उच्चारण के लिए आज भी लोग बच्चों को आकाशवाणी के कार्यक्रम सुनने का सुझाव देते हैं। यह इसकी विश्वसनीयता का ही प्रमाण है।
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उन्होंने बताया कि 23 जुलाई 1927 को प्रायोगिक तौर पर भारत सरकार और इंडियन ब्रॉडकास्ट लिमिटेड के बीच समझौते के तहत रेडियो प्रसारण शुरू हुआ था। उस दौरान अंग्रेज ही इसका संचालन करते थे। वर्ष 1936 में इसका नाम ऑल इंडिया रेडियो हुआ और फिर आजादी के बाद 1957 में आकाशवाणी रखा गया। तब से दूर अंचलों के गांवों में सूचना, शिक्षा और संस्कारों के प्रति लोगों को आकाशवाणी केंद्र जागरूक कर रहा है।
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