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कागजों पर साफ, हकीकत में चोक
बरेली
Updated Sun, 07 Jun 2015 01:17 AM IST
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आठ बड़े नालों में एक सतीपुर नाला केवल कागजों में साफ हो गया। हकीकत में ये नाला पूरा का पूरा चोक है। बरसात से पहले नाले की तलीझाड़ सफाई न होने से आधे शहर के बाशिंदे जलभराव से आशंकित हैं। पिछले पांच साल से ये नाला तलीझाड़ साफ नहीं होने से बरसात में हर साल जलभराव होता है।
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सतीपुर नाले से सहसवानी टोला, नवादा शेखान, कटरा चांद खां, सतीपुर, मीरा की पैठ, बालजती आदि इलाकों से पानी की निकासी पीलीभीत बाईपास पर होती है। करीब 2.5 किलोमीटर लंबा ये नाला शहर के पुराना शहर के बड़े हिस्से में जलभराव रोकता है। ये नाला पिछले पांच साल से ज्यादा समय से तलीझाड़ नहीं हुआ है। होशियार सिंह डेयरी वाले के घर के पास पूरी तरह चोक है। नाले में दो से ढाई फुट लंबी घास जमी है। सहसवानी टोला पुलिया के निकट सड़क टूटने से नाला चौड़ा हो चुका है। ये भैंसों के नहाने के काम में आता है। पूरा नाला कूड़ा करकट से आबाद है, जिससे पानी दिखाई तक नहीं देता। नाला सफाई पर नगर निगम 60 लाख का बजट खर्च कर रहा है। स्थानीय बाशिंदों के मुताबिक अभी तक एक बार भी नाला सफाई न तो जेसीबी से कराई गई और न ही मैनुअल। हालत ये है कि मैनुअल नाला सफाई में एक ठेकेदार की 14 लाख की फाइल भुगतान के लिए लगी हुई है। ऊपर से लेकर नीचे तक सबका हिस्सा भी तय हो चुका है। ठेकेदार को नाले की बिना सफाई कराए पेमेंट करने की तैयारी है।
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क्या कहते हैं स्थानीय बाशिंदे
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‘नाला सफाई के लिए न तो जेसीबी आई और न ही लेबर। कब नाला साफ हो गया। हमे पता तक नहीं चला।’ सतीश कुमार, निवासी सतीपुर
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‘नाले में इतनी घास खड़ी है कि पानी तक दिखाई नहीं देता। अगर सफाई नहीं की गई तो बरसात में ये पूरा इलाका नरक बनेगा।’ आरके बाथम, चिकित्सक
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‘सुना है कि नाला सफाई में 60 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। नाले की हालत देख लीजिए। पानी का निकास तक नहीं हो रहा। बरसात में गलियां तालाब बन जाएंगी।’ पप्पू मौर्य, जरनल स्टोर
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‘नाला सफाई केवल कागजों में हुई है। हकीकत में अब तक कोई नाला साफ करने नहीं आया। हर साल बरसात में यहां के लोग जलभराव का सामना करते हैं। इस बार भी वही होगा।’ रुपेंद्र पटेल, पार्षद