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...तो अतिक्रमण हटाए बिना हो गई तलीझाड़ सफाई
बरेली
Updated Tue, 16 Jun 2015 01:35 AM IST
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नगर निगम की जेसीबी, सरकारी डीजल, प्राइवेट ट्रैक्टर-ट्राली, ठेके पर रोजाना 250 लेबर और 60 लाख का बजट। यह है बरसात से पहले नगर निगम से बनाया गया नाले की तलीझाड़ सफाई का खाका। पिछले डेढ़ माह से शहर के बड़े-छोटे नाले तलीझाड़ साफ कराने का दावा जोर-शोर से किया जा रहा है। इस काम में तमाम खेल हो रहे हैं। इनमें से ही एक यह भी है कि अधिकांश नालों पक्के स्लैब से लेकर दुकानों तक का अतिक्रमण होने के बावजूद तलीझाड़ सफाई हो रही है।
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शहर में बड़े और छोटे मिलाकर 109 नाले हैं। बरसात पूर्व तलीझाड़ नाला सफाई में आठ जेसीबी, तीन चेन एक्सीवेटर और चार मिनी चेन एक्सीवेटर लगे हैं। इनमें प्रतिदिन खर्च होने वाले डीजल का हिसाब गोपनीय है। इसके अलावा नाला सफाई में 30 ट्रैैक्टर-ट्राली भी लगी हैं। हर ट्रैक्टर में 15 से 20 लीटर डीजल अलग से लगता है। सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के वाहनों को डीजल संयुक्त रूप से देने की व्यवस्था है। अब इसमें अनियमितताएं कहां हो रही हैं, ये किसी को नहीं पता। प्रत्येक ट्रैक्टर-ट्राली पर दो ठेकेदार नईम शास्त्री और अंशू आर्या पांच लेबर दे रहे हैं। प्रत्येक वार्ड में 10 प्राइवेट सफाई कर्मचारी अलग से 10 दिनों के लिए दिए जा रहे हैं। अगर इतनी व्यवस्था कागजों के बजाय हकीकत में होती तो अब तक शहर का कोई नाला-नाली चोक नहीं रहता। डेढ़ माह के सफाई अभियान में किसी भी नाले से अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो फिर नाले तलीझाड़ कैसे साफ हो गए, यह तो नगर निगम ही बेहतर बता सकता है।
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अधूरा छोड़ा हार्टमैन नाले का निर्माण
हार्टमैन पुलिया के आगे बने नाले को नगर निगम के ठेकेदार ने अधूरा छोड़ दिया है। आधा नाला पक्का बन चुका है जबकि आधा कच्चा है। सफाई न होने से पूरा नाला चोक है। इससे बरसात में जलभराव होने से हार्टमैन के आसपास की आधा दर्जन से ज्यादा कॉलोनियों में जलभराव की आशंका से स्थानीय बाशिंदे परेशान हैं। इलाके के लोगों ने अधूरे नाले का निर्माण पूरा करने और नाले की सफाई कराए जाने की मांग की है।
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नाला सफाई युद्ध स्तर पर कराई जा रही है। पक्का अतिक्रमण होने से कई जगह नाले साफ नहीं हो पाए हैं। इसको निर्माण विभाग से मिलकर हटवाया जाएगा। बरसात में जलभराव नहीं होगा। - डॉ. एसपीएस सिंधू, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।